मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है, लेकिन भारत सरकार का कहना है कि देश में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर किसी प्रकार की चिंता की स्थिति नहीं है।
मौजूद जानकारी के अनुसार पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और इस समय अफवाह फैलाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर तंज करते हुए कहा कि ऊर्जा संकट को लेकर बेवजह भ्रम फैलाया जा रहा है।
बता दें कि मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण दुनिया को इतिहास के सबसे बड़े तेल आपूर्ति झटकों में से एक का सामना करना पड़ सकता है। एजेंसी के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में उत्पादन में भारी गिरावट आई है और हालात में अभी किसी प्रकार की नरमी के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया था। इसके बाद से ईरान और खाड़ी क्षेत्र में कई ऊर्जा प्रतिष्ठानों और जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल देखी जा रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और कड़ी कर दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के कुल कच्चे तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है और इसके बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इसी संदर्भ में पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि संकट से पहले भारत के लगभग 45 प्रतिशत कच्चे तेल आयात इसी मार्ग से आते थे। हालांकि उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के कूटनीतिक प्रयासों और अलग-अलग देशों से बनाए गए संबंधों के कारण भारत ने ऐसे स्रोतों से तेल प्राप्त करना सुनिश्चित कर लिया है जो होरमुज मार्ग से मिलने वाली आपूर्ति से भी अधिक है।
मंत्री ने यह भी बताया कि देश में रसोई गैस उत्पादन को बढ़ा दिया गया है। उनके अनुसार पिछले पांच दिनों में रिफाइनरियों को निर्देश देकर रसोई गैस उत्पादन में करीब 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है और अतिरिक्त खरीद की प्रक्रिया भी जारी है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश के लगभग 33 करोड़ परिवारों, खासकर गरीब और वंचित वर्ग के लोगों की रसोई पर किसी प्रकार का असर न पड़े। इसी वजह से घरेलू आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित रखी गई है और सिलेंडर वितरण की व्यवस्था पहले की तरह जारी है।
गौरतलब है कि सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में भी विविधता बढ़ाई है। मंत्री के अनुसार अब अमेरिका, कनाडा, नॉर्वे, अल्जीरिया और रूस सहित कई देशों से ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। बड़े गैस जहाज भी वैकल्पिक समुद्री मार्गों से लगातार भारत पहुंच रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कई मामलों में उनका उत्पादन 100 प्रतिशत से भी अधिक है। इस कारण पेट्रोल, डीजल, केरोसीन और विमान ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पूरी तरह सुनिश्चित है।
मौजूद जानकारी के अनुसार सरकार ने होरमुज मार्ग के अलावा अन्य स्रोतों से तेल खरीद को काफी बढ़ाया है। जहां पहले भारत के कुल आयात में इन स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2006-07 के दौरान भारत लगभग 27 देशों से तेल आयात करता था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर लगभग 40 देशों तक पहुंच गई है। उनके अनुसार वर्षों से अपनाई गई यह नीति ही आज भारत को वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच मजबूती प्रदान कर रही है।