मोनू सहनी सुसाइड केस की सीआईडी जांच शुरू:गांव पहुंची टीम, परिजन और ग्रामीणों से ली जानकारी; पुलिसकर्मी पर 4 लाख मांगने का लगाया था आरोप

दरभंगा में मोनू सहनी सुसाइड केस की जांच सीआईडी ने शुरू कर दी है। शुक्रवार को सीआईडी के डीआईजी जयंत कांत दरभंगा पहुंचे। सर्किट हाउस में मीटिंग के बाद मिथिला क्षेत्र के डीआईजी मनोज तिवारी, एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ खराजपुर गांव पहुंचे। सीआईडी के डीआईजी ने करीब एक घंटे तक गांव में रहकर मोनू कुमार के परिजनों से घटना के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की। मामले से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी जुटाई। बताया जा रहा है कि जांच टीम ने अधिकारियों को मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जानकारी जुटाने का निर्देश दिया है। पुलिस पर गंभीर आरोप के बाद सीआईडी जांच मामले को लेकर बिहार सरकार के मद्य निषेध मंत्री सह बहादुरपुर विधायक मदन सहनी ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद जांच सीआईडी स्तर पर शुरू की गई है। अब जानिए क्या है पूरा मामला खराजपुर निवासी जागेश्वर सहनी के पुत्र मोनू कुमार के घर चोरी के मोबाइल की लोकेशन के आधार पर टेक्निकल सेल की टीम पहुंची थी। टीम में सहायक दरोगा इंद्रदेव कुमार और एक सिपाही शामिल थे। टीम ने मोबाइल बरामद करने का प्रयास किया, लेकिन संबंधित मोबाइल बरामद नहीं हो सका। परिजनों के अनुसार, टीम ने 48 घंटे के भीतर मोबाइल उपलब्ध कराने की बात कही थी। आरोप है कि मोनू और उसके भाई रवि कुमार को मोबाइल उपलब्ध नहीं कराने पर किसी मामले में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी गई थी। मामले से बचने के लिए चार लाख रुपए की मांग भी की गई थी। इसी डर के कारण 17 अगस्त को दोपहर में मोनू ने घर के अंदर फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। मौत की सूचना मिलने के बाद गांव पहुंचे थे पुलिसकर्मी मोनू की मौत के बाद उसके भाई रवि कुमार ने टेक्निकल सेल के सहायक दरोगा इंद्रदेव कुमार को फोन कर घटना की जानकारी दी। रवि ने पुलिसकर्मी से घर पहुंचकर मोबाइल ले जाने की बात कही। इसके बाद तीन पुलिसकर्मी बिना नंबर की बाइक से खराजपुर पहुंचे। वहां पहुंचने पर उन्हें मोनू के आत्महत्या करने की जानकारी मिली। इसके बाद परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की गई, जिसमें सहायक दरोगा इंद्रदेव कुमार घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए डीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। परिजन ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी सादे लिबास में आए थे और फायरिंग करते हुए मौके से निकल गए। एसएसपी ने सहायक दरोगा को किया था निलंबित मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने के बाद एसएसपी ने सहायक दरोगा इंद्रदेव कुमार को निलंबित कर दिया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल बरामदगी से जुड़े मामले में 48 घंटे तक वरीय अधिकारियों को सूचना नहीं देने सहित अन्य बिंदुओं को गंभीरता से लिया गया। एसएसपी ने बताया कि सीआईडी के डीआईजी जयंत कांत अपनी टीम के साथ दरभंगा पहुंचे थे। टीम ने घटनास्थल और परिजनों से जानकारी लेने के साथ मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच की है। सीआईडी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Aug 22, 2026 - 09:05
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मोनू सहनी सुसाइड केस की सीआईडी जांच शुरू:गांव पहुंची टीम, परिजन और ग्रामीणों से ली जानकारी; पुलिसकर्मी पर 4 लाख मांगने का लगाया था आरोप
दरभंगा में मोनू सहनी सुसाइड केस की जांच सीआईडी ने शुरू कर दी है। शुक्रवार को सीआईडी के डीआईजी जयंत कांत दरभंगा पहुंचे। सर्किट हाउस में मीटिंग के बाद मिथिला क्षेत्र के डीआईजी मनोज तिवारी, एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ खराजपुर गांव पहुंचे। सीआईडी के डीआईजी ने करीब एक घंटे तक गांव में रहकर मोनू कुमार के परिजनों से घटना के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की। मामले से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी जुटाई। बताया जा रहा है कि जांच टीम ने अधिकारियों को मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जानकारी जुटाने का निर्देश दिया है। पुलिस पर गंभीर आरोप के बाद सीआईडी जांच मामले को लेकर बिहार सरकार के मद्य निषेध मंत्री सह बहादुरपुर विधायक मदन सहनी ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद जांच सीआईडी स्तर पर शुरू की गई है। अब जानिए क्या है पूरा मामला खराजपुर निवासी जागेश्वर सहनी के पुत्र मोनू कुमार के घर चोरी के मोबाइल की लोकेशन के आधार पर टेक्निकल सेल की टीम पहुंची थी। टीम में सहायक दरोगा इंद्रदेव कुमार और एक सिपाही शामिल थे। टीम ने मोबाइल बरामद करने का प्रयास किया, लेकिन संबंधित मोबाइल बरामद नहीं हो सका। परिजनों के अनुसार, टीम ने 48 घंटे के भीतर मोबाइल उपलब्ध कराने की बात कही थी। आरोप है कि मोनू और उसके भाई रवि कुमार को मोबाइल उपलब्ध नहीं कराने पर किसी मामले में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी गई थी। मामले से बचने के लिए चार लाख रुपए की मांग भी की गई थी। इसी डर के कारण 17 अगस्त को दोपहर में मोनू ने घर के अंदर फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। मौत की सूचना मिलने के बाद गांव पहुंचे थे पुलिसकर्मी मोनू की मौत के बाद उसके भाई रवि कुमार ने टेक्निकल सेल के सहायक दरोगा इंद्रदेव कुमार को फोन कर घटना की जानकारी दी। रवि ने पुलिसकर्मी से घर पहुंचकर मोबाइल ले जाने की बात कही। इसके बाद तीन पुलिसकर्मी बिना नंबर की बाइक से खराजपुर पहुंचे। वहां पहुंचने पर उन्हें मोनू के आत्महत्या करने की जानकारी मिली। इसके बाद परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की गई, जिसमें सहायक दरोगा इंद्रदेव कुमार घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए डीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। परिजन ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी सादे लिबास में आए थे और फायरिंग करते हुए मौके से निकल गए। एसएसपी ने सहायक दरोगा को किया था निलंबित मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने के बाद एसएसपी ने सहायक दरोगा इंद्रदेव कुमार को निलंबित कर दिया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल बरामदगी से जुड़े मामले में 48 घंटे तक वरीय अधिकारियों को सूचना नहीं देने सहित अन्य बिंदुओं को गंभीरता से लिया गया। एसएसपी ने बताया कि सीआईडी के डीआईजी जयंत कांत अपनी टीम के साथ दरभंगा पहुंचे थे। टीम ने घटनास्थल और परिजनों से जानकारी लेने के साथ मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच की है। सीआईडी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।