सिरसा में सूक्ष्म सिंचाई परियोजना का ट्रांसफार्मर जला:सिंचाई न होने से 850 एकड़ की फसल सूख रही, किसानों ने जताया रोष

सिरसा जिले के गांव शाहपुरिया में सूक्ष्म सिंचाई परियोजना (Micro Irrigation Project) का ट्रांसफार्मर जलने से हड़कंप मच गया है। पिछले 5 दिनों से बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण करीब 850 एकड़ भूमि में खड़ी गेहूं, सरसों और चने की फसलों की सिंचाई पूरी तरह रुक गई है। शनिवार को आक्रोशित किसानों ने प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए जल्द समाधान की मांग की। सरकार ने वर्ष 2018 में शाहपुरिया गांव की रेतीली जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए 4 करोड़ 4 लाख रुपए की लागत से यह प्लांट स्थापित किया था। फव्वारा सिंचाई पद्धति पर आधारित इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी काडा (CADA) विभाग के पास है। 30 दिसंबर को ट्रांसफार्मर जलने के बाद से मोटरें बंद पड़ी हैं, जिससे खेतों तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है। विभागों के बीच फंसा मामला हैरानी की बात यह है कि किसान जब समस्या लेकर अधिकारियों के पास पहुँचते हैं, तो विभाग अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं। काडा विभाग का कहना है कि उन्होंने बिजली निगम को पत्र लिख दिया है, जबकि बिजली निगम के चौपटा एसडीओ (SDO) का तर्क है कि प्लांट की आंतरिक बिजली व्यवस्था और ट्रांसफार्मर की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। सूखने की कगार पर फसलें किसान कृष्ण कुमार सिंवर, हनुमान, मंगत राम और सुमेर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि यदि अगले दो-तीन दिनों में बिजली बहाल नहीं हुई, तो मेहनत से उगाई गई फसलें सूख जाएंगी। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया, तो वे कड़ा रुख अपनाने को मजबूर होंगे।

Jan 3, 2026 - 22:39
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सिरसा में सूक्ष्म सिंचाई परियोजना का ट्रांसफार्मर जला:सिंचाई न होने से 850 एकड़ की फसल सूख रही, किसानों ने जताया रोष
सिरसा जिले के गांव शाहपुरिया में सूक्ष्म सिंचाई परियोजना (Micro Irrigation Project) का ट्रांसफार्मर जलने से हड़कंप मच गया है। पिछले 5 दिनों से बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण करीब 850 एकड़ भूमि में खड़ी गेहूं, सरसों और चने की फसलों की सिंचाई पूरी तरह रुक गई है। शनिवार को आक्रोशित किसानों ने प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए जल्द समाधान की मांग की। सरकार ने वर्ष 2018 में शाहपुरिया गांव की रेतीली जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए 4 करोड़ 4 लाख रुपए की लागत से यह प्लांट स्थापित किया था। फव्वारा सिंचाई पद्धति पर आधारित इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी काडा (CADA) विभाग के पास है। 30 दिसंबर को ट्रांसफार्मर जलने के बाद से मोटरें बंद पड़ी हैं, जिससे खेतों तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है। विभागों के बीच फंसा मामला हैरानी की बात यह है कि किसान जब समस्या लेकर अधिकारियों के पास पहुँचते हैं, तो विभाग अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं। काडा विभाग का कहना है कि उन्होंने बिजली निगम को पत्र लिख दिया है, जबकि बिजली निगम के चौपटा एसडीओ (SDO) का तर्क है कि प्लांट की आंतरिक बिजली व्यवस्था और ट्रांसफार्मर की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। सूखने की कगार पर फसलें किसान कृष्ण कुमार सिंवर, हनुमान, मंगत राम और सुमेर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि यदि अगले दो-तीन दिनों में बिजली बहाल नहीं हुई, तो मेहनत से उगाई गई फसलें सूख जाएंगी। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया, तो वे कड़ा रुख अपनाने को मजबूर होंगे।