अनंत सिंह, तेजस्वी, सम्राट, मैथिली क्यों जीते, तेजप्रताप क्यों हारे:20 VIP सीटों का हाल; बाहुबली रीतलाल-हुलास पांडे हारे, खेसारी क्यों पीछे
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए काउंटिंग जारी है। NDA को 200 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं। 243 सीटों में से 20 ऐसी हैं, जिन पर सभी की नजर है। शाम 7:30 बजे तक के रुझान के मुताबिक, महागठबंधन के CM कैंडिडेट तेजस्वी यादव राघोपुर सीट जीत गए हैं। महुआ से तेजस्वी के भाई तेजप्रताप हार गए। अलीनगर से मैथिली ठाकुर और मोकामा से बाहुबली अनंत सिंह जीत गए हैं। पढ़िए सभी 20 सीटों पर जीत-हार की वजह… 1. राघोपुर: तेजस्वी को कड़ी चुनौती, पिछड़ने के बाद जीते राघोपुर में तेजस्वी यादव 14,532 वोट से जीत गए हैं। दूसरे नंबर पर BJP के सतीश कुमार रहे। 2020 में तेजस्वी 38,174 वोट से जीते थे। जीत की वजह 1. इस सीट पर लोगों तेजस्वी को लोगों ने एक विधायक के तौर पर नहीं, बल्कि CM कैंडिडेट होने के चलते वोट दिया।
2. लोगों में तेजस्वी के लिए नाराजगी थी, लेकिन उन्हें लालू के बेटे और नेता प्रतिपक्ष होने का फायदा मिला।
3. राघोपुर में 35% यादव वोट हैं, BJP और तेजप्रताप की पार्टी JJD ने यहां यादव को टिकट दिया। हालांकि यादव वोट नहीं बंटा। 5% मुस्लिम भी तेजस्वी के साथ रहे। 2. महुआ: तेजप्रताप तीसरे नंबर पर RJD से अलग होकर पहला चुनाव लड़ रहे तेजप्रताप यादव महुआ से हार गए हैं। उन्हें 35,703 वोट मिले। LJP (R) के संजय कुमार सिंह को 87,641 वोट मिले। उन्होंनें RJD के मुकेश कुमार रौशन 44,997 वोट से हराया। हार के कारण
1. RJD के मुकेश रौशन को यादवों ने वोट किया।
2. AIMIM के अमित कुमार और निर्दलीय कैंडिडेट आसमां परवीन की वजह से मुस्लिम वोटर्स बंट गए, जिसका नुकसान तेजप्रताप को हुआ।
3. RJD कैंडिडेट मुकेश रौशन के लिए लोगों में गुस्सा था। उनके खिलाफ गए वोट NDA के संजय कुमार को मिले। 3. छपरा: खेसारी लाल यादव पीछे छपरा में खेसारी लाल यादव पीछे चल रहे हैं। पहले नंबर पर NDA की छोटी कुमारी हैं। पिछड़ने की वजह
1. खेसारी पॉपुलर भोजपुरी सिंगर हैं, लेकिन इसका फायदा नहीं मिला।
2. BJP की बागी राखी गुप्ता, छोटी कुमारी के वोट काटतीं तो खेसारी को फायदा मिलता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
3. छ्परा के लोग मौजूदा विधायक सीएन गुप्ता से नाराज थे। इलाके में टूटी सड़कें और जलभराव बड़ी समस्या थी। 4. अलीनगर: कंट्रोवर्सी बेअसर, मैथिली ठाकुर जीतीं अलीनगर में BJP की मैथिली ठाकुर 11,730 वोट से जीत गई हैं। उन्हें 84,915 मिले। RJD के विनोद मिश्रा दूसरे नंबर पर रहे। जीत की वजह
1. 23 अक्टूबर 2025 को यूपी की BJP विधायक केतकी सिंह ने ‘मैथिल पाग’ की जगह मैथिली ठाकुर को मिथिला का सम्मान बता दिया। एक वीडियो और वायरल हुआ, जिसमें मैथिली पाग में मखाना रखकर खा रही थीं। इसके बाद BJP के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने माफी मांगी। लोकल नेताओं ने भी घर-घर जाकर माफी मांगी। इसका मैथिली को फायदा मिला।
