पटना में 26 रैन बसेरों की जमीनी हकीकत:कहीं पानी नहीं तो कहीं बाथरूम बेकार; गंदगी-बदबू में हो रहा गुजारा; गांधी मैदान बना मॉडल शेल्टर
पटना में शीतलहर से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने फुटपाथ पर रहने वालों के लिए रैन बसेरा की व्यवस्था की है। न्यू सचिवालय गेट नंबर 3, इको पार्क के पास, जीपीओ गोलंबर, गांधी मैदान सहित कुल 26 स्थान पर रैन बसेरा लगाया गया है। जिला प्रशासन ने दावा किया है कि अब तक इन रैन बसेरा में 18017 लोगों ने आश्रय लिया है। वहीं, कल की बात करें तो कुल 640 लोगों ने यहां आश्रय लिया है। ठंड को देखते हुए सभी रैन बसेरा में लोगों को हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। पड़ताल करने पर इन रैन बसेरों की जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली। कहीं पीने का पानी नहीं, कहीं बाथरूम बेकार पड़े हैं। कहीं गंदगी और बदबू के बीच लोग मजबूरी में रात काट रहे हैं। हालांकि, गांधी मैदान का रैन बसेरा सबसे अलग और सुविधाओं से लैस नजर आया। पटना जिला प्रशासन के इन दावों की जमीनी हकीकत क्या है? यह जानने के लिए हमारी टीम आधी रात अलग-अलग रैन बसेरों में पहुंची। यहां जो तस्वीर सामने आई, वह चौंकाने वाली और सिस्टम की पोल खोलने वाली थी। देखिए भास्कर की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट...। RO है, लेकिन पानी नहीं, बाथरूम में दरवाज़ा नहीं भास्कर की टीम सचिवालय गेट नंबर 3 के पास वाले रैन बसेरा में रात करीब 11:00 बजे पहुंची। जब हम अंदर पहुंचे तो रैन बसेरा में चारों ओर सिर्फ गंदगी ही दिखाई दी। पीने के लिए पानी तक नहीं था। पानी की मशीन तो लगाई गई है, लेकिन वह सालों से बंद पड़ी है। शौचालय तो है, लेकिन उसका दरवाजा नहीं है। रैन बसेरा की सीलिंग से पानी की बूंदें गिरती दिख रही हैं। टेंट भी पुराना, गंदा और फटा हुआ दिखा। फर्श पर मिट्टी की मोटी परत लगी है। बाहर से लाकर पीते है पानी: रोहित रैन बसेरा में रह रहे लोगों से हमने बातचीत की तो रोहित नाम के युवक ने बताया कि हम पिछले डेढ़ साल से यहां आकर रहते हैं। यहां पानी की व्यवस्था नहीं है। जो आरओ मशीन लगा है, वह भी खराब हो गया है। पानी बाहर से लाकर पीते है। बाथरूम की भी सफाई नहीं होती है, जिसकी वजह से हमें बाहर नगर निगम के बाथरूम में जाना पड़ता है। हमें यहां काफी परेशानी होती है, लेकिन मजबूरी में रहते हैं। बारिश में पानी गिरता है, लेकिन उसे ठीक नहीं कराया जा रहा है। रैन बसेरा जब से चालू हुआ, तब से नहीं हुई सफाई- दयानंद दयानंद पासवान ने बताया कि हम पिछले दो साल से यहां कर रहा करते हैं ठंड में कंबल और खाना तो मिल रहा है लेकिन पानी पीने के लिए नहीं मिलता। बाथरूम के लिए सभी लोगों को दूर जाना पड़ता है। मेरे पैर से ज्यादा चल नहीं जाता इसलिए हम उतना दूर नहीं जाते पास के नगर निगम के