रोहतक में मकडौली टोल पर किसानों का प्रदर्शन:किसान नेता चढूनी का ऐलान- 10 को ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे, 23 को संसद का घेराव
रोहतक में मकडौली टोल पर पहुंचे भारती किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 10 मार्च को हर तहसील पर ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद 23 मार्च को संसद का घेराव करने के लिए दिल्ली कूच किया जाएगा। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि भारत में 23 करोड़ लोगों के पास इतनी आमदनी भी नहीं बची कि वह दो समय का खाना खा सके। देश की 80 करोड़ आगादी 5 किलो अनाज के रहमोकरम पर जिंदा है। भाजपा की नीति भी यही है कि पहले भूख दो, फिर भीख दो, उस भीख पर जो जनता जिंदा रहेगी, वह गुलामी करती रहेगी। किसान को दबाने पर भाजपा की नजर गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि भाजपा सरकार की नजर किसान के ऊपर है कि कैसे उन्हें दबाया जाए। हर आंधे घंटे में एक किसान कर्ज में डूबकर आत्महत्या कर रहा है। आगे आपका मुकाबला अमेरिका से है। भाजपा सरकार किसानों की तुलना अमेरिका से करवा रही है, जिससे किसान बर्बाद हो जाएगा। खेती पर 2 प्रतिशत खर्च कर रही सरकार गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि पहली पंचवर्षीय योजना में खेती पर 14 प्रतिशत बजट खर्च किया जाता था। लेकिन आज मात्र 2 प्रतिशत खर्च किया जाता है। खेती को घाटे का सौदा बनाया जा रहा है, जिसका असर किसान व उसके परिवार पर देखने को मिल रहा है। पिछले आंदोलन में संसद में क्यों नहीं घुसे, इसका मलाल गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि इस बार का आंदोलन चौकड़ी मारकर बैठने वाला नहीं होगा। पिछले आंदोलन का मलाल है कि संसद में क्यों नहीं घुसे। इस बार जाएंगे कि या तो हमारी मान लो या हमें मार दो। पिछला आंदोलन खत्म होने के बाद भी एमएसपी की लड़ाई आज तक लड़ रहे है। अब अफसोस है कि पहले क्यों नहीं लड़े। बड़ी भारी चूक हो गई। आज देश में नहीं रहा वोट का राज गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि 23 मार्च को भगत सिंह के शहीदी दिवस पर रैली रखी गई है। जिस सपने को लेकर भगत सिंह फांसी पर चढ़े थे, आज वो देश नहीं बना है। गोरे अंग्रेज चले गए और काले मन के काले अंग्रेज राज करने आ गए। क्योंकि वोट का राज तो रहा ही नहीं। जितने कंपनी के मालिक, पूंजीपति है, वो राज्यसभा के सदस्य है। कभी कोई किसान या मजदूर का बेटा राज्यसभा नहीं गया। किसी लठ लगे, गोली लगे तो मुझे दोष मत देना गुरनात सिंह चढूनी ने कहा कि 10 मार्च को हर तहसील पर ट्रैक्टर मार्च यानि रोष प्रदर्शन करें। 23 मार्च को लड़ाई का दिन है। इससे पहले सरकार के आगे हाथ जोड़ रहे हैं, लेकिन 23 मार्च को आर पार होगा। इस दौरान किसी को लठ लगे, मुकदमें लगे या गोली लग जाए तो मुझे दोष मत देना। सिर पर कफन बांधकर आना है। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार के आगे मोर्चा लगाने जा रहे है। हम हाथ नहीं उठाएंगे, मरने के लिए जा रहे है। सरकार को मजबूर करने का काम करेंगे। फिर भी बात नहीं मानी तो आगे जब भी कोई नेता गांव आए तो सोच समझकर आए, क्योंकि उनकी तसल्ली वहीं करेंगे।
रोहतक में मकडौली टोल पर पहुंचे भारती किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 10 मार्च को हर तहसील पर ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद 23 मार्च को संसद का घेराव करने के लिए दिल्ली कूच किया जाएगा। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि भारत में 23 करोड़ लोगों के पास इतनी आमदनी भी नहीं बची कि वह दो समय का खाना खा सके। देश की 80 करोड़ आगादी 5 किलो अनाज के रहमोकरम पर जिंदा है। भाजपा की नीति भी यही है कि पहले भूख दो, फिर भीख दो, उस भीख पर जो जनता जिंदा रहेगी, वह गुलामी करती रहेगी। किसान को दबाने पर भाजपा की नजर गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि भाजपा सरकार की नजर किसान के ऊपर है कि कैसे उन्हें दबाया जाए। हर आंधे घंटे में एक किसान कर्ज में डूबकर आत्महत्या कर रहा है। आगे आपका मुकाबला अमेरिका से है। भाजपा सरकार किसानों की तुलना अमेरिका से करवा रही है, जिससे किसान बर्बाद हो जाएगा। खेती पर 2 प्रतिशत खर्च कर रही सरकार गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि पहली पंचवर्षीय योजना में खेती पर 14 प्रतिशत बजट खर्च किया जाता था। लेकिन आज मात्र 2 प्रतिशत खर्च किया जाता है। खेती को घाटे का सौदा बनाया जा रहा है, जिसका असर किसान व उसके परिवार पर देखने को मिल रहा है। पिछले आंदोलन में संसद में क्यों नहीं घुसे, इसका मलाल गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि इस बार का आंदोलन चौकड़ी मारकर बैठने वाला नहीं होगा। पिछले आंदोलन का मलाल है कि संसद में क्यों नहीं घुसे। इस बार जाएंगे कि या तो हमारी मान लो या हमें मार दो। पिछला आंदोलन खत्म होने के बाद भी एमएसपी की लड़ाई आज तक लड़ रहे है। अब अफसोस है कि पहले क्यों नहीं लड़े। बड़ी भारी चूक हो गई। आज देश में नहीं रहा वोट का राज गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि 23 मार्च को भगत सिंह के शहीदी दिवस पर रैली रखी गई है। जिस सपने को लेकर भगत सिंह फांसी पर चढ़े थे, आज वो देश नहीं बना है। गोरे अंग्रेज चले गए और काले मन के काले अंग्रेज राज करने आ गए। क्योंकि वोट का राज तो रहा ही नहीं। जितने कंपनी के मालिक, पूंजीपति है, वो राज्यसभा के सदस्य है। कभी कोई किसान या मजदूर का बेटा राज्यसभा नहीं गया। किसी लठ लगे, गोली लगे तो मुझे दोष मत देना गुरनात सिंह चढूनी ने कहा कि 10 मार्च को हर तहसील पर ट्रैक्टर मार्च यानि रोष प्रदर्शन करें। 23 मार्च को लड़ाई का दिन है। इससे पहले सरकार के आगे हाथ जोड़ रहे हैं, लेकिन 23 मार्च को आर पार होगा। इस दौरान किसी को लठ लगे, मुकदमें लगे या गोली लग जाए तो मुझे दोष मत देना। सिर पर कफन बांधकर आना है। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार के आगे मोर्चा लगाने जा रहे है। हम हाथ नहीं उठाएंगे, मरने के लिए जा रहे है। सरकार को मजबूर करने का काम करेंगे। फिर भी बात नहीं मानी तो आगे जब भी कोई नेता गांव आए तो सोच समझकर आए, क्योंकि उनकी तसल्ली वहीं करेंगे।