'मनरेगा में बदलाव कर मजदूरों का हक छीना जा रहा'-जिलाध्यक्ष:कांग्रेस ने महात्मा गांधी योजनाओं में संशोधन का किया विरोध
केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजनाओं में बदलाव और रोजगार गारंटी व्यवस्था में संशोधन को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। सहरसा कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार झा ने शनिवार दोपहर कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए यह बात कही। राष्ट्रपिता का नाम हटाना देश के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण मुकेश कुमार झा ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाना देश के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार चाहे “जी राम जी” लाए या “घनश्याम जी”, कांग्रेस को इससे कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, महात्मा गांधी जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रपिता के नाम को हटाना देश की आत्मा पर प्रहार है। नई व्यवस्था लागू करना महात्मा गांधी का अपमान झा ने जोर देकर कहा कि महात्मा गांधी ने देश की आजादी के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। ऐसे महापुरुष के नाम को योजनाओं से हटाकर नई व्यवस्था लागू करना न केवल उनके योगदान का अपमान है, बल्कि यह देश की ऐतिहासिक विरासत को भी कमजोर करने वाला कदम है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन नई योजनाओं और नामों को लाया गया है, उनमें कई गंभीर खामियां हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने मनरेगा योजना में किए गए बदलावों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने बताया कि पहले केंद्र सरकार 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देती थी और इसके लिए 100 प्रतिशत राशि केंद्र द्वारा दी जाती थी, जिससे पंचायत स्तर पर मजदूरों को सुनिश्चित रूप से रोजगार मिलता था। केंद्र 60 प्रतिशत और राज्य सरकार को 40 प्रतिशत करेगी खर्च उन्होंने कहा कि अब सरकार ने न केवल रोजगार की गारंटी खत्म कर दी है, बल्कि फंडिंग पैटर्न भी बदल दिया है। अब केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार को 40 प्रतिशत राशि खर्च करनी होगी। झा ने सवाल उठाया कि बिहार जैसे गरीब और पिछड़े राज्य के लिए 40 प्रतिशत राशि जुटाना आसान नहीं होगा, जिससे आवेदन करने के बावजूद मजदूरों को काम नहीं मिलेगा। मुकेश कुमार झा ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार की मंशा बिहार को “लेबर फैक्ट्री” बनाने की है, ताकि यहां के मजदूर गुजरात, अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में पलायन करने को मजबूर हों। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और चरणबद्ध तरीके से 25 फरवरी तक सरकार के खिलाफ आंदोलन करेगी।
केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजनाओं में बदलाव और रोजगार गारंटी व्यवस्था में संशोधन को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। सहरसा कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार झा ने शनिवार दोपहर कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए यह बात कही। राष्ट्रपिता का नाम हटाना देश के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण मुकेश कुमार झा ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाना देश के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार चाहे “जी राम जी” लाए या “घनश्याम जी”, कांग्रेस को इससे कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, महात्मा गांधी जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रपिता के नाम को हटाना देश की आत्मा पर प्रहार है। नई व्यवस्था लागू करना महात्मा गांधी का अपमान झा ने जोर देकर कहा कि महात्मा गांधी ने देश की आजादी के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। ऐसे महापुरुष के नाम को योजनाओं से हटाकर नई व्यवस्था लागू करना न केवल उनके योगदान का अपमान है, बल्कि यह देश की ऐतिहासिक विरासत को भी कमजोर करने वाला कदम है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन नई योजनाओं और नामों को लाया गया है, उनमें कई गंभीर खामियां हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने मनरेगा योजना में किए गए बदलावों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने बताया कि पहले केंद्र सरकार 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देती थी और इसके लिए 100 प्रतिशत राशि केंद्र द्वारा दी जाती थी, जिससे पंचायत स्तर पर मजदूरों को सुनिश्चित रूप से रोजगार मिलता था। केंद्र 60 प्रतिशत और राज्य सरकार को 40 प्रतिशत करेगी खर्च उन्होंने कहा कि अब सरकार ने न केवल रोजगार की गारंटी खत्म कर दी है, बल्कि फंडिंग पैटर्न भी बदल दिया है। अब केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार को 40 प्रतिशत राशि खर्च करनी होगी। झा ने सवाल उठाया कि बिहार जैसे गरीब और पिछड़े राज्य के लिए 40 प्रतिशत राशि जुटाना आसान नहीं होगा, जिससे आवेदन करने के बावजूद मजदूरों को काम नहीं मिलेगा। मुकेश कुमार झा ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार की मंशा बिहार को “लेबर फैक्ट्री” बनाने की है, ताकि यहां के मजदूर गुजरात, अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में पलायन करने को मजबूर हों। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और चरणबद्ध तरीके से 25 फरवरी तक सरकार के खिलाफ आंदोलन करेगी।