यूपी को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले को लेकर नया खुलासा:लोगों को विश्वास में लेकर किया गया फ्रॉड, कई ग्राहकों की चेकबुक अपने पास रखी
गोंडा के यूपी कोऑपरेटिव बैंक की बड़गांव शाखा में हुए घोटाले और फ्रॉड को लेकर एक के बाद एक अपने खुलासे हो रहे हैं। इसके साथ ही साथ खाताधारक भी बैंकों में पहुंचकर के अपने खातों की जानकारी ले रहे हैं। शिकायतकर्ता शिवेंद्र दुबे के माध्यम से खुलासा हुआ है कि बैंक के तत्कालीन पूर्व शाखा प्रबंधक पवन पाल सिंह ने कई ऐसे लोगों को बैंक लोन दिए, जो इसकी पात्रता पूरी नहीं करते थे। लोन देने के बाद वह ग्राहकों को विश्वास में लेकर उनकी चेक बुक अपने पास रख लेते थे। इन चेक बुक का इस्तेमाल कर वह धोखाधड़ी से ग्राहकों के खातों से पैसे निकालकर दूसरे लोन खातों में भेजते थे और फिर उन्हें निकाल लेते थे। पहले एक फ्रॉड करके की कमाई फिर और लोगों को किया शामिल पहले इस पूरे फ्रॉड और घोटाले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन पाल सिंह शामिल हुए। उन्होंने एक बैंक खाते में फ्रॉड किया और जब उसे फ्रॉड से पैसे की कमाई की तो इस फ्रॉड में उन्होंने और लोगों को शामिल कर लिया। विरोध करने पर कई बार पवन पाल सिंह द्वारा अपने साथियों को इस पूरे मामले में फंसने की भी धमकी दी गई, जिससे मजबूरी में आकर के लोग साथ देते रहे। उन्होंने बड़े पैमाने पर फ्रॉड किया फिर उनके द्वारा तीन अन्य पूर्व शाखा प्रबंधक को इस पूरे घोटाले में शामिल किया गया है। इसके साथ ही साथ एक पूर्व कैशियर को भी शामिल करके इतना बड़ा घोटाला इन लोगों द्वारा किया गया है। घोटाले का मास्टरमाइंड है पूर्व शाखा प्रबंधक पवन पाल सिंह इस पूरे घोटाले और फ्रॉड का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि इस बैंक का पूर्व कैशियर पवन पाल सिंह है, जिसके द्वारा अपने अन्य साथियों को अपने इस जाल में फंसा कर इतना बड़ा फ्रॉड किया गया है।घोटाले में जो भी पैसा बैंक हाथों से लोग दूसरे के भेज के निकलते थे। वह आपस में इन लोगों द्वारा बांट लिया जाता था लेकिन ज्यादा पैसा पवन पाल सिंह लोगों को धमका करके ले लेता था। पवन पाल सिंह के और उनके परिजनों के भी खातों के बारे में पुलिस जांच कर रही है। ग्राहकों को विश्वास में लेकर उनके चेक बुक लेकर किया जा रहा था फ्रॉड ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये का फ्रॉड किया है यह घोटाला वर्ष 2021 से 2024 के बीच हुआ। इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब कुछ खाताधारक अपनी बची हुई किस्तों की जानकारी लेने बैंक पहुंचे। उन्होंने बताया कि उन्होंने 10 से 12 लाख रुपये का लोन लिया था और नियमित रूप से किस्तें भी चुका रहे थे। हालांकि, बैंक पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनके नाम पर और बैंक लोन हो गया है और उनके खातों से अतिरिक्त पैसे निकाले गए हैं। इस खुलासे के बाद एक के बाद एक कई खाताधारक अपनी खातों की जानकारी लेने बैंक पहुंच रहे हैं। नगर कोतवाली पुलिस के रडार पर 205 खाते इस पूरे घोटाले में कुल 205 खाते शामिल हैं, जिनसे एक खाते से दूसरे खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं। नगर कोतवाली पुलिस ने इन सभी खातों के लेनदेन का विवरण यूपी कोऑपरेटिव बैंक बड़गांव शाखा से मांगा है और मामले की जांच जारी है। कई खाता धारकों को तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन पाल सिंह ने कमीशन देने के भी लालच में उनके चेक बुक अपने पास रखे थे और लगातार उनके बैंक खातों में दूसरे खातों से पैसा भेज करके निकाला जा