रामायण विश्वविद्यालय में 35 फीट ऊंची श्रीराम प्रतिमा का अनावरण

Ramayana University Ayodhya: महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा के अनावरण तथा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित आधुनिक शिक्षा विषय पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

Jan 17, 2026 - 22:03
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रामायण विश्वविद्यालय में 35 फीट ऊंची श्रीराम प्रतिमा का अनावरण


Ramayana University Ayodhya: महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा के अनावरण तथा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित आधुनिक शिक्षा विषय पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रशासनिक भवन के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थापित 35 फीट ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा के अनावरण के साथ हुई। प्रतिमा का अनावरण राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बटन दबाकर किया। इस अवसर पर वैदिक छात्रों द्वारा रामरक्षा स्तोत्र के सामूहिक पाठ से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।

 

यह विश्वविद्यालय 500 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विकसित किया जा रहा है और इसे पूरी तरह हाईटेक स्वरूप प्रदान किया गया है। अयोध्या क्षेत्र में भगवान श्रीराम की इतनी ऊंची प्रतिमा कहीं और स्थापित नहीं है। प्रशासनिक भवन के शीर्ष पर स्थापित यह प्रतिमा अब विश्वविद्यालय की पहचान बन चुकी है, जो परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।

 

विश्वविद्यालय विकास का सशक्त केन्द्र : कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि रामायण विश्वविद्यालय केवल उपाधियां देने वाला संस्थान नहीं है, बल्कि यह मानव विकास का एक सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में वास्तविक ऊंचाई भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों से प्राप्त की जा सकती है।

 

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि माननीय राज्यपाल के मार्गदर्शन और सहयोग से यह विश्वविद्यालय भारतीय सोच और आधुनिक शिक्षा का संतुलित मॉडल बनेगा। यहां विद्यार्थी केवल डिग्री प्राप्त नहीं करेंगे, बल्कि तकनीकी ज्ञान, शोध क्षमता और जीवन मूल्यों के साथ आगे बढ़ेंगे। विश्वविद्यालय का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा और तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्तर तक पहुंचाना है।

संस्कृति और तकनीक एक साथ : अयोध्या के महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि रामायण विश्वविद्यालय यह उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है कि संस्कृति और तकनीक किस प्रकार एक साथ आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की प्रतिमा का प्रभाव केवल परिसर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह विद्यार्थियों के चरित्र और प्रतिभा में भी दिखाई देगा।

 

उत्तर प्रदेश प्राचार्य संघ के अध्यक्ष डॉ. मणि शंकर तिवारी ने कहा कि यह विश्वविद्यालय भविष्य में शिक्षा का नया मॉडल बनेगा, जहां तकनीक के साथ-साथ चरित्र निर्माण और वैचारिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज की आवश्यकता ऐसी शिक्षा की है जो रोजगार, शोध और जीवन तीनों में उपयोगी हो।

 

कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भानु प्रताप सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव, ट्रस्टी एवं गवर्निंग बॉडी सदस्य राहुल भारद्वाज, पंकज शर्मा, कुलपति भानु प्रताप सिंह, कुलसचिव गिरीश छिमवाल, मुख्य वित्त अधिकारी वरुण श्रीवास्तव, आलोक प्रकाश श्रीवास्तव, डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनय कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala