अनंत सिंह का इंटरव्यू; मेरे बाद बेटा राजनीति करेगा:पत्नी वैसे भी काम नहीं कर पा रही थी, साढ़े तीन करोड़ की गाड़ी का राज
हंगामेदार मोकामा सीट से जदयू के बाहुबली अनंत सिंह 28,206 वोटों से जीत गए हैं। दैनिक भास्कर ने वोटिंग से पहले 16 अक्टूबर को अनंत सिंह का इंटरव्यू लिया था। फिलहाल वो दुलारचंद मर्डर केस में पटना सेंट्रल जेल में हैं। अनंत सिंह ने भास्कर रिपोर्टर सृष्टि मिश्रा से तब क्या कहा था, आइये पढ़ते हैं- पटना से 94 किलोमीटर दूर मोकामा के कारगिल मार्केट में तकरीबन सौ दुकाने हैं। इस मार्केट के तीसरी मंजिल पर अनंत सिंह रहते हैं। समर्थकों ने बताया कि करीब 8 बजे वे चुनाव प्रचार के लिए निकलते हैं। जैसे ही वह अपनी गाड़ी में बैठे, एक के पीछे एक… 30 से ज्यादा गाड़ियों का काफिला उनके पीछे निकलीं। हम भी उनके साथ हो लिए। हमने पूछा कि आपको कौन सा नाम पसंद है, छोटे सरकार या अनंत? उन्होंने तुरंत जवाब दिया, हमको 'अनंत' नाम अच्छा लगता है। हमारे बड़े भाई दिलीप सिंह उनका नाम सरकार पड़ गया और हमको लोग 'छोटे सरकार' जानने लगे। ये नाम कोई कानून-किताब या कोर्ट-कचहरी से नहीं मिला है। हम जनता के सेवक हैं, तो जनता जो नाम रख देती है, वही हो जाता है। इसमें कोई दबदबे वाली बात नहीं है। मोकामा में दादागिरी चलने को लेकर वे बताते हैं कि ये सब पहले लालू जी की सरकार में था। जब से नीतीश जी की सरकार आई है, तब से कोई दादागिरी कहीं नहीं है। लालू जी की सरकार में वो सब झगड़ा-झंझट होता था, लेकिन नीतीश सरकार में कोई दादागिरी नहीं है। हमने सवाल किया कि आपके इलाके में सड़कें खराब होने के कारण लोग कह रहे हैं कि रोड नहीं तो वोट नहीं। आप सड़कें क्यों नहीं बनवा रहे? उन्होंने जवाब किया कि बरसात की वजह से खराब हुई है। जल्द बना देंगे। अभी अधिकारियों को फोन किए हैं, काम हो गया होगा। इन्हीं सब के बीच हम एक स्थानीय स्कूल पहुंचे। अनंत सिंह वहां गए और बच्चों से मिले। फिर हम उनके साथ लंच में शामिल हुए। एक लंबी टेबल पर खाना लगा। खाना खाते हुए हमने पूछा कि पिछली बार आपकी पत्नी नीलम देवी चुनाव लड़ी थीं, इस बार आप खुद मैदान में हैं। टिकट कटने से क्या वह नाराज हैं? हंसते हुए अनंत सिंह बोले, बच्चों के साथ वो तो दिल्ली में रहती हैं। काम तो वैसे भी नहीं कर रही थीं। हम रोज पत्नी के पास नहीं जाते हैं। हम जनता के बीच रहते हैं। अपने बच्चों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, ‘हमारे 5 बच्चे हैं। 3 बेटा, 2 बेटी। बेटे लंदन चले गए हैं छुट्टी में। कॉलेज-स्कूल कहां हैं, ये सब हम नहीं पूछते। ये हमें समझ नहीं आता। बच्चे राजनीति में नहीं आएंगे। परिवार से एक ही आदमी राजनीति में रहेगा… हम रहे या बेटा रहे।’ सवाल-जवाब के बीच अनंत सिंह ने बहुत थोड़ा सा खाना खाया और अपनी थाली किनारे कर दी। तभी उनके एक कार्यकर्ता ने चुपचाप वह जूठी थाली उठाई और खुद उसी में खाने लगे। हमने पूछा कि वो जूठी थाली में क्यों खा रहे हैं? इस पर अनंत सिंह बोले, ‘मेरा खाया और छोड़ा हुआ खाना प्रसाद हो जाता है, जिसे ये लोग मिल-बांटकर खा लेते हैं।’ हमने उनके हाथ में 'A' लिखा ब्रेसलेट देखा। पूछा कि आप चश्मा, ब्रेसलेट… इन सब के बड़े शौकीन हैं। इस पर वे बेबाकी से बोले तो क्या करें उघारे (न्यूड) घूमते रहे? अपनी पढ़ाई को लेकर अनंत सिंह बताते हैं, ‘हम कभी स्कूल नहीं गए। हम बचपन में खेलते रहे, गुल्ली-डंडा, गुट्टी। स्कूल जाते तो नौकरी करनी पड़ती। नौकरी में अनपढ़ को कोई नहीं रखता है, विधायक में रख लेता है।’ उन्होंने बताया कि वे 11 साल की उम्र में जेल गए और पॉलिटिक्स में 40 साल से एक्टिव हैं। इसके बाद अनंत सिंह फिर से लोगों से मिलने लगे। प्रचार करने लगे। कुछ ही देर में शाम हो चली। अब हम वापस ‘कारगिल मार्केट’ की ओर चले। करीब 5 बजे हम वहां पहुंचे। हमारे बाद अनंत सिंह काफिला आया। कुछ देर के आराम के बाद अनंत सिंह एक हॉल में आए। वहां पड़े पलंग पर पालथी मारकर बैठ गए। चारों ओर उनके समर्थक जमा हो गए। हम भी वहीं बैठे और सवाल पूछने लगे। यह नजारा एक इंटरव्यू कम, चौपाल ज्यादा लग रहा था। उनकी शादी और पत्नी से पहली मुलाकात के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, पहले मोहब्बत हुई। पहली बार मैं उन्हें इम्तिहान दिलाने ले गया था। पहली मुलाकात में ही हम दोनों को प्यार हो गया। कुछ दिन बाद शादी हो गई। मैं उन्हें लेकर कलकत्ता काली मंदिर चला गया था। वहीं शादी करके चला आया। किसी नेता के खिलाफ न बोलने की वजह बताते हुए अनंत सिंह कहा, हम भी किसी के बारे में नहीं बोलते। क्या जरूरत है? अपना काम करेंगे कि हम पागल हैं जो किसी के बारे में बोलते रहेगे। हमने पूछा कि नीतीश जी के साथ आपकी क्यों बनती-बिगड़ती रहती है? उन्होंने जवाब दिया, उनके साथ हमारी कभी नहीं बिगड़ी। कुछ लोग उनकी पार्टी में थे जो हमेशा गलत-गलत बोलते थे और मेरे खिलाफ भड़काते थे। सीएम नीतीश की सेहत पर उन्होंने कहा कि लोग गलत बोलते हैं। उनका स्वास्थ बिलकुल ठीक है। अनंत सिंह लालू को सोना बताते हैं और प्रशांत किशोर के लिए कहते हैं कि अभी बिहार में प्रशांत कुछ नहीं है। चुनाव जीतने पर वे कहते हैं कि बिहार में नीतीश कुमार और दिल्ली में नरेंद्र मोदी। दोनों का कोई जोड़ा नहीं है। उन्होंने 11 साल की उम्र में जेल जाने के वाकया बताया, ‘कोई बूढ़ा केस कर दिया। हम तीन-चार दिन के लिए जेल चले गए। हमने एक किस्सा पूछा कि जब आपने नदी पार करके भाई का बदला लिया, वह क्या था? सवाल टालते हुए उन्होंने कहा कि ये सब फालतू चीजें हैं। देहात में बदला-बदली होता है। जब दुश्मनी-दोस्ती होता है, गोली भी चल जाता है। हमने सवाल पूछा कि क्या आपके बेटे तीसरे सरकार बनेंगे? उन्होंने बेबाकी से कहा, ‘हां एकदम। हम तो हरदम सरकार से कहते हैं कि 60 साल उम्र हो जाए तो उसको टिकट बंद कर दिया जाए। हम तो लाचार थे। पत्नी तैयार नहीं हुई। बेटा की उम्र नहीं था। अभी वो पढ़ रहा है। हमने कहा कि तुम थोड़ा पढ़ के आओ, जमाना बदल गया। पहले काम-वाम कुछ चल जाता था, लेकिन अब इतना पढ़ गया कि हमारे जैसा वो नहीं करेगा।’ मौजूदा राजनीति में खुद की जगह को लेकर कहते हैं कि मैं अभी की राजनीति में फिट नह
हंगामेदार मोकामा सीट से जदयू के बाहुबली अनंत सिंह 28,206 वोटों से जीत गए हैं। दैनिक भास्कर ने वोटिंग से पहले 16 अक्टूबर को अनंत सिंह का इंटरव्यू लिया था। फिलहाल वो दुलारचंद मर्डर केस में पटना सेंट्रल जेल में हैं। अनंत सिंह ने भास्कर रिपोर्टर सृष्टि मिश्रा से तब क्या कहा था, आइये पढ़ते हैं- पटना से 94 किलोमीटर दूर मोकामा के कारगिल मार्केट में तकरीबन सौ दुकाने हैं। इस मार्केट के तीसरी मंजिल पर अनंत सिंह रहते हैं। समर्थकों ने बताया कि करीब 8 बजे वे चुनाव प्रचार के लिए निकलते हैं। जैसे ही वह अपनी गाड़ी में बैठे, एक के पीछे एक… 30 से ज्यादा गाड़ियों का काफिला उनके पीछे निकलीं। हम भी उनके साथ हो लिए। हमने पूछा कि आपको कौन सा नाम पसंद है, छोटे सरकार या अनंत? उन्होंने तुरंत जवाब दिया, हमको 'अनंत' नाम अच्छा लगता है। हमारे बड़े भाई दिलीप सिंह उनका नाम सरकार पड़ गया और हमको लोग 'छोटे सरकार' जानने लगे। ये नाम कोई कानून-किताब या कोर्ट-कचहरी से नहीं मिला है। हम जनता के सेवक हैं, तो जनता जो नाम रख देती है, वही हो जाता है। इसमें कोई दबदबे वाली बात नहीं है। मोकामा में दादागिरी चलने को लेकर वे बताते हैं कि ये सब पहले लालू जी की सरकार में था। जब से नीतीश जी की सरकार आई है, तब से कोई दादागिरी कहीं नहीं है। लालू जी की सरकार में वो सब झगड़ा-झंझट होता था, लेकिन नीतीश सरकार में कोई दादागिरी नहीं है। हमने सवाल किया कि आपके इलाके में सड़कें खराब होने के कारण लोग कह रहे हैं कि रोड नहीं तो वोट नहीं। आप सड़कें क्यों नहीं बनवा रहे? उन्होंने जवाब किया कि बरसात की वजह से खराब हुई है। जल्द बना देंगे। अभी अधिकारियों को फोन किए हैं, काम हो गया होगा। इन्हीं सब के बीच हम एक स्थानीय स्कूल पहुंचे। अनंत सिंह वहां गए और बच्चों से मिले। फिर हम उनके साथ लंच में शामिल हुए। एक लंबी टेबल पर खाना लगा। खाना खाते हुए हमने पूछा कि पिछली बार आपकी पत्नी नीलम देवी चुनाव लड़ी थीं, इस बार आप खुद मैदान में हैं। टिकट कटने से क्या वह नाराज हैं? हंसते हुए अनंत सिंह बोले, बच्चों के साथ वो तो दिल्ली में रहती हैं। काम तो वैसे भी नहीं कर रही थीं। हम रोज पत्नी के पास नहीं जाते हैं। हम जनता के बीच रहते हैं। अपने बच्चों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, ‘हमारे 5 बच्चे हैं। 