2. मैथिली को अपनी पॉपुलैरिटी और अच्छी इमेज का फायदा मिला।
3. लोग नीतीश और मोदी सरकार की योजनाओं से खुश थे, मैथिली को बाहरी कहने के बाद भी उन्होंने वोट दिए। 5. करगहर: रितेश पांडे को जन सुराज कैंडिडेट होने का नुकसान करगहर में भोजपुरी सिंगर रितेश पांडे चुनाव हार गए हैं। जन सुराज की टिकट पर लड़े रितेश को सिर्फ 16,298 वोट मिले। वे चौथे नंबर पर रहे। यहां से JDU के वशिष्ठ सिंह जीते हैं। बसपा के उदय प्रताप सिंह दूसरे नंबर पर हैं। पिछड़ने की वजह
1. करगहर जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर का घर है। यहां से उन्हीं के चुनाव लड़ने की चर्चा थी लेकिन पार्टी ने भोजपुरी सिंगर रितेश पांडे को उतार दिया। ये जन सुराज के खिलाफ गया।
2. इस सीट पर सबसे ज्यादा कुर्मी, ब्राह्मण और यादव वोटर हैं। कुर्मी 15%, ब्राह्मण 13%, यादव-10%, EBC 20%, ST/SC 12%, मुस्लिम 8%, राजपूत और भूमिहार 12% और अन्य 10% हैं। कांग्रेस के संतोष मिश्रा के पक्ष में OBC+ब्राह्मण+मुस्लिम+SC का समीकरण बना। रितेश इसमें फेल हुए।
3. जन सुराज की ग्राउंड पर पकड़ नहीं थी। रितेश पांडे का फेमस होना उन्हें वोट नहीं दिला पाया। प्रशांत के गृह जिले होने का भी फायदा नहीं हुआ। 6. मोकामा: दुलार चंद की हत्या से फर्क नहीं, अनंत सिंह जीते मोकामा में फिलहाल JDU के अनंत सिंह 28,206 वोट से जीत गए हैं। दूसरे नंबर पर RJD की वीणा सिंह रहीं। जीत की वजह
1. ये मुकाबला बाहुबली अनंत सिंह और सूरजभान सिंह के बीच था। दुलारचंद यादव के मर्डर से यादव Vs भूमिहार की स्थिति बनी। सवर्ण वोटर अनंत सिंह के पीछे गोलबंद हो गया।
2. मोकामा में करीब 30% भूमिहार, 24% वोटर यादव हैं। अनुसूचित जातियों के वोटर 16.7%, राजपूत 14.3%, और मुस्लिम करीब 2.3% हैं। अनंत सिंह के पक्ष में भूमिहार+राजपूत+EBC का गणित रहा।
3. दुलारचंद यादव की हत्या से जो सिंपेथी वोट महागठबंधन के पक्ष में जानी चाहिए थी वो जन सुराज के साथ चला गया। इससे अनंत सिंह मजबूत हुए। 7. तारापुर: सम्राट चौधरी की आसान जीत तारापुर से BJP के सम्राट चौधरी 45,843 वोट से जीत गए हैं। RJD के अरुण कुमार साह दूसरे नंबर पर रहे। जीत की वजह
1. सम्राट चौधरी को लोकल लीडर और कुशवाहा के बड़े लीडर होने का फायदा मिला है। डिप्टी सीएम होने से उनकी इमेज मजबूत थी। उनके सामने RJD के मजबूत उम्मीदवार थे लेकिन सम्राट का कद ज्यादा बड़ा था।
2. तारापुर में OBC, विशेषकर कुशवाहा (कोइरी) समुदाय का दबदबा है। सम्राट चौधरी भी इसी जाति से आते हैं। इलाके की राजनीति में सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी का खासा प्रभाव रहा है। वे 6 बार यहां से जीते, जबकि उनकी पत्नी पार्वती देवी ने एक बार यहां से जीत हासिल की। 3. नीतीश की योजनाओं से महिलाएं खुश थीं। महिलाओं ने जाति के पार जाकर वोटिंग की। 8. लखीसराय: विवाद के बावजूद विजय सिन्हा जीते लखीसराय में डिप्टी CM विजय कुमार सिन्हा जीत गए हैं। उन्होंने कांग्रेस के अमरेश कुमार अनीस को 24,940 वोट से हराया। वजह
