उत्रैणी मेले के समापन पर *मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी* का मानवीय और संवेदनशील चेहरा
उत्रैणी मेले के समापन पर *मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी* का मानवीय और संवेदनशील चेहरा
उत्रैणी मेले के समापन पर *मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी* का मानवीय और संवेदनशील चेहरा
आज उत्रैणी मेले के खात्मे के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और संवेदनशील व्यक्तित्व को एक बार फिर उजागर कर दिया। भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के बीच जब एक बुजुर्ग बाबा मुख्यमंत्री से मिलने का प्रयास कर रहे थे, तो स्वाभाविक रूप से सुरक्षा कर्मी उन्हें रोक रहे थे। लेकिन तभी मुख्यमंत्री धामी जी की पैनी नज़र उस बुजुर्ग पर पड़ी।
मुख्यमंत्री जी ने बिना एक पल गंवाए स्वयं सुरक्षा कर्मियों को इशारा कर बुजुर्ग बाबा को अपने पास बुलाया। यह केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि एक बेटे की तरह उन्होंने बाबा की बात ध्यानपूर्वक सुनी, उनका हाल-चाल जाना और पूरे अपनत्व के साथ संवाद किया।
इस छोटे से लेकिन अत्यंत भावुक क्षण ने यह साबित कर दिया कि *मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केवल सत्ता के शिखर पर बैठे प्रशासक नहीं, बल्कि ज़मीन से जुड़े हुए, संवेदनशील और संस्कारों में रचे-बसे जनसेवक हैं।* उनके लिए प्रोटोकॉल से बड़ा इंसान है, सुरक्षा घेरों से बड़ा मानवीय भाव है।
आज जब राजनीति में दूरी और दिखावे की चर्चा आम है, ऐसे समय में धामी जी का यह व्यवहार जनता के दिलों को छू गया। उत्रैणी मेले के मंच से लेकर आम जनमानस तक, यह संदेश स्पष्ट गया कि *उत्तराखंड का मुख्यमंत्री हर वर्ग, हर उम्र और हर व्यक्ति की पीड़ा को सुनने वाला नेतृत्व है।*
बुजुर्गों के प्रति सम्मान, परंपराओं के प्रति श्रद्धा और आम जनता के प्रति अपनत्व — यही धामी जी की राजनीति की पहचान है। यही कारण है कि उत्तराखंड की जनता उन्हें केवल मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि अपना *धाकड़ धामी* मानती है।
*जनता के मुख्यमंत्री, संवेदनशील मुख्यमंत्री, संस्कारों वाले मुख्यमंत्री — पुष्कर सिंह धामी।*



