जहां नहीं रुके राम, वहां नहीं रुके शिव:तैयारियों के बाद भी केसरिया में नहीं हो सका रात्री विश्राम, शिवलिंग को लाना पड़ा कैथवलिया
मोतिहारी के विराट रामायण मंदिर में स्थापित होने जा रहे विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग को लेकर एक अनोखी चर्चा हो रही है। यह चर्चा मोतिहारी के केसरिया से जुड़ी है, जहां मंदिर का निर्माण हो रहा है। बताया जा रहा है कि जब भगवान राम की बारात अयोध्या से जनकपुर जा रही थी, तब उसका केसरिया में रुकने का कार्यक्रम था। लेकिन बारात वहां नहीं रुकी। इसी तरह, जब विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग को विराट रामायण मंदिर में स्थापना के लिए लाया जा रहा था, तब उसे भी केसरिया में रोककर दर्शन-पूजन का प्लान था। हालांकि, ऐसी परिस्थितियां बनीं कि शिवलिंग को भी वहां रोका नहीं जा सका। इस संयोग को लेकर क्षेत्र में लोगों के बीच गहरी आस्था और चर्चा है। इसी कारण से शिवलिंग की स्थापना से पहले ही उसकी पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। विराट रामायण मंदिर निर्माण समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रशासन ने केसरिया के बीबीएस उत्सव मैरिज हॉल के पास शिवलिंग को रोकने की व्यवस्था की थी। योजना थी कि शिवलिंग को यहां रोककर लोगों के दर्शन के लिए रखा जाएगा, ताकि मंदिर में उसकी स्थापना की रणनीति बनाई जा सके। तैयारी के बाद भी केसरिया में नहीं हो सका रात्री विश्राम बीबीएस उत्सव मैरिज हॉल के मालिक अभय सिंह ने बताया कि उन्होंने पूरी तैयारी कर रखी थी। शिवलिंग उनके हॉल के पास पहुंचा और लगभग दो घंटे तक लोगों ने दर्शन-पूजन भी किया। हम बहुत खुश थे कि विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग हमारे यहां रुका। लेकिन इतनी अधिक भीड़ हो गई कि प्रशासन के लिए व्यवस्था संभालना मुश्किल हो गया। पूरा रास्ता जाम हो गया। बीबीएस उत्सव मैरेज हॉल के मालिक अभय सिंह बताते हैं कि अचानक ऐसी स्थिति बनी कि आनन फानन में प्रशासन ने वहां से शिवलिंग को आगे बढ़ाया। इस बात का दुख है कि केसरिया में शिवलिंग का रात्रि विश्राम प्लान होने के बावजूद भी शिव को यहां नहीं रखा जा सका। राम का बारात भी नहीं रुक पाया था इसे शिव की मर्जी कहें या कोई संयोग यह तो हमारे यहां के हजारों लोगों को समझ में नहीं आ रहा है। अब तो यही चर्चा हो रही है कि जहां राम की बारात रुकने के प्लान के बाद भी नहीं रुकी, वहां शिवलिंग को भी प्लान के बाद भी नहीं रोका जा सका। दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की देखिए झलक... केसरिया के विजय जायसवाल बताते है कि बड़े लोगों से यही सुना था कि अयोध्या से जनकपुर के लिए भगवान राम की बारात जब जा रही थी तो केसरिया में रुकना था। लेकिन किसी कारण बस बारात नहीं रुक पाई। अब संयोग ऐसा बना कि ठीक उसी प्रकार जब भगवान शिव का लिंग आ रहा था तो केसरिया में रात्रि विश्राम करना था। लेकिन एक घंटे के बाद ही यहां से निकाल लिया गया। शिवलिंग को चमत्कारी बता रहे लोग हम लोगों को इस बात की खुशी है कि भगवान हमारे यहां एक घंटा, रुके लेकिन इस बात का दुख भी है रात्रि विश्राम नहीं कर सके। गांव के लोग तो इसे राम और शिव की मर्जी बताकर विश्व के इस सबसे बड़े शिवलिंग को चमत्कारी बताते हैं। लोगों का मानना है कि शिव की मर्जी नहीं थी, इसलिए विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग को केसरिया में रात्रि रोकने के बजाए आधी रात में कैथवलिया लाना पड़ा। गांव के विश्वास शर्मा, राधे प्रसाद, जोखन दास और बजरंगी बताते हैं कि जब भगवान श्री राम की शादी हुई और अयोध्या से जनकपुर के लिए बारात जा रही थी, तो केसरिया बौद्ध स्तूप के पास बारात रुकने की तैयारी की गई थी, लेकिन वहां के लोग राम के बारात को वहां रुकने नहीं दिए। लोगों ने राम की बारात को रोकने से किया था मना गांव वालों का कहना है कि इसके पीछे की क्या वजह थी इस बात की जानकारी अब तक किसी को नहीं है, सभी लोग अपनी-अपनी बात बताते है। कुछ गांव वाले कहते हैं, जहां भगवान राम की बारात रुकने की व्यवस्था की गई थी, वहां उतनी संख्या में बारात को रोकने की व्यवस्था ही नहीं हो पा रही थी। इस कारण से बारात को वहां से आगे बढ़ाना पड़ा था और गांव के लोगों ने बारात में परेशानी नहीं हो इसलिए राम की बारात को वहां रुकने से मना किया था। अब गांव के लोगों का कहना है कि जब केसरिया के लोग भगवान राम को नहीं रुकने दिए तो दूसरे को क्या रुकने देंगे।