1. विजय सिन्हा RSS बैकग्राउंड से हैं। उन्होंने दियारा से प्रह्लाद यादव को अपने पक्ष में लेकर RJD के वोटबैंक में सेंध लगा दी।
2. 6 नवंबर को वोटिंग के दिन लखीसराय के खुरियार
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए काउंटिंग जारी है। NDA को 200 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं। 243 सीटों में से 20 ऐसी हैं, जिन पर सभी की नजर है। शाम 7:30 बजे तक के रुझान के मुताबिक, महागठबंधन के CM कैंडिडेट तेजस्वी यादव राघोपुर सीट जीत गए हैं। महुआ से तेजस्वी के भाई तेजप्रताप हार गए। अलीनगर से मैथिली ठाकुर और मोकामा से बाहुबली अनंत सिंह जीत गए हैं। पढ़िए सभी 20 सीटों पर जीत-हार की वजह… 1. राघोपुर: तेजस्वी को कड़ी चुनौती, पिछड़ने के बाद जीते राघोपुर में तेजस्वी यादव 14,532 वोट से जीत गए हैं। दूसरे नंबर पर BJP के सतीश कुमार रहे। 2020 में तेजस्वी 38,174 वोट से जीते थे। जीत की वजह 1. इस सीट पर लोगों तेजस्वी को लोगों ने एक विधायक के तौर पर नहीं, बल्कि CM कैंडिडेट होने के चलते वोट दिया।
2. लोगों में तेजस्वी के लिए नाराजगी थी, लेकिन उन्हें लालू के बेटे और नेता प्रतिपक्ष होने का फायदा मिला।
3. राघोपुर में 35% यादव वोट हैं, BJP और तेजप्रताप की पार्टी JJD ने यहां यादव को टिकट दिया। हालांकि यादव वोट नहीं बंटा। 5% मुस्लिम भी तेजस्वी के साथ रहे। 2. महुआ: तेजप्रताप तीसरे नंबर पर RJD से अलग होकर पहला चुनाव लड़ रहे तेजप्रताप यादव महुआ से हार गए हैं। उन्हें 35,703 वोट मिले। LJP (R) के संजय कुमार सिंह को 87,641 वोट मिले। उन्होंनें RJD के मुकेश कुमार रौशन 44,997 वोट से हराया। हार के कारण
1. RJD के मुकेश रौशन को यादवों ने वोट किया।
2. AIMIM के अमित कुमार और निर्दलीय कैंडिडेट आसमां परवीन की वजह से मुस्लिम वोटर्स बंट गए, जिसका नुकसान तेजप्रताप को हुआ।
3. RJD कैंडिडेट मुकेश रौशन के लिए लोगों में गुस्सा था। उनके खिलाफ गए वोट NDA के संजय कुमार को मिले। 3. छपरा: खेसारी लाल यादव पीछे छपरा में खेसारी लाल यादव पीछे चल रहे हैं। पहले नंबर पर NDA की छोटी कुमारी हैं। पिछड़ने की वजह
1. खेसारी पॉपुलर भोजपुरी सिंगर हैं, लेकिन इसका फायदा नहीं मिला।
2. BJP की बागी राखी गुप्ता, छोटी कुमारी के वोट काटतीं तो खेसारी को फायदा मिलता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
3. छ्परा के लोग मौजूदा विधायक सीएन गुप्ता से नाराज थे। इलाके में टूटी सड़कें और जलभराव बड़ी समस्या थी। 4. अलीनगर: कंट्रोवर्सी बेअसर, मैथिली ठाकुर जीतीं अलीनगर में BJP की मैथिली ठाकुर 11,730 वोट से जीत गई हैं। उन्हें 84,915 मिले। RJD के विनोद मिश्रा दूसरे नंबर पर रहे। जीत की वजह
1. 23 अक्टूबर 2025 को यूपी की BJP विधायक केतकी सिंह ने ‘मैथिल पाग’ की जगह मैथिली ठाकुर को मिथिला का सम्मान बता दिया। एक वीडियो और वायरल हुआ, जिसमें मैथिली पाग में मखाना रखकर खा रही थीं। इसके बाद BJP के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने माफी मांगी। लोकल नेताओं ने भी घर-घर जाकर माफी मांगी। इसका मैथिली को फायदा मिला।
2. मैथिली को अपनी पॉपुलैरिटी और अच्छी इमेज का फायदा मिला।