3 बेटा, 2 बेटी। बेटे लंदन चले गए हैं छुट्टी में। कॉलेज-स्कूल कहां हैं, ये सब हम नहीं पूछते। ये हमें समझ नहीं आता। बच्चे राजनीति में नहीं आएंगे। परिवार से एक ही आदमी राजनीति में रहेगा… हम रहे या बेटा रहे।’ सवाल-जवाब के बीच अनंत सिंह ने बहुत थोड़ा सा खाना खाया और अपनी थाली किनारे कर दी। तभी उनके एक कार्यकर्ता ने चुपचाप वह जूठी थाली उठाई और खुद उसी में खाने लगे। हमने पूछा कि वो जूठी थाली में क्यों खा रहे हैं? इस पर अनंत सिंह बोले, ‘मेरा खाया और छोड़ा हुआ खाना प्रसाद हो जाता है, जिसे ये लोग मिल-बांटकर खा लेते हैं।’ हमने उनके हाथ में 'A' लिखा ब्रेसलेट देखा। पूछा कि आप चश्मा, ब्रेसलेट… इन सब के बड़े शौकीन हैं। इस पर वे बेबाकी से बोले तो क्या करें उघारे (न्यूड) घूमते रहे? अपनी पढ़ाई को लेकर अनंत सिंह बताते हैं, ‘हम कभी स्कूल नहीं गए। हम बचपन में खेलते रहे, गुल्ली-डंडा, गुट्टी। स्कूल जाते तो नौकरी करनी पड़ती। नौकरी में अनपढ़ को कोई नहीं रखता है, विधायक में रख लेता है।’ उन्होंने बताया कि वे 11 साल की उम्र में जेल गए और पॉलिटिक्स में 40 साल से एक्टिव हैं। इसके बाद अनंत सिंह फिर से लोगों से मिलने लगे। प्रचार करने लगे। कुछ ही देर में शाम हो चली। अब हम वापस ‘कारगिल मार्केट’ की ओर चले। करीब 5 बजे हम वहां पहुंचे। हमारे बाद अनंत सिंह काफिला आया। कुछ देर के आराम के बाद अनंत सिंह एक हॉल में आए। वहां पड़े पलंग पर पालथी मारकर बैठ गए। चारों ओर उनके समर्थक जमा हो गए। हम भी वहीं बैठे और सवाल पूछने लगे। यह नजारा एक इंटरव्यू कम, चौपाल ज्यादा लग रहा था। उनकी शादी और पत्नी से पहली मुलाकात के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, पहले मोहब्बत हुई। पहली बार मैं उन्हें इम्तिहान दिलाने ले गया था। पहली मुलाकात में ही हम दोनों को प्यार हो गया। कुछ दिन बाद शादी हो गई। मैं उन्हें लेकर कलकत्ता काली मंदिर चला गया था। वहीं शादी करके चला आया। किसी नेता के खिलाफ न बोलने की वजह बताते हुए अनंत सिंह कहा, हम भी किसी के बारे में नहीं बोलते। क्या जरूरत है? अपना काम करेंगे कि हम पागल हैं जो किसी के बारे में बोलते रहेगे। हमने पूछा कि नीतीश जी के साथ आपकी क्यों बनती-बिगड़ती रहती है? उन्होंने जवाब दिया, उनके साथ हमारी कभी नहीं बिगड़ी। कुछ लोग उनकी पार्टी में थे जो हमेशा गलत-गलत बोलते थे और मेरे खिलाफ भड़काते थे। सीएम नीतीश की सेहत पर उन्होंने कहा कि लोग गलत