मोतिहारी के विराट रामायण मंदिर में स्थापित होने जा रहे विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग को लेकर एक अनोखी चर्चा हो रही है। यह चर्चा मोतिहारी के केसरिया से जुड़ी है, जहां मंदिर का निर्माण हो रहा है। बताया जा रहा है कि जब भगवान राम की बारात अयोध्या से जनकपुर जा रही थी, तब उसका केसरिया में रुकने का कार्यक्रम था। लेकिन बारात वहां नहीं रुकी। इसी तरह, जब विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग को विराट रामायण मंदिर में स्थापना के लिए लाया जा रहा था, तब उसे भी केसरिया में रोककर दर्शन-पूजन का प्लान था। हालांकि, ऐसी परिस्थितियां बनीं कि शिवलिंग को भी वहां रोका नहीं जा सका। इस संयोग को लेकर क्षेत्र में लोगों के बीच गहरी आस्था और चर्चा है। इसी कारण से शिवलिंग की स्थापना से पहले ही उसकी पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। विराट रामायण मंदिर निर्माण समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रशासन ने केसरिया के बीबीएस उत्सव मैरिज हॉल के पास शिवलिंग को रोकने की व्यवस्था की थी। योजना थी कि शिवलिंग को यहां रोककर लोगों के दर्शन के लिए रखा जाएगा, ताकि मंदिर में उसकी स्थापना की रणनीति बनाई जा सके। तैयारी के बाद भी केसरिया में नहीं हो सका रात्री विश्राम बीबीएस उत्सव मैरिज हॉल के मालिक अभय सिंह ने बताया कि उन्होंने पूरी तैयारी कर रखी थी। शिवलिंग उनके हॉल के पास पहुंचा और लगभग दो घंटे तक लोगों ने दर्शन-पूजन भी किया। हम बहुत खुश थे कि विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग हमारे यहां रुका। लेकिन इतनी अधिक भीड़ हो गई कि प्रशासन के लिए व्यवस्था संभालना मुश्किल हो गया। पूरा रास्ता जाम हो गया। बीबीएस उत्सव मैरेज हॉल के मालिक अभय सिंह बताते हैं कि अचानक ऐसी स्थिति बनी कि आनन फानन में प्रशासन ने वहां से शिवलिंग को आगे बढ़ाया। इस बात का दुख है कि केसरिया में शिवलिंग का रात्रि विश्राम प्लान होने के बावजूद भी शिव को यहां नहीं रखा जा सका। राम का बारात भी नहीं रुक पाया था इसे शिव की मर्जी कहें या कोई संयोग यह तो हमारे यहां के हजारों लोगों को समझ में नहीं आ रहा है। अब तो यही चर्चा हो रही है कि जहां राम की बारात रुकने के प्लान के बाद भी नहीं रुकी, वहां शिवलिंग को भी प्लान के बाद भी नहीं रोका जा सका। दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की देखिए झलक... केसरिया के विजय जायसवाल बताते है कि बड़े लोगों से यही सुना था कि अयोध्या से जनकपुर के लिए भगवान राम की बारात जब जा रही थी तो केसरिया में रुकना था। लेकिन किसी कारण बस बारात नहीं रुक पाई। अब संयोग ऐसा बना कि ठीक उसी प्रकार जब भगवान शिव का लिंग आ रहा था तो केसरिया में रात्रि विश्राम करना था। लेकिन एक घंटे के बाद ही यहां से निकाल लिया गया। शिवलिंग को चमत्कारी बता रहे लोग हम लोगों को इस बात की खुशी है कि भगवान हमारे यहां एक घंटा, रुके लेकिन इस बात का दुख भी है रात्रि विश्राम नहीं कर सके। गांव के लोग तो इसे राम और शिव की मर्जी बताकर विश्व के इस सबसे बड़े शिवलिंग को चमत्कारी बताते हैं। लोगों का मानना है कि शिव की मर्जी नहीं थी, इसलिए विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग को केसरिया में रात्रि रोकने के बजाए आधी रात में कैथवलिया लाना पड़ा। गांव के विश्वास शर्मा, राधे प्रसाद, जोखन दास और बजरंगी बताते हैं कि जब भगवान श्री राम की शादी हुई और अयोध्या से जनकपुर के लिए बारात जा रही थी, तो केसरिया बौद्ध स्तूप के पास बारात रुकने की तैयारी की गई थी, लेकिन वहां के लोग राम के बारात को वहां रुकने नहीं दिए। लोगों ने राम की बारात को रोकने से किया था मना गांव वालों का कहना है कि इसके पीछे की क्या वजह थी इस बात की जानकारी अब तक किसी को नहीं है, सभी लोग अपनी-अपनी बात बताते है। कुछ गांव वाले कहते हैं, जहां भगवान राम की बारात रुकने की व्यवस्था की गई थी, वहां उतनी संख्या में बारात को रोकने की व्यवस्था ही नहीं हो पा रही थी। इस कारण से बारात को वहां से आगे बढ़ाना पड़ा था और गांव के लोगों ने बारात में परेशानी नहीं हो इसलिए राम की बारात को वहां रुकने से मना किया था। अब गांव के लोगों का कहना है कि जब केसरिया के लोग भगवान राम को नहीं रुकने दिए तो दूसरे को क्या रुकने देंगे।