शौचालय में जाते हैं। यह रैन बसेरा जब से चालू हुआ है तब से आज तक सफाई करने वाला कोई नहीं आया। एक दिन कोई आकर जमीन का गंदगी साफ करके गया। सुविधा नहीं, लेकिन मजबूरी में रह रहे- हेमराज हेमराज ने बताया कि सब कुछ तो ठीक है, लेकिन इस ठंड में बाथरूम के लिए बहुत दूर जाना पड़ता है। इस रैन बसेरा के लिए तीन बाथरूम बनाया गया था, लेकिन दरवाजा टूट गया है। यह बनेगा तब तो इसमें जा पाएंगे। पीने का पानी भी बाहर से लेकर आते हैं। रेन बसेरा में जहां-तहां पानी टपकते रहता है। परेशानी तो होती है, लेकिन हमारी मजबूरी है। हम यहां मजदूरी करते हैं तो जो पैसा मिलता है, उससे अपना घर चलाते हैं। यहां आकर रहते हैं, ताकि कुछ पैसे बच जाएं। पीने के पानी से आती है बदबू जब हम जीपीओ गोलंबर के पास वाले रेन बसेरा में पहुंचे तो उसकी भी खस्ताहाल दिखाई दिया। वहां के लोगों ने बताया कि हमें जो पानी दी जाती है, उसमें से बदबू आती है। बाथरूम इतना गंदा है कि उसमें कोई जा नहीं सकता। कभी कोई सफाई करने वाला नहीं आता। फर्श से लेकर दीवार तक सिर्फ गंदगी है, लेकिन इसे कभी साफ नहीं किया जाता। बस एक कंबल दे दिया गया है। हम यहां मजबूरी में रह लेते हैं। ईको पार्क नो स्मोकिंग जोन, लेकिन खुलेआम धूम्रपान इसके बाद हम इको पार्क के पास वाले रैन बसेरा में पहुंचे। जहां कैमरे से निगरानी तो रखी जा रही है, लेकिन खुलेआम लोग धूम्रपान करते दिखे। रैन बसेरा के बिस्तर पर सोते हुए एक व्यक्ति बीड़ी पीते हुए दिखाई दिया। वहां मौजूद गार्ड से हमने बात किया कि यह नो स्मोकिंग जोन है। तो उन्होंने जवाब दिया कि अब नहीं मानते हैं, पी लेते हैं तो हम लोग क्या ही करें। अगर साफ सफाई की बात करें तो बाथरूम तो बनाया गया है, लेकिन उसमें से पानी लीक होकर बाहर बहता हुआ दिखाई दिया। बेसिन तो लगाया गया है, लेकिन नल नहीं। पानी के लिए मशीन भी लगाया गया है, लेकिन सालों से बंद पड़ा है। लोग सबमर्सिबल का पानी पी रहे हैं। फर्श से लेकर दीवार तक सिर्फ गंदगी ही दिखाई दी। गांधी मैदान रैन बसेरा में दी गई है सभी सुविधाएं जब हम गांधी मैदान के पास वाले रैन बसेरा में पहुंचे तो वहां सभी मॉडर्न सुविधाएं दी जा रही है। पुरुष के लिए 45 और महिलाओं के लिए 10 बेड लगाए गए हैं। पानी भी फिल्टर वाला दिया जा रहा है। साफ सुथरा बेड और कंबल की व्यवस्था है। वहां के गार्ड मोहम्मद आजाद ने बताया कि ज्यादातर पटना से बाहर के लोग यहां रहने के लिए आते हैं। पानी, शौचालय, खाना, कंबल, गद्दा, मच्छरदानी, बेड सहित सभी सुविधाएं लोगों को दी जा रही है। सीसीटीवी कैमरे से लगातार निगरानी रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश से आए हुए विशाल सिंह ने बताया कि, मुझे मेरे दोस्त ने यहां रहने का सुझाव दिया और मैं रहने लगा। बहुत अच्छी सुविधा है। अलाव की व्यवस्था की गई है और कंबल भी है तो रात में ठंड भी नहीं लगती। मैं तीन-चार दिनों के लिए बिहार आया हूं तो यहीं रुक गया।
