खगड़िया में मक्का के गढ़ में होगी मखाना की खेती:किसानों को 75% तक अनुदान, 100 हेक्टेयर पर उत्पादन का लक्ष्य

खगड़िया जिले के गोगरी प्रखंड के किसानों के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। अब इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर मखाना की खेती की जाएगी। यह योजना उन जलजमाव वाली जमीनों के लिए वरदान साबित होगी, जो अब तक बेकार पड़ी रहती थीं। खगड़िया जिला जिसे फरकिया के नाम से भी जाना जाता है, मक्का उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है और एशिया स्तर पर इसकी पहचान है। हालांकि गंगा नदी से घिरे होने के कारण यहां की कई जमीनें साल भर पानी में डूबी रहती हैं, जिससे किसान केवल एक फसल ही ले पाते हैं या खेती से वंचित रह जाते हैं। जिला कृषि पदाधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि उद्यान विभाग की योजना के तहत इन निचली जमीनों पर बड़े पैमाने पर मखाना का उत्पादन किया जाएगा। इससे न केवल किसानों की अनुपयोगी भूमि का सदुपयोग होगा, बल्कि लाखों की आमदनी से उनके जीवन में खुशहाली भी आएगी। इस वर्ष जिले में 100 हेक्टेयर भूमि पर मखाना की खेती का लक्ष्य रखा गया है। यह खेती विशेष रूप से उन निचली भूमि पर केंद्रित होगी, जहां सालों भर पानी जमा रहता है और किसान अन्य फसलें नहीं उगा पाते हैं। प्रति एकड़ मखाना की खेती में लगभग 97 हजार रुपये की लागत आती है। सरकार की ओर से किसानों को इस पर 75% तक का अनुदान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, किसानों को 1500 किलोग्राम बीज मुफ्त में वितरित किए जाएंगे। उपकरण किट पर भी 75% तक का अनुदान मिलेगा। इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया जारी है।

Nov 14, 2025 - 20:51
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खगड़िया में मक्का के गढ़ में होगी मखाना की खेती:किसानों को 75% तक अनुदान, 100 हेक्टेयर पर उत्पादन का लक्ष्य
खगड़िया जिले के गोगरी प्रखंड के किसानों के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। अब इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर मखाना की खेती की जाएगी। यह योजना उन जलजमाव वाली जमीनों के लिए वरदान साबित होगी, जो अब तक बेकार पड़ी रहती थीं। खगड़िया जिला जिसे फरकिया के नाम से भी जाना जाता है, मक्का उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है और एशिया स्तर पर इसकी पहचान है। हालांकि गंगा नदी से घिरे होने के कारण यहां की कई जमीनें साल भर पानी में डूबी रहती हैं, जिससे किसान केवल एक फसल ही ले पाते हैं या खेती से वंचित रह जाते हैं। जिला कृषि पदाधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि उद्यान विभाग की योजना के तहत इन निचली जमीनों पर बड़े पैमाने पर मखाना का उत्पादन किया जाएगा। इससे न केवल किसानों की अनुपयोगी भूमि का सदुपयोग होगा, बल्कि लाखों की आमदनी से उनके जीवन में खुशहाली भी आएगी। इस वर्ष जिले में 100 हेक्टेयर भूमि पर मखाना की खेती का लक्ष्य रखा गया है। यह खेती विशेष रूप से उन निचली भूमि पर केंद्रित होगी, जहां सालों भर पानी जमा रहता है और किसान अन्य फसलें नहीं उगा पाते हैं। प्रति एकड़ मखाना की खेती में लगभग 97 हजार रुपये की लागत आती है। सरकार की ओर से किसानों को इस पर 75% तक का अनुदान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, किसानों को 1500 किलोग्राम बीज मुफ्त में वितरित किए जाएंगे। उपकरण किट पर भी 75% तक का अनुदान मिलेगा। इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया जारी है।