पंचकूला में गिद्ध संरक्षण को लेकर देशभर के विशेषज्ञ जुटे:केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव बोले- संकट से उबरने की राह पर देश के 'कुदरती सफाईकर्मी'

अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस-2026 के अवसर पर रविवार को पंचकूला में 'फ्रॉम क्राइसिस टू रिकवरी-कंजर्विंग इंडियाज वल्चर्स' विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में देशभर से आए पर्यावरणविदों, वन्यजीव विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। कार्यशाला में गिद्धों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करने के साथ ही उनके संरक्षण, उनके सामने मौजूद चुनौतियों और उन्हें बचाने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा की गई। पारिस्थितिकी तंत्र का चक्र बनाए रखने के लिए संरक्षण जरूरी संबोधन के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि गिद्ध पर्यावरण के 'कुदरती सफाईकर्मी' हैं। ये मृत पशुओं के अवशेषों को तेजी से निस्तारित कर बीमारियों और संक्रमण को फैलने से रोकते हैं। जैव विविधता और एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए इनकी आबादी को पुनः समृद्ध करना बेहद अहम है। संरक्षण के प्रयासों में तेजी लाने पर बल कार्यशाला में विभिन्न राज्यों में चलाए जा रहे संरक्षण कार्यक्रमों, सुरक्षित प्रजनन केंद्रों की स्थिति और हानिकारक दवाओं (जैसे डाइक्लोफेनाक आदि) पर लगाए गए प्रतिबंध के असर पर चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और विशेषज्ञों ने भारत में गिद्धों को संकट से उबारकर पुनर्वास की ओर ले जाने के लिए सामूहिक प्रयासों और जनजागरूकता पर विशेष बल दिया।

Sep 6, 2026 - 11:07
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पंचकूला में गिद्ध संरक्षण को लेकर देशभर के विशेषज्ञ जुटे:केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव बोले- संकट से उबरने की राह पर देश के 'कुदरती सफाईकर्मी'
अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस-2026 के अवसर पर रविवार को पंचकूला में 'फ्रॉम क्राइसिस टू रिकवरी-कंजर्विंग इंडियाज वल्चर्स' विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में देशभर से आए पर्यावरणविदों, वन्यजीव विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। कार्यशाला में गिद्धों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करने के साथ ही उनके संरक्षण, उनके सामने मौजूद चुनौतियों और उन्हें बचाने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा की गई। पारिस्थितिकी तंत्र का चक्र बनाए रखने के लिए संरक्षण जरूरी संबोधन के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि गिद्ध पर्यावरण के 'कुदरती सफाईकर्मी' हैं। ये मृत पशुओं के अवशेषों को तेजी से निस्तारित कर बीमारियों और संक्रमण को फैलने से रोकते हैं। जैव विविधता और एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए इनकी आबादी को पुनः समृद्ध करना बेहद अहम है। संरक्षण के प्रयासों में तेजी लाने पर बल कार्यशाला में विभिन्न राज्यों में चलाए जा रहे संरक्षण कार्यक्रमों, सुरक्षित प्रजनन केंद्रों की स्थिति और हानिकारक दवाओं (जैसे डाइक्लोफेनाक आदि) पर लगाए गए प्रतिबंध के असर पर चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और विशेषज्ञों ने भारत में गिद्धों को संकट से उबारकर पुनर्वास की ओर ले जाने के लिए सामूहिक प्रयासों और जनजागरूकता पर विशेष बल दिया।