चौसा रेलवे ओवरब्रिज चार साल बाद भी अधूरा:2022 में हुआ था भूमि पूजन, जनता परेशान; अब 2026 में पूरा होने की उम्मीद

बक्सर के चौसा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य चार साल बीत जाने के बाद भी अधूरा है। 16 फरवरी 2022 को तत्कालीन सांसद सह केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन किया था। इसके कुछ महीनों बाद बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की ओर से काम भी शुरू हुआ, लेकिन तय समय सीमा में पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका। साल 2025 तक लोगों को पुल नहीं, बल्कि इंतजार और निराशा ही हाथ लगी। अधूरे पुल से रोजाना जाम की मार रेलवे गुमटी बंद होने के बाद यहां अस्थायी डायवर्सन बनाया गया है, लेकिन यह डायवर्सन दोनों ओर से बेहद संकीर्ण है। नतीजतन सुबह से शाम तक यहां वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार जाम की स्थिति घंटों बनी रहती है। स्कूली बच्चे, मरीज, नौकरीपेशा लोग और यात्री रोज़ इस जाम से जूझने को मजबूर हैं। यात्रियों और स्थानीय लोगों की बढ़ी परेशानी स्थानीय लोगों का कहना है कि अधूरे पुल की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अस्पताल जाने वाले मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, स्कूली बच्चों को देर से स्कूल पहुंचना पड़ता है और यात्रियों की ट्रेन तक छूट जाती है। कई लोगों ने बताया कि जाम में फंसे रहना अब रोज़ की समस्या बन चुकी है। धीमी रफ्तार से निर्माण पर उठे सवाल चौसा और आसपास के इलाकों के लोगों का आरोप है कि पुल निर्माण की गति बेहद धीमी है। कई दिनों तक काम पूरी तरह ठप रहता है, जिससे लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि अगर काम तेज़ी से होता, तो अब तक पुल बनकर तैयार हो चुका होता और क्षेत्र को बड़ी राहत मिलती। कारोबार और सुरक्षा पर भी असर लगातार लगने वाले जाम का असर स्थानीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। व्यापारी वर्ग का कहना है कि ग्राहक समय पर बाजार नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। वहीं, संकरी सड़क और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। कई बार छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। प्रशासन से की गई शिकायत इस समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने बक्सर प्रशासन को पत्र लिखकर जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सरकार और जिला प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखानी चाहिए और संबंधित निर्माण एजेंसी को सख्त निर्देश देने चाहिए, ताकि वर्षों से लंबित इस परियोजना को पूरा कराया जा सके। 2024 और 2025 की समय-सीमा भी हुई फेल गौरतलब है कि बक्सर के जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने वर्ष 2024 में ही इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण उसी साल पूरा करने का निर्देश दिया था। हालांकि भूमि अधिग्रहण से जुड़ी समस्याओं के कारण यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। इसके बाद प्रशासन और निर्माण एजेंसी की ओर से कहा गया कि वर्ष 2025 में पुल को आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा, लेकिन 2025 में भी निर्माण अधूरा ही रहा। अब 2026 का दावा, फिर सवाल वही अब पुल निर्माण एजेंसी की ओर से दावा किया गया है कि वर्ष 2026 में चौसा रेलवे ओवरब्रिज को जनता के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि लगातार बदलती समय सीमाओं के कारण लोग इस दावे को लेकर भी संशय में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल नई तारीख दी जाती है, लेकिन जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं। जनता के मन में एक ही सवाल फिलहाल चौसा की जनता अधूरे पुल, संकीर्ण डायवर्सन और रोजाना के जाम से परेशान है। लोगों के मन में एक ही सवाल है, क्या 2026 में सचमुच इस रेलवे ओवरब्रिज से राहत मिलेगी, या फिर यह परियोजना एक बार फिर नई समय-सीमा और नए वादों का इंतजार करती रह जाएगी?

