हरियाणा के वर्कस्लिप घोटाले में CM का एक्शन:बचे 9 जिलों में भी जांच पूरी करने के निर्देश; जल्द फैसला लेगी सरकार, विज बोले- हम घोटाले छिपाते नहीं
हरियाणा के 1500 करोड़ रुपए के वर्क स्लिप घोटाले पर अब मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्शन लिया है। सीएम सैनी ने बचे नौ जिलों में भी जांच के आदेश दे दिए हैं। इसकी पुष्टि खुद श्रम मंत्री अनिल विज ने की है। उन्होंने बताया कि हाईलेवल जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री जी को लिखा है और मुख्यमंत्री जी ने आदेश भी दे दिए कि शेष नौ जिलो में भी तुरंत जांच पूरी की जाए ताकि इस मामले में कोई फैसला लिया जा सके"। ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने श्रम विभाग में वर्कस्लिप घोटाले मामले कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला द्वारा सरकार पर घोटाले के आरोप लगाने पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि “सुरजेवाला जी हम आप लोगों की तरह घोटालों को छिपाते नहीं है, घोटाला हुआ है, उजागर हुआ है और उसकी हाईलेवल जांच कराई जा रही है। विज ने खुद किया घोटाला उजागर कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने दो दिन पहले बताया था कि हाल ही में उन्होंने बोर्ड की एक मीटिंग की थी। इस मीटिंग में बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति में गड़बड़ियां पाई गईं, साथ ही निर्माण श्रमिकों को योजनाओं का लाभ देने में भी गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद उन्होंने तुरंत जांच के आदेश दे दिए। तब सामने आया कि ये गड़बड़ी 6 जिलों में हुई है। गड़बड़ी सामने आने के बाद वर्क स्लिप की वेरिफिकेशन मंत्री अनिल विज ने बताया कि शुरू में हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी जिलों में जांच की गई, जहां बहुत सारी गड़बड़ियां मिलीं। इसके बाद, राज्य के सभी जिलों के DC को कहा गया कि वे जिला स्तर पर समितियां बनाएं। इन समितियों में श्रम विभाग के अधिकारी और तीन अन्य अधिकारी शामिल थे।ये समितियां अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच जारी की गई ऑनलाइन वर्क स्लिप (काम करने का प्रमाण) की जांच कर रही हैं। यह जांच लगभग 4 महीने पहले शुरू हुई थी और अब तक 13 जिलों में 100% जांच पूरी हो चुकी है। 5.46 लाख वर्क स्लिप अवैध मिली अनिल विज ने आगे बताया कि इन 13 जिलों में कुल 5 लाख 99 हजार 758 वर्क स्लिप जारी की गई थीं, जिनमें से सिर्फ 53 हजार 249 ही सही पाई गईं। बाकी 5 लाख 46 हजार 509 वर्क स्लिप गलत निकलीं। इसी तरह, कुल 2 लाख 21 हजार 517 मजदूरों के नाम दर्ज थे, लेकिन जांच के बाद सिर्फ 14 हजार 240 ही सही पाए गए, जबकि 1 लाख 93 हजार 756 मजदूरों के नाम फर्जी निकले। इसका मतलब है कि बहुत बड़ी संख्या में गलत वर्क स्लिप और फर्जी मजदूरों के नाम दर्ज किए गए थे। पूरे गांव के लोगों का फर्जी रजिस्ट्रेशन अनिल विज ने कहा कि यह साफ हो गया है कि कई जगहों पर पूरे के पूरे गांव के लोगों ने फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन कराया और वर्क स्लिप बनवाई, ताकि जो लोग योजनाओं के हकदार नहीं हैं, वे भी सरकारी योजनाओं का फायदा उठा सकें। एक मजदूर को अलग-अलग योजनाओं से लगभग 2.5 लाख रुपए तक का फायदा मिलता है, जिससे सरकार को बहुत नुकसान हो रहा है। यह सीधे-सीधे लूट है और सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। नए आवेदन स्वीकार न करने के निर्देश विज ने कहा कि जांच करने वाली समितियां हर चीज की जांच कर रही हैं, जैसे कि काम करने की जगह असली है या नहीं, मजदूर काम में शामिल था या नहीं, मालिक कौन है। जांच के दौरान सेवा का अधिकार की समय-सीमा रोक दी गई है, सरल केंद्रों को नए आवेदन स्वीकार न करने के लिए कहा गया है, और सभी शिकायत सुनने वाले प्लेटफार्मों को जरूरी जानकारी दे दी गई है। जो पेंशन योजनाएं पहले से ही मंजूर हो चुकी हैं, उन्हें नहीं रोका गया है, लेकिन मृत्यु, दुर्घटना और अंतिम संस्कार में मदद जैसी योजनाओं का लाभ जल्दी से जल्दी दिया जा रहा है।
