श्रीगंगानगर में शीतलहर के साथ कड़ाके की ठंड:रात का पारा 4 डिग्री से नीचे, कई दिन मौसम ड्राई रहेगा

श्रीगंगानगर जिले में पिछले एक सप्ताह से मौसम ड्राई बना हुआ है। सूखी ठंड के चलते रात का न्यूनतम तापमान लगातार 4 डिग्री से नीचे दर्ज किया जा रहा है, जिससे खेतों में पाला जम रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम ऐसे ही ड्राई रहा और तापमान में मामूली बढ़ोतरी हुई तो सरसों, आलू, गेहूं और अन्य रबी फसलों में नुकसान और बढ़ सकता है। कृषि अनुसंधान केंद्र, श्रीगंगानगर पर शुक्रवार सुबह न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री रिकार्ड किया गया। गुरुवार को न्यूनतम 3.7 डिग्री और अधिकतम 20.4 डिग्री रहा, जबकि बुधवार को न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री और अधिकतम 16.5 डिग्री दर्ज हुआ। दिन में तापमान कम रहने से मौसम ड्राई बना हुआ है और सूखी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे तक इलाके में घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी काफी कम हो गई थी। करीब 11 बजे सूर्य देव ने दर्शन दिए और धूप निकलने से लोगों को थोड़ी राहत मिली। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पाला विशेष रूप से सरसों, आलू, मटर और सब्जियों को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। हल्की सिंचाई, धुआं करना या अन्य बचाव उपाय अपनाने से नुकसान को कुछ हद तक रोका जा सकता है, लेकिन लगातार कम तापमान से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

Jan 16, 2026 - 11:39
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श्रीगंगानगर में शीतलहर के साथ कड़ाके की ठंड:रात का पारा 4 डिग्री से नीचे, कई दिन मौसम ड्राई रहेगा
श्रीगंगानगर जिले में पिछले एक सप्ताह से मौसम ड्राई बना हुआ है। सूखी ठंड के चलते रात का न्यूनतम तापमान लगातार 4 डिग्री से नीचे दर्ज किया जा रहा है, जिससे खेतों में पाला जम रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम ऐसे ही ड्राई रहा और तापमान में मामूली बढ़ोतरी हुई तो सरसों, आलू, गेहूं और अन्य रबी फसलों में नुकसान और बढ़ सकता है। कृषि अनुसंधान केंद्र, श्रीगंगानगर पर शुक्रवार सुबह न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री रिकार्ड किया गया। गुरुवार को न्यूनतम 3.7 डिग्री और अधिकतम 20.4 डिग्री रहा, जबकि बुधवार को न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री और अधिकतम 16.5 डिग्री दर्ज हुआ। दिन में तापमान कम रहने से मौसम ड्राई बना हुआ है और सूखी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे तक इलाके में घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी काफी कम हो गई थी। करीब 11 बजे सूर्य देव ने दर्शन दिए और धूप निकलने से लोगों को थोड़ी राहत मिली। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पाला विशेष रूप से सरसों, आलू, मटर और सब्जियों को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। हल्की सिंचाई, धुआं करना या अन्य बचाव उपाय अपनाने से नुकसान को कुछ हद तक रोका जा सकता है, लेकिन लगातार कम तापमान से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।