बीमार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी पर भड़के सांसद हनुमान बेनीवाल:सुरक्षा जवान लौटाया, अमित शाह-CM को लिखा लेटर, बोले- मेरे खिलाफ हो रहा षड्यंत्र
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने शनिवार को अपनी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को हटा दिया है। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि नागौर में पुलिस व्यवस्था संभाल रहे अधिकारी लगातार गंभीर बीमारियों से पीड़ित पुलिसकर्मियों को उनकी सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात कर रहे हैं। इससे न केवल मेरी सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि यह मेरी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की एक सुनियोजित कोशिश भी है। इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
बेनीवाल के लेटर में लिखी 4 बातें… 1. 'छवि खराब करने के लिए जानबूझकर बीमार जवानों को ड्यूटी पर भेजा जा रहा'
सांसद हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को लिखे लेटर में नागौर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बेनीवाल ने लेटर में लिखा- यह केवल मेरी व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। बिना पुलिस अधीक्षक (एसपी) वाले नागौर जिले में पुलिस व्यवस्था संभाल रहे अधिकारी और रिजर्व पुलिस लाइन के जिम्मेदार कार्मिक जानबूझकर गंभीर बीमारियों से ग्रसित पुलिसकर्मियों को मेरी सुरक्षा में तैनात कर रहे हैं। इसके पीछे एक बड़ा षड्यंत्र है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना या पुलिसकर्मी की तबीयत बिगड़ने की स्थिति में मुझे ही जिम्मेदार ठहराया जा सके और मेरी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। 2. न्यूरो और हार्ट के मरीजों को लगाया सुरक्षा में, खुद लेकर गए अस्पताल'
बेनीवाल ने अपने लेटर में हाल ही में हुए 3 गंभीर मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया है। बेनीवाल ने लेटर में लिखा- 11 जुलाई को मेरी सुरक्षा में तैनात कांस्टेबल सुनील विश्नोई (जो न्यूरोलॉजी की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे) जयपुर में अचानक अस्वस्थ हो गए, जिन्हें मैं स्वयं देर रात सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल लेकर गए। इसके बाद, 15 जुलाई को कांस्टेबल बलबीर गुर्जर की जयपुर से लौटते समय तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें नागौर से एम्स (AIIMS) जोधपुर रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके हार्ट संबंधी पुरानी बीमारी से पीड़ित होने की आशंका जताई। वहीं, शनिवार को मेरी सुरक्षा में भेजे गए तीसरे कांस्टेबल सीताराम भी पूरी तरह अस्वस्थ थे। बेनीवाल ने कहा- मैं किसी भी बीमार पुलिसकर्मी के स्वास्थ्य को जोखिम में नहीं डालना चाहते, इसलिए उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात जवान को तत्काल प्रभाव से वापस रिजर्व पुलिस लाइन भेज दिया है। 3. 'इंटेलिजेंस इनपुट के बावजूद बिना बताए क्यों हटाई अतिरिक्त सुरक्षा?'
सांसद ने लेटर में अपनी सुरक्षा में की गई कटौती पर भी तीखे सवाल उठाए हैं। लेटर में लिखा- पूर्व में राजस्थान पुलिस की इंटेलिजेंस शाखा से मिले सुरक्षा संबंधी इनपुट के आधार पर मुझे पुलिस एस्कॉर्ट और हथियारबंद कमांडो उपलब्ध कराए गए थे। लेकिन बाद में बिना किसी पूर्व सूचना या कारण बताए इस अतिरिक्त सुरक्षा को अचानक हटा लिया गया। बेनीवाल ने सरकार से सवाल पूछा - यदि उस समय मेरी सुरक्षा को लेकर खतरे के गंभीर इनपुट थे, तो वर्तमान में उन इनपुट की क्या स्थिति है? क्या सरकार उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी देगी या उनकी सुरक्षा को लेकर जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है? 4. डीजीपी को फोन करने पर भी नहीं हुआ सुधार बेनीवाल ने दावा किया कि पूरे घटनाक्रम और सुरक्षा में बरती जा रही लापरवाही की जानकारी फोन पर राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (DGP) और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG - इंटेलिजेंस) को भी दी थी, लेकिन इसके बावजूद जिला स्तर पर कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। नागौर में तैनात कुछ पुलिस अधिकारी निष्पक्ष प्रशासनिक दायित्व निभाने के बजाय राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहे हैं। मेरी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बेनीवाल ने केंद्र और राज्य सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उनकी सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की है।