मनरेगा का नाम बदलने पर सोनीपत में कांग्रेस की प्रैसवार्ता:विधानसभा घेराव और देशव्यापी रैलियों तक कार्यक्रम तय; राम नाम के दुरुपयोग कर रही भाजपा
मनरेगा बचाओ अभियान के तहत कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसी क्रम में सोनीपत के कांग्रेस भवन में भी प्रेसवार्ता हुई, जिसकी अगुआई कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद धर्मपाल मलिक ने की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बरोदा विधायक इंदु राज भालू, जिलाध्यक्ष कमल दीवान, ग्रामीण जिलाध्यक्ष संजीव दहिया, पूर्व विधायक जगबीर मलिक और पूर्व विधायक खरखौदा जयवीर वाल्मीकि मौजूद रहे। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा के नाम और प्रावधानों में किए गए बदलावों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।
मनरेगा कांग्रेस सरकार की देन : धर्मपाल मलिक
अनुशासनात्मक समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद धर्मपाल मलिक ने कहा कि वर्ष 2005 में कांग्रेस सरकार के दौरान मनरेगा अधिनियम पास किया गया था। इस कानून के लागू होने से ग्रामीण मजदूरों को रोजगार का कानूनी अधिकार मिला और मजदूरी की गारंटी शुरू हुई। मनरेगा ने गांवों में रोजगार उपलब्ध कराकर लाखों परिवारों को आर्थिक संबल दिया। भाजपा पर महात्मा गांधी के नाम से नफरत का आरोप
धर्मपाल मलिक ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को महात्मा गांधी का नाम पसंद नहीं है। उन्होंने कहा कि 2025 में मनरेगा कानून में बदलाव कर उसका नाम बदल दिया गया, जो भाजपा की सोच और नीयत को दर्शाता है। उनका कहना था कि किसी भी कानून में संशोधन हो सकता है, लेकिन नाम बदलना असामान्य है।
मनरेगा का नाम बदलकर “जी राम जी” किए जाने का विरोध
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाकर उसे “विकसित भारत रोजगार आजीविका गारंटी मिशन (जी राम जी)” कर दिया गया है। धर्मपाल मलिक ने इसे काम के अधिकार पर सीधा हमला बताया और कहा कि कांग्रेस द्वारा दोबारा स्थापित किए गए मनरेगा के मूल स्वरूप को खत्म करने की साजिश की जा रही है।
100 दिन के काम की गारंटी कमजोर करने का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत हर परिवार को 100 दिन काम की कानूनी गारंटी थी। अब भाजपा सरकार ने बदलाव कर इस गारंटी को कमजोर करने का काम किया है, जिससे ग्रामीण मजदूरों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
राज्य सरकार पर 40% बोझ डालकर योजना बंद करने की साजिश
धर्मपाल मलिक ने कहा कि पहले मनरेगा का लगभग 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार पर डाल दिया गया है। पहले से कर्ज में डूबे राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डालकर मनरेगा को धीरे-धीरे बंद करने का उद्देश्य है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा बचाओ अभियान के तहत कई मांगें रखीं।
100 दिन नहीं बल्कि काम की पक्की कानूनी गारंटी
मजदूरी तय हो और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए
भ्रष्टाचार और देरी पर सख्त कार्रवाई
मनरेगा में किए गए सभी बदलाव तुरंत वापस हों
न्यूनतम मजदूरी ₹400 प्रतिदिन की जाए
आंदोलन की चरणबद्ध रणनीति घोषित
धर्मपाल मलिक ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा के नाम की वापसी और अन्य मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई है।
पहले दिन देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस
11 जनवरी को सुबह 11 से शाम 4 बजे तक भूख हड़ताल
12 से 29 जनवरी तक वार्ड और ग्राम पंचायत स्तर पर जनसंपर्क
31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तर पर धरने
7 से 15 फरवरी तक राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव
16 से 25 फरवरी तक देशव्यापी विरोध रैलियां
उन्होंने कहा कि जब तक कानून वापस नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।
जगबीर मलिक का बयान : राम के नाम पर धोखा
पूर्व विधायक जगबीर मलिक ने कहा कि राम एक किसान थे और किसान काम शुरू करने से पहले राम जी का नाम लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने राम के नाम का इस्तेमाल कर किसानों और मजदूरों के साथ धोखा किया है। उनका कहना था कि भाजपा 125 दिन काम का दावा करती है, जबकि वास्तव में केवल 36 दिन काम दिया गया।
डिजिटलाइजेशन के नाम पर किसानों को परेशान करने का आरोप
जगबीर मलिक ने कहा कि डिजिटलाइजेशन के नाम पर किसानों के पोर्टल बनाए गए, लेकिन इससे पारदर्शिता नहीं आई। उल्टा किसानों और मजदूरों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बरोदा विधायक इंदु राज भालू का बयान
बरोदा विधायक इंदु राज भालू ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में बैठे नेताओं से बड़ा राम भक्त कोई नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने राम के नाम का दुरुपयोग किया है। ‘जी राम जी’ नामकरण को उन्होंने भगवान श्रीराम के नाम का अपमान बताया।
इंदु राज भालू ने कहा कि केवल नाम ही नहीं बदला गया, बल्कि मनरेगा के काम को भी बंद किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में यह योजना उसी तरह खत्म हो जाएगी, जैसे 15 लाख रुपए खातों में आने का वादा किया गया था। भालू ने कहा कि किसान आंदोलन की तर्ज पर मनरेगा मजदूरों का भी बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इसके लिए गांव-गांव जाकर मजदूरों को जोड़ा जाएगा और उनके हक की लड़ाई लड़ी
