लखनऊ की मोहनलालगंज तहसील में वकीलों का हंगामा:नारे लगाए- SDM तेरी तानाशाही नहीं चलेगी, तहसीलदार मुर्दाबाद; आरोप- दलाल एक्टिव
लखनऊ की मोहनलालगंज तहसील में शनिवार को समाधान दिवस समस्या दिवस बनता दिखा। यहां वकीलों ने आमजनता से आगे बढ़ते हुए अधिकारियों को लताड़ना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में वकीलों की भीड़ आ गई। सबने SDM के सामने नारे लगाए कि SDM तेरी तानाशाही नहीं चलेगी। तहसीलदार मुर्दाबाद-मुर्दाबाद। आरोप लगाए कि तहसील में दलाल एक्टिव हैं। उनके साथ तहसीलदार संलिप्त हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाले इस समाधान दिवस में अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई। जानकारी के अनुसार, प्रभारी एडीएम सहित पुलिस और अन्य विभागों के कई अधिकारी सुबह 11:40 बजे तक कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुए। फरियादियों ने अधिकारियों का लंबे समय तक इंतजार किया। इससे आमलोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। तहसील के अंदर की 4 तस्वीरें देखिए वकीलों ने 5 मांगें रखीं- दलाल भगाने को प्राथमिकता अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनकी राय और विचार-विमर्श के बिना सुदूर ग्रामीण अंचल में उपनिबंधक कार्यालय की स्थापना कर दी गई, जिससे आमजन और वकीलों को अनावश्यक परेशानी हो रही है। अधिवक्ताओं का कहना है कि तहसील स्थित न्यायालयों की ओर से पारित आदेशों की विहित समय सीमा के भीतर अमल नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही न्यायालयों में बहस पूरी हो जाने के बावजूद लंबे समय तक आदेश पारित नहीं किए जाते, वहीं अविवादित वरासत की पत्रावलियां भी महीनों तक लंबित पड़ी रहती हैं। मोहनलालगंज बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कौशलेंद्र शुक्ला ने लेखपालों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे समय सीमा के भीतर आख्या नहीं देते। कई मामलों में अधिवक्ताओं के साथ मारपीट और गुंडई जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उपजिलाधिकारी मोहनलालगंज पर दलालों के माध्यम से मनमाने ढंग से पत्रावलियों का निस्तारण करा रहे हैं। दलालों को सबसे पहले भगाया जाए। नई महिला लेखपालों को प्रशिक्षण के बाद ही प्रभार दिया जाए तहसील परिसर और मुख्य गेट के सामने फैली गंदगी की साफ-सफाई पर भी अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। अधिवक्ताओं ने नई महिला लेखपालों को वरिष्ठ लेखपालों के साथ संबद्ध कर समुचित प्रशिक्षण देने के बाद ही स्वतंत्र प्रभार दिए जाने की मांग की है। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक इन सभी समस्याओं का शत-प्रतिशत समाधान सक्षम अधिकारियों द्वारा नहीं किया जाता, तब तक न्यायिक कार्य सुचारू रूप से किया जाना संभव नहीं है। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे अपने मुवक्किलों के प्रति जवाबदेह हैं। इन अव्यवस्थाओं के कारण उनकी साख प्रभावित हो रही है। अधिवक्ताओं ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर समस्याओं के समाधान की मांग की है।