3. लोग नीतीश और मोदी सरकार की योजनाओं से खुश थे, मैथिली को बाहरी कहने के बाद भी उन्होंने वोट दिए। 5. करगहर: रितेश पांडे को जन सुराज कैंडिडेट होने का नुकसान करगहर में भोजपुरी सिंगर रितेश पांडे चुनाव हार गए हैं। जन सुराज की टिकट पर लड़े रितेश को सिर्फ 16,298 वोट मिले। वे चौथे नंबर पर रहे। यहां से JDU के वशिष्ठ सिंह जीते हैं। बसपा के उदय प्रताप सिंह दूसरे नंबर पर हैं। पिछड़ने की वजह
1. करगहर जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर का घर है। यहां से उन्हीं के चुनाव लड़ने की चर्चा थी लेकिन पार्टी ने भोजपुरी सिंगर रितेश पांडे को उतार दिया। ये जन सुराज के खिलाफ गया।
2. इस सीट पर सबसे ज्यादा कुर्मी, ब्राह्मण और यादव वोटर हैं। कुर्मी 15%, ब्राह्मण 13%, यादव-10%, EBC 20%, ST/SC 12%, मुस्लिम 8%, राजपूत और भूमिहार 12% और अन्य 10% हैं। कांग्रेस के संतोष मिश्रा के पक्ष में OBC+ब्राह्मण+मुस्लिम+SC का समीकरण बना। रितेश इसमें फेल हुए।
3. जन सुराज की ग्राउंड पर पकड़ नहीं थी। रितेश पांडे का फेमस होना उन्हें वोट नहीं दिला पाया। प्रशांत के गृह जिले होने का भी फायदा नहीं हुआ। 6. मोकामा: दुलार चंद की हत्या से फर्क नहीं, अनंत सिंह जीते मोकामा में फिलहाल JDU के अनंत सिंह 28,206 वोट से जीत गए हैं। दूसरे नंबर पर RJD की वीणा सिंह रहीं। जीत की वजह
1. ये मुकाबला बाहुबली अनंत सिंह और सूरजभान सिंह के बीच था। दुलारचंद यादव के मर्डर से यादव Vs भूमिहार की स्थिति बनी। सवर्ण वोटर अनंत सिंह के पीछे गोलबंद हो गया।
2. मोकामा में करीब 30% भूमिहार, 24% वोटर यादव हैं। अनुसूचित जातियों के वोटर 16.7%, राजपूत 14.3%, और मुस्लिम करीब 2.3% हैं। अनंत सिंह के पक्ष में भूमिहार+राजपूत+EBC का गणित रहा।
3. दुलारचंद यादव की हत्या से जो सिंपेथी वोट महागठबंधन के पक्ष में जानी चाहिए थी वो जन सुराज के साथ चला गया। इससे अनंत सिंह मजबूत हुए। 7. तारापुर: सम्राट चौधरी की आसान जीत तारापुर से BJP के सम्राट चौधरी 45,843 वोट से जीत गए हैं। RJD के अरुण कुमार साह दूसरे नंबर पर रहे। जीत की वजह
1. सम्राट चौधरी को लोकल लीडर और कुशवाहा के बड़े लीडर होने का फायदा मिला है। डिप्टी सीएम होने से उनकी इमेज मजबूत थी। उनके सामने RJD के मजबूत उम्मीदवार थे लेकिन सम्राट का कद ज्यादा बड़ा था।
2. तारापुर में OBC, विशेषकर कुशवाहा (कोइरी) समुदाय का दबदबा है। सम्राट चौधरी भी इसी जाति से आते हैं। इलाके की राजनीति में सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी का खासा प्रभाव रहा है। वे 6 बार यहां से जीते, जबकि उनकी पत्नी पार्वती देवी ने एक बार यहां से जीत हासिल की। 3. नीतीश की योजनाओं से महिलाएं खुश थीं। महिलाओं ने जाति के पार जाकर वोटिंग की। 8. लखीसराय: विवाद के बावजूद विजय सिन्हा जीते लखीसराय में डिप्टी CM विजय कुमार सिन्हा जीत गए हैं। उन्होंने कांग्रेस के अमरेश कुमार अनीस को 24,940 वोट से हराया। वजह
1. विजय सिन्हा RSS बैकग्राउंड से हैं। उन्होंने दियारा से प्रह्लाद यादव को अपने पक्ष में लेकर RJD के वोटबैंक में सेंध लगा दी।