रहा था। जांच तेज होने के बाद खाता धारकों में मचा हड़कंप जांच तेज होने के बाद अब खाता धारकों में भी हड़कंप मचा हुआ है लगातार परेशान चल रहे है। फ्रॉड को लेकर के मुकदमा दर्ज करवाने वाली खाता धारक शिवेंद्र दुबे ने बताया कि यहां पर सस्ता भी आज पर लोन मिल जाता था इसीलिए हम लोग जाकर के यहां पर लोन लेते थे, लेकिन बाद में हमें पता चला कि हमारे खाते में और लोन कर दिया गया है। जो मेरे द्वारा नहीं लिया गया था। यह भी पता चला है कि पवन पाल सिंह जो यहां की पूर्व शाखा प्रबंधक हैं उनके द्वारा लोगों के चेक बुक ले लिए जाते थे और उन्हें कहा जाता था कि आपका लोन हम पास कर देंगे आधा पैसा आप रख लीजिएगा आधा पैसा हम रख लेंगे और यह उसी के जरिए यहां पर कमाई करते थे। शिवेंद्र दुबे ने यह भी बताया कि पवन पाल सिंह द्वारा एक ग्राहक के खाते से दूसरे ग्रह के खाते में पैसे को ट्रांसफर करके उसे निकाला जा रहा था और इस ग्राहक के खाते में पैसा ट्रांसफर करते थे जिसका उनके पास चेक बुक होता था। और लोगों के खिलाफ जांच करने की शिकायतकर्ता ने की मांग वही शिवेंद्र दुबे ने इस पूरे मामले में पुलिस से और विस्तार से जांच किए जाने की मांग की है। उनका दावा है कि इसमें केवल छोटे खाताधारक ही नहीं बल्कि कई ऐसे बड़े खाताधारक भी शामिल हैं जिनके द्वारा पवन पाल सिंह के साथ मिलकर के इस पूरे 21 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया है। वही गोंडा नगर कोतवाली के क्राइम इंस्पेक्टर व इस पूरे मुकदमा के विवेचक सभाजीत सिंह ने बताया कि पूरे मामले को लेकर के जांच की जा रही है जांच में जो भी निकाल कर आएंगे उनके भी नाम शामिल करके उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। अभी तो हम लोग यही जांच कर रहे हैं कि आखिर किस तरीके से इतना बड़ा फ्रॉड किया गया और इस पूरे फ्रॉड में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
गोंडा के यूपी कोऑपरेटिव बैंक की बड़गांव शाखा में हुए घोटाले और फ्रॉड को लेकर एक के बाद एक अपने खुलासे हो रहे हैं। इसके साथ ही साथ खाताधारक भी बैंकों में पहुंचकर के अपने खातों की जानकारी ले रहे हैं। शिकायतकर्ता शिवेंद्र दुबे के माध्यम से खुलासा हुआ है कि बैंक के तत्कालीन पूर्व शाखा प्रबंधक पवन पाल सिंह ने कई ऐसे लोगों को बैंक लोन दिए, जो इसकी पात्रता पूरी नहीं करते थे। लोन देने के बाद वह ग्राहकों को विश्वास में लेकर उनकी चेक बुक अपने पास रख लेते थे। इन चेक बुक का इस्तेमाल कर वह धोखाधड़ी से ग्राहकों के खातों से पैसे निकालकर दूसरे लोन खातों में भेजते थे और फिर उन्हें निकाल लेते थे। पहले एक फ्रॉड करके की कमाई फिर और लोगों को किया शामिल पहले इस पूरे फ्रॉड और घोटाले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन पाल सिंह शामिल हुए। उन्होंने एक बैंक खाते में फ्रॉड किया और जब उसे फ्रॉड से पैसे की कमाई की तो इस फ्रॉड में उन्होंने और लोगों को शामिल कर लिया। विरोध करने पर कई बार पवन पाल सिंह द्वारा अपने साथियों को इस पूरे मामले में फंसने की भी धमकी दी गई, जिससे मजबूरी में आकर के लोग साथ देते रहे। उन्होंने बड़े पैमाने पर फ्रॉड किया फिर उनके द्वारा तीन अन्य पूर्व शाखा प्रबंधक को इस पूरे घोटाले में शामिल किया गया है। इसके साथ ही साथ एक पूर्व कैशियर को भी शामिल करके इतना बड़ा घोटाला इन लोगों द्वारा किया गया है। घोटाले का मास्टरमाइंड है पूर्व शाखा प्रबंधक पवन पाल सिंह इस पूरे घोटाले और फ्रॉड का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि इस बैंक का पूर्व कैशियर पवन पाल सिंह है, जिसके द्वारा अपने अन्य साथियों को अपने इस जाल में फंसा कर इतना बड़ा फ्रॉड किया गया है।घोटाले में जो भी पैसा बैंक हाथों से लोग दूसरे के भेज के निकलते थे। वह आपस में इन लोगों द्वारा बांट लिया जाता था लेकिन ज्यादा पैसा पवन पाल सिंह लोगों को धमका करके ले लेता था। पवन पाल सिंह के और उनके परिजनों के भी खातों के बारे में पुलिस जांच कर रही है। ग्राहकों को विश्वास में लेकर उनके चेक बुक लेकर किया जा रहा था फ्रॉड ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये का फ्रॉड किया है यह घोटाला वर्ष 2021 से 2024 के बीच हुआ। इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब कुछ खाताधारक अपनी बची हुई किस्तों की जानकारी लेने बैंक पहुंचे। उन्होंने बताया कि उन्होंने 10 से 12 लाख रुपये का लोन लिया था और नियमित रूप से किस्तें भी चुका रहे थे। हालांकि, बैंक पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनके नाम पर और बैंक लोन हो गया है और उनके खातों से अतिरिक्त पैसे निकाले गए हैं। इस खुलासे के बाद एक के बाद एक कई खाताधारक अपनी खातों की जानकारी लेने बैंक पहुंच रहे हैं। नगर कोतवाली पुलिस के रडार पर 205 खाते इस पूरे घोटाले में कुल 205 खाते शामिल हैं, जिनसे एक खाते से दूसरे खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं। नगर कोतवाली पुलिस ने इन सभी खातों के लेनदेन का विवरण यूपी कोऑपरेटिव बैंक बड़गांव शाखा से मांगा है और मामले की जांच जारी है। कई खाता धारकों को तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन पाल सिंह ने कमीशन देने के भी लालच में उनके चेक बुक अपने पास रखे थे और लगातार उनके बैंक खातों में दूसरे खातों से पैसा भेज करके निकाला जा रहा था। जांच तेज होने के बाद खाता धारकों में मचा हड़कंप जांच तेज होने के बाद अब खाता धारकों में भी हड़कंप मचा हुआ है लगातार परेशान चल रहे है। फ्रॉड को लेकर के मुकदमा दर्ज करवाने वाली खाता धारक शिवेंद्र दुबे ने बताया कि यहां पर सस्ता भी आज पर लोन मिल जाता था इसीलिए हम लोग जाकर के यहां पर लोन लेते थे, लेकिन बाद में हमें पता चला कि हमारे खाते में और लोन कर दिया गया है। जो मेरे द्वारा नहीं लिया गया था। यह भी पता चला है कि पवन पाल सिंह जो यहां की पूर्व शाखा प्रबंधक हैं उनके द्वारा लोगों के चेक बुक ले लिए जाते थे और उन्हें कहा जाता था कि आपका लोन हम पास कर देंगे आधा पैसा आप रख लीजिएगा आधा पैसा हम रख लेंगे और यह उसी के जरिए यहां पर कमाई करते थे। शिवेंद्र दुबे ने यह भी बताया कि पवन पाल सिंह द्वारा एक ग्राहक के खाते से दूसरे ग्रह के खाते में पैसे को ट्रांसफर करके उसे निकाला जा रहा था और इस ग्राहक के खाते में पैसा ट्रांसफर करते थे जिसका उनके पास चेक बुक होता था। और लोगों के खिलाफ जांच करने की शिकायतकर्ता ने की मांग वही शिवेंद्र दुबे ने इस पूरे मामले में पुलिस से और विस्तार से जांच किए जाने की मांग की है। उनका दावा है कि इसमें केवल छोटे खाताधारक ही नहीं बल्कि कई ऐसे बड़े खाताधारक भी शामिल हैं जिनके द्वारा पवन पाल सिंह के साथ मिलकर के इस पूरे 21 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया है। वही गोंडा नगर कोतवाली के क्राइम इंस्पेक्टर व इस पूरे मुकदमा के विवेचक सभाजीत सिंह ने बताया कि पूरे मामले को लेकर के जांच की जा रही है जांच में जो भी निकाल कर आएंगे उनके भी नाम शामिल करके उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। अभी तो हम लोग यही जांच कर रहे हैं कि आखिर किस तरीके से इतना बड़ा फ्रॉड किया गया और इस पूरे फ्रॉड में कौन-कौन लोग शामिल हैं।