हरियाणा के 1500 करोड़ रुपए के वर्क स्लिप घोटाले पर अब मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्शन लिया है। सीएम सैनी ने बचे नौ जिलों में भी जांच के आदेश दे दिए हैं। इसकी पुष्टि खुद श्रम मंत्री अनिल विज ने की है। उन्होंने बताया कि हाईलेवल जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री जी को लिखा है और मुख्यमंत्री जी ने आदेश भी दे दिए कि शेष नौ जिलो में भी तुरंत जांच पूरी की जाए ताकि इस मामले में कोई फैसला लिया जा सके"। ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने श्रम विभाग में वर्कस्लिप घोटाले मामले कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला द्वारा सरकार पर घोटाले के आरोप लगाने पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि “सुरजेवाला जी हम आप लोगों की तरह घोटालों को छिपाते नहीं है, घोटाला हुआ है, उजागर हुआ है और उसकी हाईलेवल जांच कराई जा रही है। विज ने खुद किया घोटाला उजागर कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने दो दिन पहले बताया था कि हाल ही में उन्होंने बोर्ड की एक मीटिंग की थी। इस मीटिंग में बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति में गड़बड़ियां पाई गईं, साथ ही निर्माण श्रमिकों को योजनाओं का लाभ देने में भी गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद उन्होंने तुरंत जांच के आदेश दे दिए। तब सामने आया कि ये गड़बड़ी 6 जिलों में हुई है। गड़बड़ी सामने आने के बाद वर्क स्लिप की वेरिफिकेशन मंत्री अनिल विज ने बताया कि शुरू में हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी जिलों में जांच की गई, जहां बहुत सारी गड़बड़ियां मिलीं। इसके बाद, राज्य के सभी जिलों के DC को कहा गया कि वे जिला स्तर पर समितियां बनाएं। इन समितियों में श्रम विभाग के अधिकारी और तीन अन्य अधिकारी शामिल थे।ये समितियां अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच जारी की गई ऑनलाइन वर्क स्लिप (काम करने का प्रमाण) की जांच कर रही हैं। यह जांच लगभग 4 महीने पहले शुरू हुई थी और अब तक 13 जिलों में 100% जांच पूरी हो चुकी है। 5.46 लाख वर्क स्लिप अवैध मिली अनिल विज ने आगे बताया कि इन 13 जिलों में कुल 5 लाख 99 हजार 758 वर्क स्लिप जारी की गई थीं, जिनमें से सिर्फ 53 हजार 249 ही सही पाई गईं। बाकी 5 लाख 46 हजार 509 वर्क स्लिप गलत निकलीं। इसी तरह, कुल 2 लाख 21 हजार 517 मजदूरों के नाम दर्ज थे, लेकिन जांच के बाद सिर्फ 14 हजार 240 ही सही पाए गए, जबकि 1 लाख 93 हजार 756 मजदूरों के नाम फर्जी निकले। इसका मतलब है कि बहुत बड़ी संख्या में गलत वर्क स्लिप और फर्जी मजदूरों के नाम दर्ज किए गए थे। पूरे गांव के लोगों का फर्जी रजिस्ट्रेशन अनिल विज ने कहा कि यह साफ हो गया है कि कई जगहों पर पूरे के पूरे गांव के लोगों ने फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन कराया और वर्क स्लिप बनवाई, ताकि जो लोग योजनाओं के हकदार नहीं हैं, वे भी सरकारी योजनाओं का फायदा उठा सकें। एक मजदूर को अलग-अलग योजनाओं से लगभग 2.5 लाख रुपए तक का फायदा मिलता है, जिससे सरकार को बहुत नुकसान हो रहा है। यह सीधे-सीधे लूट है और सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। नए आवेदन स्वीकार न करने के निर्देश विज ने कहा कि जांच करने वाली समितियां हर चीज की जांच कर रही हैं, जैसे कि काम करने की जगह असली है या नहीं, मजदूर काम में शामिल था या नहीं, मालिक कौन है। जांच के दौरान सेवा का अधिकार की समय-सीमा रोक दी गई है, सरल केंद्रों को नए आवेदन स्वीकार न करने के लिए कहा गया है, और सभी शिकायत सुनने वाले प्लेटफार्मों को जरूरी जानकारी दे दी गई है। जो पेंशन योजनाएं पहले से ही मंजूर हो चुकी हैं, उन्हें नहीं रोका गया है, लेकिन मृत्यु, दुर्घटना और अंतिम संस्कार में मदद जैसी योजनाओं का लाभ जल्दी से जल्दी दिया जा रहा है।