Islamic Nato क्या है, Pakistan-सऊदी के सैन्य गठबंधन में तुर्की की इंट्री, भारत के लिए कितना खतरनाक
Islamic Nato : अमेरिका वेनेजुएला के बाद ईरान पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस्लामिक नाटो (Islamic Nato) की खबरें भी सामने आ रही हैं। मीडिया खबरों के मुताबिक तुर्की अब पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बने नए रक्षा गठबंधन में शामिल ...
वैश्विक भू-राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका वेनेजुएला के बाद ईरान पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस्लामिक नाटो (Islamic Nato) की खबरें भी सामने आ रही हैं। मीडिया खबरों के मुताबिक तुर्की अब पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बने नए रक्षा गठबंधन में शामिल होने की योजना बना रहा है। रियाद और इस्लामाबाद के बीच का यह सुरक्षा समझौता उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के 'अनुच्छेद 5' की तर्ज पर है, जो सामूहिक सुरक्षा की गारंटी देता है। अगर पाकिस्तान इसमें कामयाब होता है तो यह भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाला होगा। डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक यदि यह गठबंधन आकार लेता है, तो दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन बदल सकता है, जो भारत के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है।
क्या है 'इस्लामिक नाटो' और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
इस्लामिक नाटो' मुस्लिम और अरब देशों का एक प्रस्तावित रक्षा समूह है। इसकी नींव पिछले साल सितंबर में तब पड़ी जब मिस्र ने अरब लीग और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के शिखर सम्मेलन में एक संयुक्त टास्क फोर्स का सुझाव दिया।
हाल ही में सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक 'रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता' साझा किया है। इसके तहत किसी भी एक देश पर हमला, दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह क्लॉज ठीक वैसा ही है जैसा नाटो देशों के बीच लागू होता है। कतर की राजधानी दोहा पर इजराइली हमले के बाद अरब जगत में इस तरह के गठबंधन की मांग और तेज हुई है।
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तुर्की गठबंधन में शामिल होने के लिए क्यों है बेताब
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की इस गठबंधन में शामिल होने के लिए बेताब है। अमेरिका की बदलती नीतियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाटो के प्रति प्रतिबद्धता पर अनिश्चितता के बीच तुर्की नए विकल्प तलाश रहा है।
भारत के लिए क्यों है चुनौती
भारत के लिए यह गठबंधन सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने तुर्की निर्मित ड्रोनों का इस्तेमाल किया था। तुर्की ने उस वक्त खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था। तुर्की पहले से ही पाकिस्तान के लिए युद्धपोत बना रहा है और उसके F-16 विमानों को अपग्रेड कर रहा है। अब तुर्की अपने 'कान' (Kaan) पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम में भी पाकिस्तान और सऊदी को शामिल करना चाहता है।
ट्रंप के लिए भी झटका
दुनिया में खुद को शांति दूत बताने वाले डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी पाकिस्तान का बड़ा झटका है। एक तरफ तो ट्रंप मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन घोषित कर रहे हैं, दूसरी ओर पाकिस्तान उनके पीठ पीछे इस्लामिक नाटो की तैयारी कर चुका है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्तावित समझौता यूरोपीय देशों और अमेरिका वाले नाटो के ही सामूहिक रक्षा सिद्धांत जैसा है। इसमें यह माना जाएगा कि किसी एक सदस्य पर हमला, सभी पर हमला है। यह सुरक्षा समझौता पहले सिर्फ सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ था, लेकिन अब इसमें तुर्की की भागीदारी को लेकर बातचीत इसे और आगे बढ़ा रहा है। Edited by: Sudhir Sharma



