मछलियां मरने के बाद एक्शन में आया GDA:5 सदस्यीय समिति रोज करेगी रामगढ़ताल की निगरानी

रामगढ़ताल में शुक्रवार को अचानक मछलियां मर गईं तो एक बार फिर ताल के पानी की शुद्धता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस घटना के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) हरकत में आ गया है। आनन-फानन में प्राधिकरण के सचिव पुष्पराज सिंह ने 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति अब रोज ताल का निरीक्षण करेगी और वहां की स्थिति से सचिव को अवगत कराएगी। सचिव ने बताया कि मछलियों के मरने की जानकारी मिलने के बाद प्राधिकरण की टीम ने रामगढ़ताल का निरीक्षण किया। ताल में 100 से 150 मछलियां मरी पाई गई हैं। प्राधिकरण की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर मछलियों की मौत किस कारण हुई है। प्राधिकरण ने एक बार फिर ताल की सफाई को लेकर किए जा रहे अपने प्रयासों को दोहराया है। जहां मछलियां मरीं, वहां गंदगी का अंबार प्राधिकरण सफाई के लिए नियुक्त एजेंसी के साथ ही अपनी टीम द्वारा भी रोज साफ-सफाई कराने का दावा करता रहा है। शनिवार को एक बार फिर इन दावों को दोहाराया गया है लेकिन जहां मछलियां मरी हैं, वहां गंदगी का अंबार है। दुर्गंध उठने से आसपास के लोग परेशान हैं। माना जा रहा है कि सांस नहीं ले पाने की वजह से मछलियां मर गईं। तड़पते हुए वे ताल के किनारे पत्थरों पर भी आ गई थीं। पत्थरों पर भी कई मछलियां मरी पायी गईं। जलकुंभी सड़ी हुई अवस्था में है। उसके बीच में पानी पूरी तरह से हरा हो चुका है, जिससे दुर्गंध भी उठती रहती है। प्राधिकरण का दावा है कि लगभग सभी नालों को टैप कर दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर गंदा पानी आता कहां से है। पानी में आक्सीजन मेंटेन रखने के लिए फाउंटेन चलाने का दावा भी किया जाता है लेकिन कभी-कभी कुछ फाउंटेन ही वहां संचालित पाए जाते हैं। ओएसडी की अध्यक्षता में गठित समिति में मछुआरे भी सचिव ने बताया कि रामगढ़ताल की नियमित रूप से निगरानी के लिए गठित 5 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता ओएसडी प्रखर उत्तम करेंगे। इसमें प्राधिकरण के अन्य अधिकारियों के साथ स्थानीय मछुआरों को भी रखा गया है। ये प्रतिदिन ताल का निरीक्षण करेंगे और वहां की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट सचिव को सौंपेंगे। सचिव ने जीडीए अधिकारियों एवं मछुआरों के साथ बैठक कर इसकी जानकारी भी दी। अब जानिए प्राधिकरण ने क्या दावे किए हैं? - अधिकारियों का कहना है कि मछली मरने की सूचना के बाद ताल का निरीक्षण गया। वहां 100 से 150 मछलियां मृत पायी गईं। - ताल के चारो ओर प्राधिकरण की ओर से सफाई का काम किया जा रहा है। - जल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिदिन ताल के जल का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। - पानी की सतह पर फैली जलकुंभी एवं अन्य खर-पतवार को मशीनों एवं सफाई कर्मियों द्वारा प्रतिदिन साफ कराया जा रहा है। - पानी में आक्सीजन का स्तर बढ़ाने के लिए प्रतिदिन फाउंटेन का संचालन किया जा रहा है। - तालाब में सीधे गिरने वाले गंदे नालों को बूम बैरिकेटिंग लगाकर रोका जा रहा है। - गंदे नालों को जल निगम की ओर से टैप कर दिया गया है। - आसपास के दुकानदारों एवं लोगों को जागरूक किया गया कि ताल में प्लास्टिक एवं कचरा न फेंकें। - जागरूकता के लिए जगह-जगह संकेतक बोर्ड भी लगाए गए हैं।

