किशनगढ़बास में पानी ले जाने के प्रस्ताव का विरोध:20 गांवों के लोग बैठक में हुए शामिल, बोले-क्षेत्र में जल संकट गहराएगा
किशनगढ़बास के घाटीका स्टैंड बाघोड़ा में मंगलवार को एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। यह बैठक सरकार द्वारा रूंध गुदावड़ा–बृसंगपुर क्षेत्र से बोरिंग कर पानी ले जाने के प्रस्ताव के विरोध में बुलाई गई थी। इसमें किशनगढ़बास, रामगढ़ और तिजारा तहसील के करीब 20 गांवों से लोग शामिल हुए। किसानों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यदि सरकार इस क्षेत्र से पानी ले जाती है, तो स्थानीय जल स्रोत पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे और क्षेत्र में गंभीर जल संकट गहरा जाएगा। 13 जनवरी को निकलेगी रैली बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 13 जनवरी 2026 को किशनगढ़बास, तिजारा और रामगढ़ क्षेत्र के विभिन्न गांवों से एक विशाल रैली निकाली जाएगी। इस रैली के माध्यम से कलेक्ट्रेट का घेराव कर खैरथल-तिजारा जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। रूंध गुदावड़ा से सटे लगभग 20 गांवों के लोगों ने इस योजना को अपने जल संसाधनों के लिए गंभीर खतरा बताया। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने स्थानीय लोगों की मांगों की अनदेखी की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ये रहे मौजूद इस अवसर पर कैलाश मीणा, सरदार वीरेंद्र मोर, मौलाना हनीफ मन्नाका, सफात खान, जाकिर सरपंच, ममूल सरपंच, जमशेद सरपंच, मास्टर फखरुद्दीन, इमरान नवाब, तारीफ, जावेद मादवापुर, मोमदीन और असम मास्टर सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।
किशनगढ़बास के घाटीका स्टैंड बाघोड़ा में मंगलवार को एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। यह बैठक सरकार द्वारा रूंध गुदावड़ा–बृसंगपुर क्षेत्र से बोरिंग कर पानी ले जाने के प्रस्ताव के विरोध में बुलाई गई थी। इसमें किशनगढ़बास, रामगढ़ और तिजारा तहसील के करीब 20 गांवों से लोग शामिल हुए। किसानों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यदि सरकार इस क्षेत्र से पानी ले जाती है, तो स्थानीय जल स्रोत पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे और क्षेत्र में गंभीर जल संकट गहरा जाएगा। 13 जनवरी को निकलेगी रैली बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 13 जनवरी 2026 को किशनगढ़बास, तिजारा और रामगढ़ क्षेत्र के विभिन्न गांवों से एक विशाल रैली निकाली जाएगी। इस रैली के माध्यम से कलेक्ट्रेट का घेराव कर खैरथल-तिजारा जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। रूंध गुदावड़ा से सटे लगभग 20 गांवों के लोगों ने इस योजना को अपने जल संसाधनों के लिए गंभीर खतरा बताया। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने स्थानीय लोगों की मांगों की अनदेखी की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ये रहे मौजूद इस अवसर पर कैलाश मीणा, सरदार वीरेंद्र मोर, मौलाना हनीफ मन्नाका, सफात खान, जाकिर सरपंच, ममूल सरपंच, जमशेद सरपंच, मास्टर फखरुद्दीन, इमरान नवाब, तारीफ, जावेद मादवापुर, मोमदीन और असम मास्टर सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।