बोलते हैं। उनका स्वास्थ बिलकुल ठीक है। अनंत सिंह लालू को सोना बताते हैं और प्रशांत किशोर के लिए कहते हैं कि अभी बिहार में प्रशांत कुछ नहीं है। चुनाव जीतने पर वे कहते हैं कि बिहार में नीतीश कुमार और दिल्ली में नरेंद्र मोदी। दोनों का कोई जोड़ा नहीं है। उन्होंने 11 साल की उम्र में जेल जाने के वाकया बताया, ‘कोई बूढ़ा केस कर दिया। हम तीन-चार दिन के लिए जेल चले गए। हमने एक किस्सा पूछा कि जब आपने नदी पार करके भाई का बदला लिया, वह क्या था? सवाल टालते हुए उन्होंने कहा कि ये सब फालतू चीजें हैं। देहात में बदला-बदली होता है। जब दुश्मनी-दोस्ती होता है, गोली भी चल जाता है। हमने सवाल पूछा कि क्या आपके बेटे तीसरे सरकार बनेंगे? उन्होंने बेबाकी से कहा, ‘हां एकदम। हम तो हरदम सरकार से कहते हैं कि 60 साल उम्र हो जाए तो उसको टिकट बंद कर दिया जाए। हम तो लाचार थे। पत्नी तैयार नहीं हुई। बेटा की उम्र नहीं था। अभी वो पढ़ रहा है। हमने कहा कि तुम थोड़ा पढ़ के आओ, जमाना बदल गया। पहले काम-वाम कुछ चल जाता था, लेकिन अब इतना पढ़ गया कि हमारे जैसा वो नहीं करेगा।’ मौजूदा राजनीति में खुद की जगह को लेकर कहते हैं कि मैं अभी की राजनीति में फिट नहीं बैठता हूं। हम जनता के लिए रात-दिन काम करते हैं, लेकिन अब बात-विचार अंग्रेजी… आ जाए तो हम क्या करें? हम काम कर रहे हैं।’ हमने पूछा कि क्या आपको भी आपकी जाति का वोट मिलता है? इस पर वे कहते हैं कि हमको जाति-वाति वाला चीज ही पसंद नहीं है। बचपन से ही। जात-पात से हम हमेशा से दूर हैं। बेकार चीज है एकदम। अपनी 3 करोड़ की गाड़ी को लेकर अनंत सिंह कहते हैं कि उसमें सेफ्टी का सबसे ज्यादा फायदा है। धक्का-झगड़ा में हम मर जाएंगे, इस गाड़ी कुछ नहीं बिगाड़ेगा। हमने पूछा कि अगर आप पर मूवी बनी तो कौन-सा हीरो होगा? इस पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि हम क्या काम किए हैं कि हमारा सिनेमा बनेगा। हमने तो कभी सिनेमा नहीं देखा। बिहार के युवाओं को संदेश देते हुए अनंत सिंह कहते हैं कि झगड़ा नहीं करो, दारू-ताड़ी नहीं पियो, एकदम विश्वास करो कि सरकार तुम लोगों को नौकरी देगा। बातचीत खत्म होने के बाद अनंत सिंह अपने पुराने, बेबाक अंदाज में लौट आए। समर्थकों और सहयोगियों के साथ बातें करने लगे और ठहाके लगाने लगे। इसके बाद हम उनकी रसोई में गए, जहां अनंत सिंह का रसोइया सोनू लगातार चाय बना रहा था। अनंत सिंह के पसंदीदा खाने को लेकर सोनू ने बताया कि वे सिंपल खाना खाते हैं। चटनी-चोखा, दाल-भात। सोनू ने बताया कि अनंत सिंह की पत्नी नीलम ही घर के काम और काम करने वालों को देखती हैं। सोनू से बातचीत खत्म कर हम वापस पटना आ गए, लेकिन दिमाग में अब भी कारगिल मार्केट की छाप बनी रही।