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने शनिवार को अपनी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को हटा दिया है। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि नागौर में पुलिस व्यवस्था संभाल रहे अधिकारी लगातार गंभीर बीमारियों से पीड़ित पुलिसकर्मियों को उनकी सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात कर रहे हैं। इससे न केवल मेरी सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि यह मेरी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की एक सुनियोजित कोशिश भी है। इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
बेनीवाल के लेटर में लिखी 4 बातें… 1. 'छवि खराब करने के लिए जानबूझकर बीमार जवानों को ड्यूटी पर भेजा जा रहा'
सांसद हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को लिखे लेटर में नागौर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बेनीवाल ने लेटर में लिखा- यह केवल मेरी व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। बिना पुलिस अधीक्षक (एसपी) वाले नागौर जिले में पुलिस व्यवस्था संभाल रहे अधिकारी और रिजर्व पुलिस लाइन के जिम्मेदार कार्मिक जानबूझकर गंभीर बीमारियों से ग्रसित पुलिसकर्मियों को मेरी सुरक्षा में तैनात कर रहे हैं। इसके पीछे एक बड़ा षड्यंत्र है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना या पुलिसकर्मी की तबीयत बिगड़ने की स्थिति में मुझे ही जिम्मेदार ठहराया जा सके और मेरी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। 2. न्यूरो और हार्ट के मरीजों को लगाया सुरक्षा में, खुद लेकर गए अस्पताल'
बेनीवाल ने अपने लेटर में हाल ही में हुए 3 गंभीर मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया है। बेनीवाल ने लेटर में लिखा- 11 जुलाई को मेरी सुरक्षा में तैनात कांस्टेबल सुनील विश्नोई (जो न्यूरोलॉजी की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे) जयपुर में अचानक अस्वस्थ हो गए, जिन्हें मैं स्वयं देर रात सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल लेकर गए। इसके बाद, 15 जुलाई को कांस्टेबल बलबीर गुर्जर की जयपुर से लौटते समय तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें नागौर से एम्स (AIIMS) जोधपुर रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके हार्ट संबंधी पुरानी बीमारी से पीड़ित होने की आशंका जताई। वहीं, शनिवार को मेरी सुरक्षा में भेजे गए तीसरे कांस्टेबल सीताराम भी पूरी तरह अस्वस्थ थे। बेनीवाल ने कहा- मैं किसी भी बीमार पुलिसकर्मी के स्वास्थ्य को जोखिम में नहीं डालना चाहते, इसलिए उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात जवान को तत्काल प्रभाव से वापस रिजर्व पुलिस लाइन भेज दिया है। 3. 'इंटेलिजेंस इनपुट के बावजूद बिना बताए क्यों हटाई अतिरिक्त सुरक्षा?'
सांसद ने लेटर में अपनी सुरक्षा में की गई कटौती पर भी तीखे सवाल उठाए हैं। लेटर में लिखा- पूर्व में राजस्थान पुलिस की इंटेलिजेंस शाखा से मिले सुरक्षा संबंधी इनपुट के आधार पर मुझे पुलिस एस्कॉर्ट और हथियारबंद कमांडो उपलब्ध कराए गए थे। लेकिन बाद में बिना किसी पूर्व सूचना या कारण बताए इस अतिरिक्त सुरक्षा को अचानक हटा लिया गया। बेनीवाल ने सरकार से सवाल पूछा - यदि उस समय मेरी सुरक्षा को लेकर खतरे के गंभीर इनपुट थे, तो वर्तमान में उन इनपुट की क्या स्थिति है? क्या सरकार उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी देगी या उनकी सुरक्षा को लेकर जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है? 4. डीजीपी को फोन करने पर भी नहीं हुआ सुधार बेनीवाल ने दावा किया कि पूरे घटनाक्रम और सुरक्षा में बरती जा रही लापरवाही की जानकारी फोन पर राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (DGP) और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG - इंटेलिजेंस) को भी दी थी, लेकिन इसके बावजूद जिला स्तर पर कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। नागौर में तैनात कुछ पुलिस अधिकारी निष्पक्ष प्रशासनिक दायित्व निभाने के बजाय राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहे हैं। मेरी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बेनीवाल ने केंद्र और राज्य सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उनकी सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की है।