प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद शर्मा को हाईकोर्ट से झटका, याचिका खारिज:FIR रद्द करने की मांग ठुकराई, सरकार ने किया कड़ा विरोध, करोड़ों की जमीन पर किया कब्जा
करोड़ों रुपए की जमीन पर कब्जे के आरोपों में घिरे जयपुर के चर्चित प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद शर्मा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी FIR रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया था, जिसके बाद कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस उमाशंकर व्यास ने प्रमोद शर्मा और अन्य सह आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अभी मामले में जांच प्रारंभिक स्टेज पर है। पुलिस ने आरोपियों को केवल अपने पक्ष के दस्तावेज पेश करने और बयान दर्ज कराने का नोटिस दिया है। इस स्टेज पर एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता है। वहीं प्रमोद शर्मा की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एसएस होरा ने कहा कि यह सिविल नेचर का मैटर है, इसमें एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती है। वहीं आरोपी के खिलाफ कोई अपराध भी नहीं बनता है। करोड़ों की भूमि पर किया जबरन कब्जा परिवादी घनश्याम शर्मा की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता माधव मित्र और अधिवक्ता गिर्राज प्रसाद शर्मा ने कहा कि आरोपियों ने मानसरोवर इलाके में करीब साढ़े 7 हजार वर्ग गज जमीन पर जबरन कब्जा किया है। प्रमोद शर्मा सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ 13 जुलाई 2025 को मानसरोवर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिसमें पुलिस ने 15 अप्रेल और 17 अप्रेल 2026 को प्रमोद शर्मा को जांच में सहयोग करने के लिए पेश होने का नोटिस दिया था। केवल कथित गिरफ्तारी के डर से प्रमोद शर्मा ने अदालत में याचिका दायर कर दी, जो इस स्टेज पर खारिज करने योग्य है। जमीन पर सिविल कोर्ट का स्टे अधिवक्ता गिर्राज प्रसाद शर्मा ने बताया कि इस जमीन पर पथिक गृह निर्माण सहकारी समिति और नवजीवन गृह निर्माण सहकारी समिति के बीच विवाद है। जमीन पर पथिक गृह निर्माण सहकारी समिति काबिज थी। जिस पर सिविल कोर्ट का लंबे समय से स्टे चल रहा है। परिवादी इसी समिति का अध्यक्ष है। लेकिन प्रमोद शर्मा ने नवजीवन गृह निर्माण सहकारी समिति के साथ मिलकर जमीन पर जबरन कब्जा किया है, जो सिविल कोर्ट की भी अवमानना है।



