भागलपुर में शीतलहर से जनजीवन को प्रभावित:फल बाजार में सन्नाटा, कारोबारियों की चिंता बढ़ी; कहा- 100 रुपए कमाना भी मुश्किल हो रहा है
भागलपुर में पिछले 10 दिनों से जारी शीतलहर ने आम जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने घने कोहरे और कोल्ड डे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कड़ाके की ठंड, सर्द हवाओं और गिरते तापमान के कारण फल बाजारों में रौनक गायब हो गई है। ग्राहकों की कमी से स्टॉल सूने पड़े हैं, जिससे व्यवसायियों में चिंता बढ़ गई है। शीतलहर के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, जिसका सीधा असर फलों की बिक्री पर दिख रहा है। व्यवसायियों के अनुसार, ठंड में पहले भी बिक्री कम होती थी, लेकिन इस बार स्थिति बहुत खराब है। बाजार में ग्राहक न के बराबर आ रहे हैं। सेब, केला, अंगूर और संतरा जैसे फल स्टॉलों पर सजे हैं, लेकिन उनके खरीदार नहीं मिल रहे। बिक्री नहीं होने से रोजाना हो रहा आर्थिक नुकसान फल व्यवसायी दीपक कुमार साह ने बताया कि कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। पहले रोजाना अच्छी बिक्री होती थी, लेकिन अब 100 रुपए भी कमाना मुश्किल है। दिनभर दुकान पर बैठने के बाद भी खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि फल जल्दी खराब हो जाते हैं। ज्यादा दिन रहने से फल सड़ने लगते हैं। जिससे रोजाना आर्थिक नुकसान हो रहा है। व्यवसायियों का कहना है कि प्रतिदिन मंडी से महंगे दामों पर फल खरीदते हैं। किराया, मजदूरी और दुकान का खर्च निकालना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई छोटे फल विक्रेता कर्ज लेकर अपना कारोबार चलाते हैं, लेकिन बिक्री ठप होने से कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है। कुछ व्यवसायियों ने नुकसान कम करने के लिए फलों की खरीद कम कर दी है, लेकिन इससे भी उनकी आय प्रभावित हो रही है।
भागलपुर में पिछले 10 दिनों से जारी शीतलहर ने आम जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने घने कोहरे और कोल्ड डे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कड़ाके की ठंड, सर्द हवाओं और गिरते तापमान के कारण फल बाजारों में रौनक गायब हो गई है। ग्राहकों की कमी से स्टॉल सूने पड़े हैं, जिससे व्यवसायियों में चिंता बढ़ गई है। शीतलहर के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, जिसका सीधा असर फलों की बिक्री पर दिख रहा है। व्यवसायियों के अनुसार, ठंड में पहले भी बिक्री कम होती थी, लेकिन इस बार स्थिति बहुत खराब है। बाजार में ग्राहक न के बराबर आ रहे हैं। सेब, केला, अंगूर और संतरा जैसे फल स्टॉलों पर सजे हैं, लेकिन उनके खरीदार नहीं मिल रहे। बिक्री नहीं होने से रोजाना हो रहा आर्थिक नुकसान फल व्यवसायी दीपक कुमार साह ने बताया कि कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। पहले रोजाना अच्छी बिक्री होती थी, लेकिन अब 100 रुपए भी कमाना मुश्किल है। दिनभर दुकान पर बैठने के बाद भी खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि फल जल्दी खराब हो जाते हैं। ज्यादा दिन रहने से फल सड़ने लगते हैं। जिससे रोजाना आर्थिक नुकसान हो रहा है। व्यवसायियों का कहना है कि प्रतिदिन मंडी से महंगे दामों पर फल खरीदते हैं। किराया, मजदूरी और दुकान का खर्च निकालना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई छोटे फल विक्रेता कर्ज लेकर अपना कारोबार चलाते हैं, लेकिन बिक्री ठप होने से कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है। कुछ व्यवसायियों ने नुकसान कम करने के लिए फलों की खरीद कम कर दी है, लेकिन इससे भी उनकी आय प्रभावित हो रही है।