टियर-2 और टियर-3 शहर नए जॉब हब:मेट्रो सिटी से डेढ़ गुना ज्यादा वैकेंसी, इस साल देश में 1.28 करोड़ नौकरियां बनने की उम्मीद
भारत में नौकरियों की लहर मेट्रो सिटी से बाहर इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद, कोच्चि और चंडीगढ़ जैसे शहरों में दिख रही है। टियर-2 और 3 शहरों में भर्ती की रफ्तार 20% तक हो गई है, जबकि मेट्रो सिटी में यह 14% रही। लीडिंग जॉब्स एंड टैलेंट प्लेटफॉर्म फाउंडइट के मुताबिक, इस साल 1.28 करोड़ संभावित नौकरियों के साथ छोटे शहरों में हायरिंग तेजी से बढ़ रही है। अपग्रेड रिक्रूट की रिपोर्ट के मुताबिक AI और बेहतर स्थिरता के कारण कंपनियां छोटे शहरों में ‘रीजनल कैपेबिलिटी कॉरिडोर’ बना रही हैं। 2027 तक एआई एक्सपोजर वाले टेक रोल्स 20% से बढ़कर 32% तक पहुंच सकते हैं। वहीं, 79% एचआर लीडर्स मानते हैं कि छोटे शहरों में टैलेंट के जॉब में ‘टिके रहने की दर’ मेट्रो के बराबर या उससे बेहतर है। वित्त वर्ष 2024 में इन शहरों का टेक हायरिंग में हिस्सा 12% था जो 2027 तक 19.7% पहुंच सकता है। कंपनियां इन शहरों में इंजीनियरिंग, सपोर्ट, डेटा एनालिटिक्स, बैकएंड ऑपरेशंस जैसी भूमिका को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। रीजनल कैपेबिलिटी कॉरिडोर्स बन रहे, छोटे शहरों में हाइटेक नौकरियां बढ़ रहीं कंपनियां कम लागत और व्यापक टैलेंट पूल के लिए टियर-2 शहरों में टैलेंट हब्स तैयार कर रही हैं। इससे भर्ती महानगरों से बाहर फैल रही है। बड़े शहरों में लोग जल्दी-जल्दी नौकरियां बदलते हैं, जबकि छोटे शहरों में कर्मचारी लंबे समय तक टिकते हैं। अपग्रेड रिक्रूट ने टियर-2,3 शहरों से आने वाले प्लेसमेंट मैंडेट्स में 40% वृद्धि देखी है। एक साल में यहां एआई इंजीनियर्स, डेटा एनालिस्ट और ऑटोमेशन स्पेशलिस्ट की मांग 40% बढ़ी है-खासकर बीएफएसआई, आईटी सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में। अहमदाबाद-गिफ्ट सिटी, कोयंबटूर, कोच्चि, इंदौर और लखनऊ जैसे शहर अब एआई-संबंधित हायरिंग मैंडेट्स के लगभग एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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भारत में नौकरियों की लहर मेट्रो सिटी से बाहर इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद, कोच्चि और चंडीगढ़ जैसे शहरों में दिख रही है। टियर-2 और 3 शहरों में भर्ती की रफ्तार 20% तक हो गई है, जबकि मेट्रो सिटी में यह 14% रही। लीडिंग जॉब्स एंड टैलेंट प्लेटफॉर्म फाउंडइट के मुताबिक, इस साल 1.28 करोड़ संभावित नौकरियों के साथ छोटे शहरों में हायरिंग तेजी से बढ़ रही है। अपग्रेड रिक्रूट की रिपोर्ट के मुताबिक AI और बेहतर स्थिरता के कारण कंपनियां छोटे शहरों में ‘रीजनल कैपेबिलिटी कॉरिडोर’ बना रही हैं। 2027 तक एआई एक्सपोजर वाले टेक रोल्स 20% से बढ़कर 32% तक पहुंच सकते हैं। वहीं, 79% एचआर लीडर्स मानते हैं कि छोटे शहरों में टैलेंट के जॉब में ‘टिके रहने की दर’ मेट्रो के बराबर या उससे बेहतर है। वित्त वर्ष 2024 में इन शहरों का टेक हायरिंग में हिस्सा 12% था जो 2027 तक 19.7% पहुंच सकता है। कंपनियां इन शहरों में इंजीनियरिंग, सपोर्ट, डेटा एनालिटिक्स, बैकएंड ऑपरेशंस जैसी भूमिका को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। रीजनल कैपेबिलिटी कॉरिडोर्स बन रहे, छोटे शहरों में हाइटेक नौकरियां बढ़ रहीं कंपनियां कम लागत और व्यापक टैलेंट पूल के लिए टियर-2 शहरों में टैलेंट हब्स तैयार कर रही हैं। इससे भर्ती महानगरों से बाहर फैल रही है। बड़े शहरों में लोग जल्दी-जल्दी नौकरियां बदलते हैं, जबकि छोटे शहरों में कर्मचारी लंबे समय तक टिकते हैं। अपग्रेड रिक्रूट ने टियर-2,3 शहरों से आने वाले प्लेसमेंट मैंडेट्स में 40% वृद्धि देखी है। एक साल में यहां एआई इंजीनियर्स, डेटा एनालिस्ट और ऑटोमेशन स्पेशलिस्ट की मांग 40% बढ़ी है-खासकर बीएफएसआई, आईटी सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में। अहमदाबाद-गिफ्ट सिटी, कोयंबटूर, कोच्चि, इंदौर और लखनऊ जैसे शहर अब एआई-संबंधित हायरिंग मैंडेट्स के लगभग एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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