मुजफ्फरपुर के 17 सरकारी स्कूलों को मिलेगी नई पहचान:सीएम सम्राट चौधरी करेंगे सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल का उद्घाटन, जिले में रहेंगे प्रभारी मंत्री
मुजफ्फरपुर समेत पूरे बिहार के सरकारी विद्यालयों के लिए रविवार ऐतिहासिक दिन होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बेगूसराय से राज्य के 551 सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) का एकीकृत उद्घाटन करेंगे। मुजफ्फरपुर में जिला स्कूल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री, जिलाधिकारी, जनप्रतिनिधि और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के उद्घाटन समारोह का सभी चयनित विद्यालयों में लाइव प्रसारण किया जाएगा। जिले में कुल 17 सरकारी स्कूलों को नई पहचान मिलेगी। 182 साल पुराने जिला स्कूल को मिलेगी नई पहचान मॉडल स्कूल बनने के साथ ही यहां आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, डिजिटल संसाधन और अत्याधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। शिक्षा विभाग का उद्देश्य इस विद्यालय को राज्य के उत्कृष्ट सरकारी शिक्षण संस्थानों में शामिल करना है। जिले के हर प्रखंड में होगा कार्यक्रम जिले के प्रत्येक प्रखंड में एक-एक मॉडल स्कूल का चयन किया गया है। सभी विद्यालयों में मुख्यमंत्री के उद्घाटन समारोह का सीधा प्रसारण किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर जिला शिक्षा विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। विद्यालयों में साफ-सफाई, मंच, पेयजल, बैठक व्यवस्था और तकनीकी इंतजाम अंतिम चरण में हैं। अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी उद्घाटन समारोह को सफल और व्यवस्थित बनाने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी ने विभिन्न प्रखंडों की निगरानी के लिए छह अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के विद्यालयों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी कराएं और स्थानीय प्रशासन तथा प्रधानाध्यापकों के साथ समन्वय बनाकर कार्यक्रम को सफल बनाएं। स्मार्ट क्लास से आधुनिक लैब तक मिलेंगी सुविधाएं जिला स्कूल के प्रिंसिपल जीबू झा ने बताया कि मॉडल स्कूल बनने के बाद विद्यार्थियों को स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल शिक्षण संसाधन, आधुनिक पुस्तकालय, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक तैयारी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। शिक्षा विभाग चरणबद्ध तरीके से इन विद्यालयों को आधुनिक तकनीक और बेहतर आधारभूत संरचना से लैस करेगा। जिला स्कूल में बढ़ेगी आधारभूत संरचना सरस्वती विद्या निकेतन बनने के बाद जिला स्कूल में अतिरिक्त भवन, नए वर्ग कक्ष और प्रयोगशालाओं की आवश्यकता होगी। विद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि वर्तमान में यहां लगभग 1300 छात्र नामांकित हैं, जिनके लिए 31 शिक्षक कार्यरत हैं। स्कूल में अभी 19 कमरे और एक बड़ा हॉल है। छात्र संख्या और नई सुविधाओं को देखते हुए अतिरिक्त कक्षों का निर्माण जरूरी होगा। विद्यालय परिसर में छात्रावास भी उपलब्ध है। भविष्य में इसे और विकसित कर दूरदराज के विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा देने की योजना है। साथ ही प्रयोगात्मक शिक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए विज्ञान प्रयोगशालाओं और अन्य संसाधनों को भी अपडेट किया जाएगा। शिक्षकों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण शिक्षा विभाग ने मॉडल स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया है। नई शिक्षा प्रणाली के तहत डिजिटल शिक्षण, आधुनिक प्रयोगशाला आधारित पढ़ाई और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के समकक्ष लाने की पहल शिक्षा विभाग का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर निजी स्कूलों के समकक्ष विकसित करना है। अधिकारियों का मानना है कि मॉडल स्कूल योजना से सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी, विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिलेंगे और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के छात्रों के बीच शैक्षणिक अंतर कम होगा।
मुजफ्फरपुर समेत पूरे बिहार के सरकारी विद्यालयों के लिए रविवार ऐतिहासिक दिन होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बेगूसराय से राज्य के 551 सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) का एकीकृत उद्घाटन करेंगे। मुजफ्फरपुर में जिला स्कूल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री, जिलाधिकारी, जनप्रतिनिधि और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के उद्घाटन समारोह का सभी चयनित विद्यालयों में लाइव प्रसारण किया जाएगा। जिले में कुल 17 सरकारी स्कूलों को नई पहचान मिलेगी। 182 साल पुराने जिला स्कूल को मिलेगी नई पहचान मॉडल स्कूल बनने के साथ ही यहां आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, डिजिटल संसाधन और अत्याधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। शिक्षा विभाग का उद्देश्य इस विद्यालय को राज्य के उत्कृष्ट सरकारी शिक्षण संस्थानों में शामिल करना है। जिले के हर प्रखंड में होगा कार्यक्रम जिले के प्रत्येक प्रखंड में एक-एक मॉडल स्कूल का चयन किया गया है। सभी विद्यालयों में मुख्यमंत्री के उद्घाटन समारोह का सीधा प्रसारण किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर जिला शिक्षा विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। विद्यालयों में साफ-सफाई, मंच, पेयजल, बैठक व्यवस्था और तकनीकी इंतजाम अंतिम चरण में हैं। अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी उद्घाटन समारोह को सफल और व्यवस्थित बनाने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी ने विभिन्न प्रखंडों की निगरानी के लिए छह अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के विद्यालयों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी कराएं और स्थानीय प्रशासन तथा प्रधानाध्यापकों के साथ समन्वय बनाकर कार्यक्रम को सफल बनाएं। स्मार्ट क्लास से आधुनिक लैब तक मिलेंगी सुविधाएं जिला स्कूल के प्रिंसिपल जीबू झा ने बताया कि मॉडल स्कूल बनने के बाद विद्यार्थियों को स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल शिक्षण संसाधन, आधुनिक पुस्तकालय, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक तैयारी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। शिक्षा विभाग चरणबद्ध तरीके से इन विद्यालयों को आधुनिक तकनीक और बेहतर आधारभूत संरचना से लैस करेगा। जिला स्कूल में बढ़ेगी आधारभूत संरचना सरस्वती विद्या निकेतन बनने के बाद जिला स्कूल में अतिरिक्त भवन, नए वर्ग कक्ष और प्रयोगशालाओं की आवश्यकता होगी। विद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि वर्तमान में यहां लगभग 1300 छात्र नामांकित हैं, जिनके लिए 31 शिक्षक कार्यरत हैं। स्कूल में अभी 19 कमरे और एक बड़ा हॉल है। छात्र संख्या और नई सुविधाओं को देखते हुए अतिरिक्त कक्षों का निर्माण जरूरी होगा। विद्यालय परिसर में छात्रावास भी उपलब्ध है। भविष्य में इसे और विकसित कर दूरदराज के विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा देने की योजना है। साथ ही प्रयोगात्मक शिक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए विज्ञान प्रयोगशालाओं और अन्य संसाधनों को भी अपडेट किया जाएगा। शिक्षकों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण शिक्षा विभाग ने मॉडल स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया है। नई शिक्षा प्रणाली के तहत डिजिटल शिक्षण, आधुनिक प्रयोगशाला आधारित पढ़ाई और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के समकक्ष लाने की पहल शिक्षा विभाग का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर निजी स्कूलों के समकक्ष विकसित करना है। अधिकारियों का मानना है कि मॉडल स्कूल योजना से सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी, विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिलेंगे और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के छात्रों के बीच शैक्षणिक अंतर कम होगा।