पटना में शीतलहर से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने फुटपाथ पर रहने वालों के लिए रैन बसेरा की व्यवस्था की है। न्यू सचिवालय गेट नंबर 3, इको पार्क के पास, जीपीओ गोलंबर, गांधी मैदान सहित कुल 26 स्थान पर रैन बसेरा लगाया गया है। जिला प्रशासन ने दावा किया है कि अब तक इन रैन बसेरा में 18017 लोगों ने आश्रय लिया है। वहीं, कल की बात करें तो कुल 640 लोगों ने यहां आश्रय लिया है। ठंड को देखते हुए सभी रैन बसेरा में लोगों को हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। पड़ताल करने पर इन रैन बसेरों की जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली। कहीं पीने का पानी नहीं, कहीं बाथरूम बेकार पड़े हैं। कहीं गंदगी और बदबू के बीच लोग मजबूरी में रात काट रहे हैं। हालांकि, गांधी मैदान का रैन बसेरा सबसे अलग और सुविधाओं से लैस नजर आया। पटना जिला प्रशासन के इन दावों की जमीनी हकीकत क्या है? यह जानने के लिए हमारी टीम आधी रात अलग-अलग रैन बसेरों में पहुंची। यहां जो तस्वीर सामने आई, वह चौंकाने वाली और सिस्टम की पोल खोलने वाली थी। देखिए भास्कर की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट...। RO है, लेकिन पानी नहीं, बाथरूम में दरवाज़ा नहीं भास्कर की टीम सचिवालय गेट नंबर 3 के पास वाले रैन बसेरा में रात करीब 11:00 बजे पहुंची। जब हम अंदर पहुंचे तो रैन बसेरा में चारों ओर सिर्फ गंदगी ही दिखाई दी। पीने के लिए पानी तक नहीं था। पानी की मशीन तो लगाई गई है, लेकिन वह सालों से बंद पड़ी है। शौचालय तो है, लेकिन उसका दरवाजा नहीं है। रैन बसेरा की सीलिंग से पानी की बूंदें गिरती दिख रही हैं। टेंट भी पुराना, गंदा और फटा हुआ दिखा। फर्श पर मिट्टी की मोटी परत लगी है। बाहर से लाकर पीते है पानी: रोहित रैन बसेरा में रह रहे लोगों से हमने बातचीत की तो रोहित नाम के युवक ने बताया कि हम पिछले डेढ़ साल से यहां आकर रहते हैं। यहां पानी की व्यवस्था नहीं है। जो आरओ मशीन लगा है, वह भी खराब हो गया है। पानी बाहर से लाकर पीते है। बाथरूम की भी सफाई नहीं होती है, जिसकी वजह से हमें बाहर नगर निगम के बाथरूम में जाना पड़ता है। हमें यहां काफी परेशानी होती है, लेकिन मजबूरी में रहते हैं। बारिश में पानी गिरता है, लेकिन उसे ठीक नहीं कराया जा रहा है। रैन बसेरा जब से चालू हुआ, तब से नहीं हुई सफाई- दयानंद दयानंद पासवान ने बताया कि हम पिछले दो साल से यहां कर रहा करते हैं ठंड में कंबल और खाना तो मिल रहा है लेकिन पानी पीने के लिए नहीं मिलता। बाथरूम के लिए सभी लोगों को दूर जाना पड़ता है। मेरे पैर से ज्यादा चल नहीं जाता इसलिए हम उतना दूर नहीं जाते पास के नगर निगम के शौचालय में जाते हैं। यह रैन बसेरा जब से चालू हुआ है तब से आज तक