मनरेगा बचाओ अभियान के तहत कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसी क्रम में सोनीपत के कांग्रेस भवन में भी प्रेसवार्ता हुई, जिसकी अगुआई कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद धर्मपाल मलिक ने की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बरोदा विधायक इंदु राज भालू, जिलाध्यक्ष कमल दीवान, ग्रामीण जिलाध्यक्ष संजीव दहिया, पूर्व विधायक जगबीर मलिक और पूर्व विधायक खरखौदा जयवीर वाल्मीकि मौजूद रहे। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा के नाम और प्रावधानों में किए गए बदलावों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।
मनरेगा कांग्रेस सरकार की देन : धर्मपाल मलिक
अनुशासनात्मक समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद धर्मपाल मलिक ने कहा कि वर्ष 2005 में कांग्रेस सरकार के दौरान मनरेगा अधिनियम पास किया गया था। इस कानून के लागू होने से ग्रामीण मजदूरों को रोजगार का कानूनी अधिकार मिला और मजदूरी की गारंटी शुरू हुई। मनरेगा ने गांवों में रोजगार उपलब्ध कराकर लाखों परिवारों को आर्थिक संबल दिया। भाजपा पर महात्मा गांधी के नाम से नफरत का आरोप
धर्मपाल मलिक ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को महात्मा गांधी का नाम पसंद नहीं है। उन्होंने कहा कि 2025 में मनरेगा कानून में बदलाव कर उसका नाम बदल दिया गया, जो भाजपा की सोच और नीयत को दर्शाता है। उनका कहना था कि किसी भी कानून में संशोधन हो सकता है, लेकिन नाम बदलना असामान्य है।
मनरेगा का नाम बदलकर “जी राम जी” किए जाने का विरोध
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाकर उसे “विकसित भारत रोजगार आजीविका गारंटी मिशन (जी राम जी)” कर दिया गया है। धर्मपाल मलिक ने इसे काम के अधिकार पर सीधा हमला बताया और कहा कि कांग्रेस द्वारा दोबारा स्थापित किए गए मनरेगा के मूल स्वरूप को खत्म करने की साजिश की जा रही है।
100 दिन के काम की गारंटी कमजोर करने का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत हर परिवार को 100 दिन काम की कानूनी गारंटी थी। अब भाजपा सरकार ने बदलाव कर इस गारंटी को कमजोर करने का काम किया है, जिससे ग्रामीण मजदूरों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
राज्य सरकार पर 40% बोझ डालकर योजना बंद करने की साजिश
धर्मपाल मलिक ने कहा कि पहले मनरेगा का लगभग 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार पर डाल दिया गया है। पहले से कर्ज में डूबे राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डालकर मनरेगा को धीरे-धीरे बंद करने का उद्देश्य है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा बचाओ अभियान के तहत कई मांगें रखीं।
100 दिन नहीं बल्कि काम की पक्की कानूनी गारंटी
मजदूरी तय हो और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए
भ्रष्टाचार और देरी पर सख्त कार्रवाई
मनरेगा में किए गए सभी बदलाव तुरंत वापस हों
न्यूनतम मजदूरी ₹400 प्रतिदिन की जाए
आंदोलन की चरणबद्ध रणनीति घोषित
धर्मपाल मलिक ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा के नाम की वापसी और अन्य मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई है।
पहले दिन देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस
11 जनवरी को सुबह 11 से शाम 4 बजे तक भूख हड़ताल
12 से 29 जनवरी तक वार्ड और ग्राम पंचायत स्तर पर जनसंपर्क
31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तर पर धरने
7 से 15 फरवरी तक राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव
16 से 25 फरवरी तक देशव्यापी विरोध रैलियां
उन्होंने कहा कि जब तक कानून वापस नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।
जगबीर मलिक का बयान : राम के नाम पर धोखा
पूर्व विधायक जगबीर मलिक ने कहा कि राम एक किसान थे और किसान काम शुरू करने से पहले राम जी का नाम लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने राम के नाम का इस्तेमाल कर किसानों और मजदूरों के साथ धोखा किया है। उनका कहना था कि भाजपा 125 दिन काम का दावा करती है, जबकि वास्तव में केवल 36 दिन काम दिया गया।
डिजिटलाइजेशन के नाम पर किसानों को परेशान करने का आरोप
जगबीर मलिक ने कहा कि डिजिटलाइजेशन के नाम पर किसानों के पोर्टल बनाए गए, लेकिन इससे पारदर्शिता नहीं आई। उल्टा किसानों और मजदूरों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बरोदा विधायक इंदु राज भालू का बयान
बरोदा विधायक इंदु राज भालू ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में बैठे नेताओं से बड़ा राम भक्त कोई नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने राम के नाम का दुरुपयोग किया है। ‘जी राम जी’ नामकरण को उन्होंने भगवान श्रीराम के नाम का अपमान बताया।
इंदु राज भालू ने कहा कि केवल नाम ही नहीं बदला गया, बल्कि मनरेगा के काम को भी बंद किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में यह योजना उसी तरह खत्म हो जाएगी, जैसे 15 लाख रुपए खातों में आने का वादा किया गया था। भालू ने कहा कि किसान आंदोलन की तर्ज पर मनरेगा मजदूरों का भी बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इसके लिए गांव-गांव जाकर मजदूरों को जोड़ा जाएगा और उनके हक की लड़ाई लड़ी