Jan 17, 2026 - 14:43
 0
मछलियां मरने के बाद एक्शन में आया GDA:5 सदस्यीय समिति रोज करेगी रामगढ़ताल की निगरानी
रामगढ़ताल में शुक्रवार को अचानक मछलियां मर गईं तो एक बार फिर ताल के पानी की शुद्धता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस घटना के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) हरकत में आ गया है। आनन-फानन में प्राधिकरण के सचिव पुष्पराज सिंह ने 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति अब रोज ताल का निरीक्षण करेगी और वहां की स्थिति से सचिव को अवगत कराएगी। सचिव ने बताया कि मछलियों के मरने की जानकारी मिलने के बाद प्राधिकरण की टीम ने रामगढ़ताल का निरीक्षण किया। ताल में 100 से 150 मछलियां मरी पाई गई हैं। प्राधिकरण की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर मछलियों की मौत किस कारण हुई है। प्राधिकरण ने एक बार फिर ताल की सफाई को लेकर किए जा रहे अपने प्रयासों को दोहराया है। जहां मछलियां मरीं, वहां गंदगी का अंबार प्राधिकरण सफाई के लिए नियुक्त एजेंसी के साथ ही अपनी टीम द्वारा भी रोज साफ-सफाई कराने का दावा करता रहा है। शनिवार को एक बार फिर इन दावों को दोहाराया गया है लेकिन जहां मछलियां मरी हैं, वहां गंदगी का अंबार है। दुर्गंध उठने से आसपास के लोग परेशान हैं। माना जा रहा है कि सांस नहीं ले पाने की वजह से मछलियां मर गईं। तड़पते हुए वे ताल के किनारे पत्थरों पर भी आ गई थीं। पत्थरों पर भी कई मछलियां मरी पायी गईं। जलकुंभी सड़ी हुई अवस्था में है। उसके बीच में पानी पूरी तरह से हरा हो चुका है, जिससे दुर्गंध भी उठती रहती है। प्राधिकरण का दावा है कि लगभग सभी नालों को टैप कर दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर गंदा पानी आता कहां से है। पानी में आक्सीजन मेंटेन रखने के लिए फाउंटेन चलाने का दावा भी किया जाता है लेकिन कभी-कभी कुछ फाउंटेन ही वहां संचालित पाए जाते हैं। ओएसडी की अध्यक्षता में गठित समिति में मछुआरे भी सचिव ने बताया कि रामगढ़ताल की नियमित रूप से निगरानी के लिए गठित 5 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता ओएसडी प्रखर उत्तम करेंगे। इसमें प्राधिकरण के अन्य अधिकारियों के साथ स्थानीय मछुआरों को भी रखा गया है। ये प्रतिदिन ताल का निरीक्षण करेंगे और वहां की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट सचिव को सौंपेंगे। सचिव ने जीडीए अधिकारियों एवं मछुआरों के साथ बैठक कर इसकी जानकारी भी दी। अब जानिए प्राधिकरण ने क्या दावे किए हैं? - अधिकारियों का कहना है कि मछली मरने की सूचना के बाद ताल का निरीक्षण गया। वहां 100 से 150 मछलियां मृत पायी गईं। - ताल के चारो ओर प्राधिकरण की ओर से सफाई का काम किया जा रहा है। - जल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिदिन ताल के जल का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। - पानी की सतह पर फैली जलकुंभी एवं अन्य खर-पतवार को मशीनों एवं सफाई कर्मियों द्वारा प्रतिदिन साफ कराया जा रहा है। - पानी में आक्सीजन का स्तर बढ़ाने के लिए प्रतिदिन फाउंटेन का संचालन किया जा रहा है। - तालाब में सीधे गिरने वाले गंदे नालों को बूम बैरिकेटिंग लगाकर रोका जा रहा है। - गंदे नालों को जल निगम की ओर से टैप कर दिया गया है। - आसपास के दुकानदारों एवं लोगों को जागरूक किया गया कि ताल में प्लास्टिक एवं कचरा न फेंकें। - जागरूकता के लिए जगह-जगह संकेतक बोर्ड भी लगाए गए हैं।