पटना में जुटे देशभर के गाइनी कैंसर विशेषज्ञ:इलाज में आधुनिक सर्जरी पर जोर, लाइव सर्जरी में रोबोटिक इंडोमेट्रियल सर्जरी और HIPEC तकनीक दिखाई
पटना में शनिवार को 'एविडेंस टू एक्सीलेंस इन गाइनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजी' कार्यक्रम हुआ। इसमें लाइव सर्जरी के दौरान रोबोटिक इंडोमेट्रियल सर्जरी, HIPEC के साथ CRS और रेडिकल हिस्टेरेक्टॉमी जैसी तकनीकों पर चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का आयोजन सवेरा कैंसर अस्पताल, सोसाइटी ऑफ ऑन्कोलॉजी बिहार और पटना ऑब्स्टेट्रिक एंड गाइनेकोलॉजिकल सोसाइटी (POGS) ने मिलकर किया। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि महिलाओं में गाइनी कैंसर के इलाज के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल जरूरी है। इससे इलाज के बेहतर नतीजे मिलते हैं। कैंसर की जटिलता को देखते हुए समय पर जांच, सही इलाज और नई सर्जिकल तकनीकों तक मरीजों की पहुंच बढ़ाना जरूरी है। बीमारी की समय पर पहचान और इलाज जरूरी- डॉ. हेमंत बी. टोंगांवकर मुंबई के नानावती मैक्स अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत बी. टोंगांवकर ने वैज्ञानिक सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा, कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो चिंता की बात है। इससे बचाव के लिए जागरूकता के साथ-साथ बीमारी की समय पर पहचान और इलाज जरूरी है। डॉ. टोंगांवकर ने बताया, ‘महिलाओं में गाइनी कैंसर के कई कारण हैं। इनमें बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी भी शामिल है। खासकर ग्रामीण इलाकों में कई महिलाएं अपनी सेहत से जुड़ी बातें परिवार या डॉक्टर से खुलकर नहीं बता पाती हैं।' विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अगर बीमारी की पहचान शुरुआती स्टेज में हो जाए, तो इलाज के बेहतर विकल्प मिलते हैं और मरीज के ठीक होने की संभावना भी बढ़ जाती है। ओपन से लैप्रोस्कोपिक और अब रोबोटिक सर्जरी तक पहुंचा इलाज डॉ. हेमंत बी. टोंगांवकर ने कहा, ‘कैंसर सर्जरी की तकनीक में लगातार बदलाव हो रहा है। पहले जहां ओपन सर्जरी प्रमुख विकल्प थी, वहीं इसके बाद लैप्रोस्कोपिक सर्जरी ने जगह बनाई। अब रोबोटिक सर्जरी तेजी से आधुनिक कैंसर उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है।’ उन्होंने कहा कि नई तकनीक का उद्देश्य केवल तकनीक का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि मरीज को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना होना चाहिए। सवेरा कैंसर अस्पताल के कार्यों को सराहा उन्होंने सवेरा कैंसर अस्पताल की ओर से कैंसर के विशिष्ट उपचार और जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘अस्पताल में महिलाओं में होने वाले जटिल कैंसर के साथ पुरुषों में होने वाले गंभीर कैंसर का भी आधुनिक तकनीकों से उपचार किया जा रहा है। जांच से लेकर संपूर्ण कैंसर उपचार तक की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होना मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है।’ लाइव सर्जरी में दिखाई आधुनिक उपचार तकनीक वर्कशॉप में रोबोटिक इंडोमेट्रियल सर्जरी, HIPEC के साथ CRS और सर्वाइकल कैंसर के उपचार में रेडिकल हिस्टेरेक्टॉमी पर विशेष चर्चा की गई। लाइव सर्जरी के माध्यम से चिकित्सकों को जटिल कैंसर सर्जरी की प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं और उपचार के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि कैंसर उपचार में लगातार नई पद्धति विकसित हो रही तकनीकों को चिकित्सकों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि मरीजों को आधुनिक उपचार का लाभ मिल सके। गाइनी कैंसर के आधुनिक उपचार पर दिया जोर गाइनी ऑन्कोलॉजिस्ट एवं रोबोटिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अमित टंडन, वाराणसी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. स्वप्निल पटेल ने भी गाइनी कैंसर के आधुनिक उपचार पर अपने विचार रखे। उन्होंने उपचार की बदलती तकनीकों, जटिल मामलों के प्रबंधन और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की जरूरत पर चर्चा की। कैंसर उपचार के सामने आर्थिक और तकनीकी चुनौतियां कार्यक्रम के CME एवं वर्कशॉप आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. वी.पी. सिंह ने कहा, ‘गाइनी कैंसर समेत सभी प्रकार के कैंसर के उपचार में कई चुनौतियां हैं। इनमें मरीजों की आर्थिक स्थिति एक बड़ी समस्या है।’ उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्य में इन चुनौतियों से निपटने के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण दोनों स्तर पर काम करने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से सवेरा कैंसर अस्पताल की ओर से सोसाइटी ऑफ ऑन्कोलॉजी बिहार और POGS के सहयोग से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वर्कशॉप इसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। पैरामेडिकल स्टाफ को भी दिया जा रहा प्रशिक्षण डॉ. वी.पी. सिंह ने बताया कि कैंसर उपचार में डॉक्टरों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इसलिए पैरामेडिकल कर्मियों को स्किल ट्रेनिंग के साथ सर्टिफिकेशन और एडवांस ट्रेनिंग की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कैंसर के मरीज के इलाज में डॉक्टरों की पूरी टीम एक साथ काम करती है। ऐसे में नर्सिंग, पैरामेडिकल और सपोर्ट स्टाफ को आधुनिक तकनीकों और उपचार प्रक्रियाओं की जानकारी होना जरूरी है। इस दिशा में सवेरा की टीम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। POGS पदाधिकारियों ने भी रखे विचार कार्यक्रम में POGS की अध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा चौधरी, सचिव डॉ. निभा मोहन, आयोजन सचिव डॉ. आकाश कुमार सिंह और सह-सचिव डॉ. राहुल कुमार चौधरी ने भी गाइनी कैंसर की रोकथाम, समय पर जांच और आधुनिक उपचार को लेकर अपने विचार रखे। उद्घाटन समारोह में कई प्रमुख चिकित्सक मौजूद रहे कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में डॉ. वी.पी. सिंह, डॉ. आकाश, डॉ. राहुल, पद्मश्री डॉ. आरएन सिंह, पद्मश्री डॉ. जेके सिंह, डॉ. शांति रॉय, डॉ. मंजू गीता मिश्रा, डॉ. प्रज्ञा मिश्रा, डॉ. बी. सान्याल, NMCH की प्राचार्य डॉ. ऊषा कुमारी, डॉ. एस. सरकार और डॉ. निभा मोहन समेत कई प्रमुख चिकित्सक मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने कहा कि गाइनी कैंसर के बेहतर उपचार के लिए आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मेडिकल टीम और समय पर बीमारी की पहचान - इन तीनों पर एक साथ काम करना होगा। इससे मरीजों को उपचार के बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने के साथ कैंसर के खिलाफ जागरूकता को भी मजबूत किया जा सकेगा।
पटना में शनिवार को 'एविडेंस टू एक्सीलेंस इन गाइनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजी' कार्यक्रम हुआ। इसमें लाइव सर्जरी के दौरान रोबोटिक इंडोमेट्रियल सर्जरी, HIPEC के साथ CRS और रेडिकल हिस्टेरेक्टॉमी जैसी तकनीकों पर चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का आयोजन सवेरा कैंसर अस्पताल, सोसाइटी ऑफ ऑन्कोलॉजी बिहार और पटना ऑब्स्टेट्रिक एंड गाइनेकोलॉजिकल सोसाइटी (POGS) ने मिलकर किया। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि महिलाओं में गाइनी कैंसर के इलाज के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल जरूरी है। इससे इलाज के बेहतर नतीजे मिलते हैं। कैंसर की जटिलता को देखते हुए समय पर जांच, सही इलाज और नई सर्जिकल तकनीकों तक मरीजों की पहुंच बढ़ाना जरूरी है। बीमारी की समय पर पहचान और इलाज जरूरी- डॉ. हेमंत बी. टोंगांवकर मुंबई के नानावती मैक्स अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत बी. टोंगांवकर ने वैज्ञानिक सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा, कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो चिंता की बात है। इससे बचाव के लिए जागरूकता के साथ-साथ बीमारी की समय पर पहचान और इलाज जरूरी है। डॉ. टोंगांवकर ने बताया, ‘महिलाओं में गाइनी कैंसर के कई कारण हैं। इनमें बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी भी शामिल है। खासकर ग्रामीण इलाकों में कई महिलाएं अपनी सेहत से जुड़ी बातें परिवार या डॉक्टर से खुलकर नहीं बता पाती हैं।' विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अगर बीमारी की पहचान शुरुआती स्टेज में हो जाए, तो इलाज के बेहतर विकल्प मिलते हैं और मरीज के ठीक होने की संभावना भी बढ़ जाती है। ओपन से लैप्रोस्कोपिक और अब रोबोटिक सर्जरी तक पहुंचा इलाज डॉ. हेमंत बी. टोंगांवकर ने कहा, ‘कैंसर सर्जरी की तकनीक में लगातार बदलाव हो रहा है। पहले जहां ओपन सर्जरी प्रमुख विकल्प थी, वहीं इसके बाद लैप्रोस्कोपिक सर्जरी ने जगह बनाई। अब रोबोटिक सर्जरी तेजी से आधुनिक कैंसर उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है।’ उन्होंने कहा कि नई तकनीक का उद्देश्य केवल तकनीक का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि मरीज को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना होना चाहिए। सवेरा कैंसर अस्पताल के कार्यों को सराहा उन्होंने सवेरा कैंसर अस्पताल की ओर से कैंसर के विशिष्ट उपचार और जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘अस्पताल में महिलाओं में होने वाले जटिल कैंसर के साथ पुरुषों में होने वाले गंभीर कैंसर का भी आधुनिक तकनीकों से उपचार किया जा रहा है। जांच से लेकर संपूर्ण कैंसर उपचार तक की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होना मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है।’ लाइव सर्जरी में दिखाई आधुनिक उपचार तकनीक वर्कशॉप में रोबोटिक इंडोमेट्रियल सर्जरी, HIPEC के साथ CRS और सर्वाइकल कैंसर के उपचार में रेडिकल हिस्टेरेक्टॉमी पर विशेष चर्चा की गई। लाइव सर्जरी के माध्यम से चिकित्सकों को जटिल कैंसर सर्जरी की प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं और उपचार के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि कैंसर उपचार में लगातार नई पद्धति विकसित हो रही तकनीकों को चिकित्सकों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि मरीजों को आधुनिक उपचार का लाभ मिल सके। गाइनी कैंसर के आधुनिक उपचार पर दिया जोर गाइनी ऑन्कोलॉजिस्ट एवं रोबोटिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अमित टंडन, वाराणसी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. स्वप्निल पटेल ने भी गाइनी कैंसर के आधुनिक उपचार पर अपने विचार रखे। उन्होंने उपचार की बदलती तकनीकों, जटिल मामलों के प्रबंधन और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की जरूरत पर चर्चा की। कैंसर उपचार के सामने आर्थिक और तकनीकी चुनौतियां कार्यक्रम के CME एवं वर्कशॉप आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. वी.पी. सिंह ने कहा, ‘गाइनी कैंसर समेत सभी प्रकार के कैंसर के उपचार में कई चुनौतियां हैं। इनमें मरीजों की आर्थिक स्थिति एक बड़ी समस्या है।’ उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्य में इन चुनौतियों से निपटने के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण दोनों स्तर पर काम करने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से सवेरा कैंसर अस्पताल की ओर से सोसाइटी ऑफ ऑन्कोलॉजी बिहार और POGS के सहयोग से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वर्कशॉप इसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। पैरामेडिकल स्टाफ को भी दिया जा रहा प्रशिक्षण डॉ. वी.पी. सिंह ने बताया कि कैंसर उपचार में डॉक्टरों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इसलिए पैरामेडिकल कर्मियों को स्किल ट्रेनिंग के साथ सर्टिफिकेशन और एडवांस ट्रेनिंग की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कैंसर के मरीज के इलाज में डॉक्टरों की पूरी टीम एक साथ काम करती है। ऐसे में नर्सिंग, पैरामेडिकल और सपोर्ट स्टाफ को आधुनिक तकनीकों और उपचार प्रक्रियाओं की जानकारी होना जरूरी है। इस दिशा में सवेरा की टीम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। POGS पदाधिकारियों ने भी रखे विचार कार्यक्रम में POGS की अध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा चौधरी, सचिव डॉ. निभा मोहन, आयोजन सचिव डॉ. आकाश कुमार सिंह और सह-सचिव डॉ. राहुल कुमार चौधरी ने भी गाइनी कैंसर की रोकथाम, समय पर जांच और आधुनिक उपचार को लेकर अपने विचार रखे। उद्घाटन समारोह में कई प्रमुख चिकित्सक मौजूद रहे कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में डॉ. वी.पी. सिंह, डॉ. आकाश, डॉ. राहुल, पद्मश्री डॉ. आरएन सिंह, पद्मश्री डॉ. जेके सिंह, डॉ. शांति रॉय, डॉ. मंजू गीता मिश्रा, डॉ. प्रज्ञा मिश्रा, डॉ. बी. सान्याल, NMCH की प्राचार्य डॉ. ऊषा कुमारी, डॉ. एस. सरकार और डॉ. निभा मोहन समेत कई प्रमुख चिकित्सक मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने कहा कि गाइनी कैंसर के बेहतर उपचार के लिए आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मेडिकल टीम और समय पर बीमारी की पहचान - इन तीनों पर एक साथ काम करना होगा। इससे मरीजों को उपचार के बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने के साथ कैंसर के खिलाफ जागरूकता को भी मजबूत किया जा सकेगा।