2. 6 नवंबर को वोटिंग के दिन लखीसराय के खुरियारी गांव में विवाद के बाद विजय सिन्हा को नुकसान होने की आशंका थी, लेकिन इसे मैनेज कर ले गए।
3. विजय सिन्हा डिप्टी CM थे, अमित शाह ने जीत के बाद बड़ा आदमी बनाने की बात कही थी, इसका फायदा मिला। 9. सीवान: शहाबुद्दीन के गढ़ में मंगल पांडे जीते सीवान में BJP के मंगल पांडे 9,370 वोट से जीते हैं। उन्हें 92,379 वोट मिले। दूसरे नंबर पर रहे RJD के अवध बिहारी चौधरी को 83,009 वोट मिले। जीत की वजह
1. 2005 से लगातार तीन बार से इस सीट पर BJP का कब्जा रहा है। यहां NDA मजबूत स्थिति में है।
2. मंगल पांडे बिहार BJP के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं। नीतीश सरकार में प्रभावशाली मिनिस्टर भी हैं। इस बात का उन्हें फायदा मिल रहा है।
3. RJD के अवध बिहारी चौधरी की इलाके में इमेज अच्छी नहीं है। वे लोगों से मिलते-जुलते नहीं हैं। AIMIM ने भी इस सीट से उम्मीदवार उतारा है, इससे मुस्लिम वोट बंट गए। 10. ओसामा: पिता शहाबुद्दीन की विरासत संभाली रघुनाथपुर में सीवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब 9,248 जीत गए हैं। दूसरे नंबर पर JDU के विकास कुमार सिंह रहे। जीत की वजह
1. ओसामा शहाब बाहुबली रहे शहाबुद्दीन के बेटे हैं और पहली बार चुनावी मैदान में हैं। उनके पक्ष में सिंपेथी वोट ने काम किया।
2. इस सीट से लगातार दो बार से विधायक RJD के हरिशंकर यादव ने ही ओसामा को चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव रखा था। वे पूरे चुनाव में ओसामा के साथ रहे और RJD के वोटबैंक को संगठित रखा।
3. ओसामा की इमेज पिता की तरह बाहुबली की नहीं हैं, वे पढ़े-लिखे माने जाते हैं। तेजस्वी खुद उनके प्रचार के लिए आए थे, इसका भी फायदा हुआ है। 11. चनपटिया: मनीष कश्यप को BJP छोड़ना काम नहीं आया चनपटिया में BJP के उमाकांत सिंह आगे चल रहे हैं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के अभिषेक रंजन हैं। यूट्यूबर मनीष कश्यप तीसरे नंबर पर हैं। पिछड़ने की वजह
1. मनीष कश्यप बतौर यूट्यूबर तो चर्चित हैं लेकिन जन सुराज इलाके में कमजोर है। मनीष पहले BJP में थे। कुछ महीने पहले ही जन सुराज में आए हैं इसका भी नुकसान हो रहा है।
2. मनीष कश्यप की इमेज कट्टर हिंदुवादी नेता की रही है। जन सुराज में आने के बाद इन्होंने उसे बदला लेकिन इससे उनका समर्थक वर्ग नाराज हुआ।
3. JDU के उमाकांत सिंह के साथ भूमिहार और ब्राह्मण वोटबैंक है, ये इस इलाके का सबसे बड़ा वोटबैंक है। इसके अलावा 125 यूनिट फ्री बिजली और जीविका जैसी योजनाओं का इलाके में पॉजिटिव इंपेक्ट है। 12. बक्सर: IPS आनंद मिश्रा की क्लीन इमेज का फायदा बक्सर में BJP कैंडिडेट और पूर्व IPS अधिकारी आनंद मिश्रा जीत गए हैं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के संजय तिवारी रहे। आनंद मिश्रा को 84,901 वोट मिले। वजह
1. IPS आनंद मिश्रा क्लीन इमेज के उम्मीदवार हैं। उन्होंने इलाके में 'आनंद सेवा केंद्र' शुरू किया था जो लोगों को सरकारी योजनाओं का फायदा दिलाने का काम करता था। इससे इलाके में वे काफी पॉपुलर हो गए।
