सोहना में बिजली कर्मचारियों की भूख हड़ताल:ऑनलाइन तबादला नीति का विरोध, बोले- कार्यक्षमता पर पडे़गा गलत असर, 12 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल

गुरुग्राम के सोहना में गुरुवार को हरियाणा सरकार की आदर्श ऑनलाइन तबादला नीति के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर 66 केवी पावर हाउस परिसर में कर्मचारियों और यूनियन पदाधिकारियों ने भूख हड़ताल भी की। इस दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए नीति को कर्मचारी विरोधी बताया। धरना सभा की अध्यक्षता कर रहे सब-यूनिट प्रधान प्रेमपाल ने कहा कि सरकार की ऑनलाइन तबादला नीति बिजली कर्मचारियों के हितों पर सीधा कुठाराघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नीति के जरिए कर्मचारियों को उनके परिवारों से दूर-दराज के क्षेत्रों में भेजने की साजिश रची जा रही है, जिससे उनका मानसिक और सामाजिक शोषण होगा। जबरन तबादले से बढ़ेगी समस्या : प्रेमपाल प्रेमपाल ने आगे कहा कि बिजली विभाग पहले से ही कर्मचारियों की भारी कमी, कार्यभार और संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है। ऐसे में जबरन तबादले कर्मचारियों की समस्याओं को और बढ़ा देंगे और कार्यक्षमता पर भी नकारात्मक असर डालेंगे। यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि तबादला नीति में पारदर्शिता के नाम पर कर्मचारियों की सहमति और पारिवारिक परिस्थितियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस नीति को तत्काल वापस लिया जाए और कर्मचारियों से बातचीत कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की चेतावनी प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने घोषणा की कि सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। इस हड़ताल में हाईकोर्ट के आदेशानुसार कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बचाने तथा कर्मचारियों से जुड़ी अन्य लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की जाएगी। बिजली कर्मचारी इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। भूख हड़ताल और प्रदर्शन को यूनियन नेता सतवीर, ओमप्रकाश, अजित, विकल सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

Jan 22, 2026 - 15:48
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सोहना में बिजली कर्मचारियों की भूख हड़ताल:ऑनलाइन तबादला नीति का विरोध, बोले- कार्यक्षमता पर पडे़गा गलत असर, 12 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल
गुरुग्राम के सोहना में गुरुवार को हरियाणा सरकार की आदर्श ऑनलाइन तबादला नीति के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर 66 केवी पावर हाउस परिसर में कर्मचारियों और यूनियन पदाधिकारियों ने भूख हड़ताल भी की। इस दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए नीति को कर्मचारी विरोधी बताया। धरना सभा की अध्यक्षता कर रहे सब-यूनिट प्रधान प्रेमपाल ने कहा कि सरकार की ऑनलाइन तबादला नीति बिजली कर्मचारियों के हितों पर सीधा कुठाराघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नीति के जरिए कर्मचारियों को उनके परिवारों से दूर-दराज के क्षेत्रों में भेजने की साजिश रची जा रही है, जिससे उनका मानसिक और सामाजिक शोषण होगा। जबरन तबादले से बढ़ेगी समस्या : प्रेमपाल प्रेमपाल ने आगे कहा कि बिजली विभाग पहले से ही कर्मचारियों की भारी कमी, कार्यभार और संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है। ऐसे में जबरन तबादले कर्मचारियों की समस्याओं को और बढ़ा देंगे और कार्यक्षमता पर भी नकारात्मक असर डालेंगे। यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि तबादला नीति में पारदर्शिता के नाम पर कर्मचारियों की सहमति और पारिवारिक परिस्थितियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस नीति को तत्काल वापस लिया जाए और कर्मचारियों से बातचीत कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की चेतावनी प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने घोषणा की कि सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। इस हड़ताल में हाईकोर्ट के आदेशानुसार कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बचाने तथा कर्मचारियों से जुड़ी अन्य लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की जाएगी। बिजली कर्मचारी इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। भूख हड़ताल और प्रदर्शन को यूनियन नेता सतवीर, ओमप्रकाश, अजित, विकल सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।