Dec 29, 2025 - 12:59
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चौसा रेलवे ओवरब्रिज चार साल बाद भी अधूरा:2022 में हुआ था भूमि पूजन, जनता परेशान; अब 2026 में पूरा होने की उम्मीद
बक्सर के चौसा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य चार साल बीत जाने के बाद भी अधूरा है। 16 फरवरी 2022 को तत्कालीन सांसद सह केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमि पूजन किया था। इसके कुछ महीनों बाद बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की ओर से काम भी शुरू हुआ, लेकिन तय समय सीमा में पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका। साल 2025 तक लोगों को पुल नहीं, बल्कि इंतजार और निराशा ही हाथ लगी। अधूरे पुल से रोजाना जाम की मार रेलवे गुमटी बंद होने के बाद यहां अस्थायी डायवर्सन बनाया गया है, लेकिन यह डायवर्सन दोनों ओर से बेहद संकीर्ण है। नतीजतन सुबह से शाम तक यहां वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार जाम की स्थिति घंटों बनी रहती है। स्कूली बच्चे, मरीज, नौकरीपेशा लोग और यात्री रोज़ इस जाम से जूझने को मजबूर हैं। यात्रियों और स्थानीय लोगों की बढ़ी परेशानी स्थानीय लोगों का कहना है कि अधूरे पुल की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अस्पताल जाने वाले मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, स्कूली बच्चों को देर से स्कूल पहुंचना पड़ता है और यात्रियों की ट्रेन तक छूट जाती है। कई लोगों ने बताया कि जाम में फंसे रहना अब रोज़ की समस्या बन चुकी है। धीमी रफ्तार से निर्माण पर उठे सवाल चौसा और आसपास के इलाकों के लोगों का आरोप है कि पुल निर्माण की गति बेहद धीमी है। कई दिनों तक काम पूरी तरह ठप रहता है, जिससे लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि अगर काम तेज़ी से होता, तो अब तक पुल बनकर तैयार हो चुका होता और क्षेत्र को बड़ी राहत मिलती। कारोबार और सुरक्षा पर भी असर लगातार लगने वाले जाम का असर स्थानीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। व्यापारी वर्ग का कहना है कि ग्राहक समय पर बाजार नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। वहीं, संकरी सड़क और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। कई बार छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। प्रशासन से की गई शिकायत इस समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने बक्सर प्रशासन को पत्र लिखकर जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सरकार और जिला प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखानी चाहिए और संबंधित निर्माण एजेंसी को सख्त निर्देश देने चाहिए, ताकि वर्षों से लंबित इस परियोजना को पूरा कराया जा सके। 2024 और 2025 की समय-सीमा भी हुई फेल गौरतलब है कि बक्सर के जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने वर्ष 2024 में ही इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण उसी साल पूरा करने का निर्देश दिया था। हालांकि भूमि अधिग्रहण से जुड़ी समस्याओं के कारण यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। इसके बाद प्रशासन और निर्माण एजेंसी की ओर से कहा गया कि वर्ष 2025 में पुल को आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा, लेकिन 2025 में भी निर्माण अधूरा ही रहा। अब 2026 का दावा, फिर सवाल वही अब पुल निर्माण एजेंसी की ओर से दावा किया गया है कि वर्ष 2026 में चौसा रेलवे ओवरब्रिज को जनता के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि लगातार बदलती समय सीमाओं के कारण लोग इस दावे को लेकर भी संशय में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल नई तारीख दी जाती है, लेकिन जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं। जनता के मन में एक ही सवाल फिलहाल चौसा की जनता अधूरे पुल, संकीर्ण डायवर्सन और रोजाना के जाम से परेशान है। लोगों के मन में एक ही सवाल है, क्या 2026 में सचमुच इस रेलवे ओवरब्रिज से राहत मिलेगी, या फिर यह परियोजना एक बार फिर नई समय-सीमा और नए वादों का इंतजार करती रह जाएगी?