2. आनंद मिश्रा से उलट कांग्रेस के उम्मीदवार संजय तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी की छवि बाहुबली टाइप के नेता की रही है। वे दो बार से चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस में ही आपसी फूट है।
3. इलाके में ब्राह्मण और यादव वोट जीत तय करते हैं। यादव वोटर कांग्रेस से नाराज हैं। किसान भी लाठीचार्ज की घटना के बाद नाराज हैं। 13. ब्रह्मपुर: हुलास पांडे की हार के पीछे रणवीर सेना और ब्रहमेश्वर मुखिया ब्रह्मपुर में RJD के शंभू नाथ यादव जीत गए हैं। उन्हें 95,828 वोट मिले। शंभू नाथ यादव ने LJP(R) के बाहुबली हुलास पांडे को हराया। हार के कारण
1. भूमिहारों की रणवीर सेना के चीफ ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या के मामले में हुलास पांडे और उनके भाई सुनील पांडे मुख्य आरोपी थे। हुलास इस केस में बरी तो हो गए लेकिन इलाके का अहम वोटबैंक भूमिहार ये अभी पूरी तरह से भूल नहीं पाया है।
2. RJD के सिटिंग विधायक शंभू नाथ यादव के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। हालांकि करीब 26% यादव वोटर उनके साथ हैं, जो RJD के कोर वोटर माने जाते हैं। ब्रह्मपुर में 14% वोट ब्राह्मण और भूमिहार हैं। ब्राह्मण वोट कांग्रेस और मल्लाह वोट VIP को मिलते रहे हैं। इसका फायदा RJD को हुआ। ये करीब 40% वोटर हो जाते हैं।
3. उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा के साथ होने का फायदा हुलास पांडे को मिलना था, लेकिन वो नजर नहीं आया। 14. दानापुर: रामकृपाल यादव जीते, रीतलाल हारे दानापुर में BJP के रामकृपाल यादव 29,133 वोट से जीत गए हैं। दूसरे नंबर पर RJD के बाहुबली रीतलाल यादव रहे। हार के कारण
1. रीतलाल यादव जेल में हैं, उनकी छवि बाहुबली वाली है। शहरी वोटर्स को रामकृपाल की क्लीन इमेज वाली छवि पसंद आई।
2. रामकृपाल ने RJD के यादव वोटबैंक में सेंध लगाई। NDA का वोटबैंक सवर्ण+EBC उनके पक्ष में संगठित रहा। ये जीत का समीकरण बना। महिला वोट भी NDA के पक्ष में रहा।
3. रीतलाल सिटिंग विधायक थे। उनके खिलाफ इलाके में एंटी-इनकम्बेंसी भी थी। लालू यादव ने रीतलाल के लिए रोड शो किया था, लेकिन इसका भी फायदा नहीं हुआ। 15. काराकाट: पवन सिंह की ज्योति पीछे, अरुण सिंह आगे भोजपुरी स्टार पवन की पत्नी ज्योति सिंह की वजह से यहां त्रिकोणीय मुकाबला था। ज्योति सिंह तीसरे नंबर पर हैं। यहां से मौजूदा विधायक डॉ. अरुण सिंह पहले और JDU के महाबली सिंह दूसरे नंबर पर हैं। वजह
1. पवन सिंह से विवाद के बाद ज्योति को सिंपेथी वोट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
2. CPI-ML के मौजूद विधायक अरुण कुमार के खिलाफ लोगों में नाराजगी थी। ये उनकी हार की वजह बनी।
3. महाबली सिंह नए कैंडिडेट थे, उन्हें NDA के वोट बैंक का फायदा हुआ। 16. लालगंज: संजय सिंह से हारीं शिवानी शुक्ला ये सीट बाहुबली मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला की वजह से चर्चा में रही। हालांकि वे BJP के संजय सिंह से हार गईं। शिवानी को 95,483 वोट मिले। वजह