सफाई करने वाला कोई नहीं आया। एक दिन कोई आकर जमीन का गंदगी साफ करके गया। सुविधा नहीं, लेकिन मजबूरी में रह रहे- हेमराज हेमराज ने बताया कि सब कुछ तो ठीक है, लेकिन इस ठंड में बाथरूम के लिए बहुत दूर जाना पड़ता है। इस रैन बसेरा के लिए तीन बाथरूम बनाया गया था, लेकिन दरवाजा टूट गया है। यह बनेगा तब तो इसमें जा पाएंगे। पीने का पानी भी बाहर से लेकर आते हैं। रेन बसेरा में जहां-तहां पानी टपकते रहता है। परेशानी तो होती है, लेकिन हमारी मजबूरी है। हम यहां मजदूरी करते हैं तो जो पैसा मिलता है, उससे अपना घर चलाते हैं। यहां आकर रहते हैं, ताकि कुछ पैसे बच जाएं। पीने के पानी से आती है बदबू जब हम जीपीओ गोलंबर के पास वाले रेन बसेरा में पहुंचे तो उसकी भी खस्ताहाल दिखाई दिया। वहां के लोगों ने बताया कि हमें जो पानी दी जाती है, उसमें से बदबू आती है। बाथरूम इतना गंदा है कि उसमें कोई जा नहीं सकता। कभी कोई सफाई करने वाला नहीं आता। फर्श से लेकर दीवार तक सिर्फ गंदगी है, लेकिन इसे कभी साफ नहीं किया जाता। बस एक कंबल दे दिया गया है। हम यहां मजबूरी में रह लेते हैं। ईको पार्क नो स्मोकिंग जोन, लेकिन खुलेआम धूम्रपान इसके बाद हम इको पार्क के पास वाले रैन बसेरा में पहुंचे। जहां कैमरे से निगरानी तो रखी जा रही है, लेकिन खुलेआम लोग धूम्रपान करते दिखे। रैन बसेरा के बिस्तर पर सोते हुए एक व्यक्ति बीड़ी पीते हुए दिखाई दिया। वहां मौजूद गार्ड से हमने बात किया कि यह नो स्मोकिंग जोन है। तो उन्होंने जवाब दिया कि अब नहीं मानते हैं, पी लेते हैं तो हम लोग क्या ही करें। अगर साफ सफाई की बात करें तो बाथरूम तो बनाया गया है, लेकिन उसमें से पानी लीक होकर बाहर बहता हुआ दिखाई दिया। बेसिन तो लगाया गया है, लेकिन नल नहीं। पानी के लिए मशीन भी लगाया गया है, लेकिन सालों से बंद पड़ा है। लोग सबमर्सिबल का पानी पी रहे हैं। फर्श से लेकर दीवार तक सिर्फ गंदगी ही दिखाई दी। गांधी मैदान रैन बसेरा में दी गई है सभी सुविधाएं जब हम गांधी मैदान के पास वाले रैन बसेरा में पहुंचे तो वहां सभी मॉडर्न सुविधाएं दी जा रही है। पुरुष के लिए 45 और महिलाओं के लिए 10 बेड लगाए गए हैं। पानी भी फिल्टर वाला दिया जा रहा है। साफ सुथरा बेड और कंबल की व्यवस्था है। वहां के गार्ड मोहम्मद आजाद ने बताया कि ज्यादातर पटना से बाहर के लोग यहां रहने के लिए आते हैं। पानी, शौचालय, खाना, कंबल, गद्दा, मच्छरदानी, बेड सहित सभी सुविधाएं लोगों को दी जा रही है। सीसीटीवी कैमरे से लगातार निगरानी रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश से आए हुए विशाल सिंह ने बताया कि, मुझे मेरे दोस्त ने यहां रहने का सुझाव दिया और मैं रहने लगा। बहुत अच्छी सुविधा है। अलाव की व्यवस्था की गई है और कंबल भी है तो रात में ठंड भी नहीं लगती। मैं तीन-चार दिनों के लिए बिहार आया हूं तो यहीं रुक गया।