बृजभूषण बोले- यह कमेटी का नहीं मंत्रालय का निर्णय है:गोंडा में एक समाज को शोषित और एक समाज को पीड़ित मान लिया गया है
गोंडा के कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर यूजीसी बिल को लेकर बयान दिया है उन्होंने कहा कि यह बिल किसी कमेटी का नहीं, बल्कि मंत्रालय का निर्णय है। बृजभूषण ने स्पष्ट किया कि उनके बेटे सांसद करण भूषण उस कमेटी का हिस्सा नहीं थे, जिसने इस बिल पर निर्णय लिया है। बृजभूषण शरण सिंह ने आगे कहा कि इस बिल के खिलाफ अब अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग समाज के बच्चे भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश का माहौल खराब हो चुका है और इसे खराब नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, इस बिल को लेकर पूरे देश में बड़ा आक्रोश है। पूर्व सांसद ने बताया कि उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए अपने गांव को चुना। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से देखते आ रहे हैं कि गांव के छोटे बच्चे, जिनमें दलित और पिछड़े समाज के बच्चे भी शामिल हैं, लगभग प्रतिदिन उनके बच्चों के साथ खेलते हैं। उन्होंने दिल्ली में कुछ बुद्धिजीवियों से इस बिल को समझने की कोशिश की। बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बयान में कहा कि यह बिल एकतरफा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें एक समाज को शोषित और दूसरे समाज को पीड़ित मान लिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि शोषित समाज का कोई भी प्रतिनिधि उस कमेटी में शामिल नहीं था, जिसने इस बिल पर निर्णय लिया। बृजभूषण शरण सिंह के अनुसार, यह बिल समाज को बांटने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें बिल लाने की मंशा मालूम नहीं है, लेकिन इससे समाज में तनाव पैदा हो रहा है। उन्होंने अपील की कि ओबीसी और दलित समाज के उन बच्चों को भी आगे आना चाहिए जो इस स्थिति को समझते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल सवर्ण समाज की नहीं, बल्कि पूरे समाज की पीड़ा है।
गोंडा के कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर यूजीसी बिल को लेकर बयान दिया है उन्होंने कहा कि यह बिल किसी कमेटी का नहीं, बल्कि मंत्रालय का निर्णय है। बृजभूषण ने स्पष्ट किया कि उनके बेटे सांसद करण भूषण उस कमेटी का हिस्सा नहीं थे, जिसने इस बिल पर निर्णय लिया है। बृजभूषण शरण सिंह ने आगे कहा कि इस बिल के खिलाफ अब अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग समाज के बच्चे भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश का माहौल खराब हो चुका है और इसे खराब नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, इस बिल को लेकर पूरे देश में बड़ा आक्रोश है। पूर्व सांसद ने बताया कि उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए अपने गांव को चुना। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से देखते आ रहे हैं कि गांव के छोटे बच्चे, जिनमें दलित और पिछड़े समाज के बच्चे भी शामिल हैं, लगभग प्रतिदिन उनके बच्चों के साथ खेलते हैं। उन्होंने दिल्ली में कुछ बुद्धिजीवियों से इस बिल को समझने की कोशिश की। बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बयान में कहा कि यह बिल एकतरफा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें एक समाज को शोषित और दूसरे समाज को पीड़ित मान लिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि शोषित समाज का कोई भी प्रतिनिधि उस कमेटी में शामिल नहीं था, जिसने इस बिल पर निर्णय लिया। बृजभूषण शरण सिंह के अनुसार, यह बिल समाज को बांटने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें बिल लाने की मंशा मालूम नहीं है, लेकिन इससे समाज में तनाव पैदा हो रहा है। उन्होंने अपील की कि ओबीसी और दलित समाज के उन बच्चों को भी आगे आना चाहिए जो इस स्थिति को समझते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल सवर्ण समाज की नहीं, बल्कि पूरे समाज की पीड़ा है।