1. संजय सिंह की छवि अच्छी है। उनके पास राजपूत, कोइरी और EBC का संगठित वोटबैंक है।
2. यहां कांग्रेस ने आदित्य राजा को टिकट दिया था। बाद में सीट RJD के खाते में चली गई, कांग्रेस का वोटबैंक इससे नाराज हो गया।
3. शिवानी को मुन्ना शुक्ला की बेटी होने का फायदा मिला, लेकिन भूमिहार वोट बंट गया। 17. दरभंगा: पुष्पम प्रिया फिर फेल, संजय सरावगी जीते इस सीट से नीतीश सरकार में मंत्री संजय सरावगी 24,593 वोट से जीत गए हैं। VIP के उमेश सहनी दूसरे नंबर पर रहे। जन सुराज के कैंडिडेट रिटायर्ड IPS आरके मिश्रा तीसरे और प्लूरल्स पार्टी की पुष्पम प्रिया चौधरी आठवें नंबर पर रहीं। पुष्पम प्रिया को सिर्फ 1403 वोट मिले। हार के कारण
1. दरभंगा सीट BJP का गढ़ है। पार्टी यहां 2009 से लगातार चार लोकसभा चुनाव जीती है।
2. 2005 के बाद से संजय सरावगी विधायक हैं। उनकी इमेज अच्छी है।
3. इस सीट पर 76% वोटर शहरी हैं, जो NDA के समर्थक माने जाते हैं। 20% कायस्थ, 12% ब्राह्मण और 20% दलित वोट का गठजोड़ उसे मजबूत बनाता है। 18. कुटुंबा: कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम हारे कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका कुटुंबा में लगा है। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम हार गए। यहां HAM के ललन राम जीते हैं। ललन राम को 84,727 वोट मिले। राजेश राम 63,202 को वोट मिले। वजह 1. 2020 में ललन राम निर्दलीय चुनाव लड़े थे, उन्हें 20 हजार वोट मिले थे। NDA के श्रवण भुइया को 34 हजार वोट मिले थे। ललन राम इस बार NDA कैंडिडेट हैं।
2. कुटुंबा में राजपूत वोटर ज्यादा हैं, जिन्हें NDA का वोटर माना जाता है।
3. RJD के लोकल लीडर कुटुंबा सीट की मांग कर रहे थे। यादव पार्टी के कोर वोटर हैं, वे राजेश राम से नाराज थे। 19. अररिया: पूर्व IPS शिवदीप लांडे पीछे पटना SP रहते हुए पॉपुलर हुए शिवदीप लांडे चुनाव मैदान में पीछे रहे गए। वे चौथे नंबर पर चल रहे हैं। इस सीट से कांग्रेस के अबिदुर रहमान आगे चल रहे हैं। शिवदीप लांडे मुंगेर जिले की जमालपुर सीट से भी लड़े थे। वहां तीसरे नंबर पर चल रहे हैं। हार के कारण 1. शिवदीप लांडे के मुकाबले कांग्रेस और JDU कैंडिडेट ज्यादा मजबूत थे।
2. कांग्रेस के अबिदुर रहमान दो बार से विधायक हैं। पिता मंत्री रहे, इसलिए उनका अपना वोट बैंक है।
3. अररिया में 32% मुस्लिम वोटर हैं। उनके बीच अबिदुर रहमान की अच्छी पैठ है। 20. इमामगंज: दीपा मांझी की लगातार दूसरी जीत इमामगंज में जीतन राम मांझी की बहू और HAM कैंडिडेट दीपा मांझी 25,856 वोट से जीत गई हैं। उन्होंने RJD की रितु चौधरी को हराया। जीत की वजह
1. इमामगंज मांझी परिवार का गढ़ है। जीतन राम मांझी 2015 के बाद यहां से लगातार तीन बार जीते। 2024 के उपचुनाव में दीपा मांझी जीतीं।
2. दलित HAM का कोर वोट बैंक हैं, NDA का सवर्ण वोट साथ आने का फायदा मिला।
3. विधायक बनने के बाद दीपा मांझी इमामगंज में एक्टिव रहीं। वे लोगों के बीच जाती रहती हैं।