सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में मौसम खराब, फिर भी बढ़िया पैदावार:1100 किलो की हुई बिक्री, सरस्वती-7, सुपर गोल्ड की रही डिमांड
चित्तौड़गढ़ के सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में इस साल मौसम साथ न देने के बावजूद भी अच्छी पैदावार देखने को मिली है। पिछले दो सालों की तुलना में इस बार सीताफल की क्वालिटी और मात्रा, दोनों ही बेहतर रहीं। अक्टूबर में समय से हटकर हुई बरसात के कारण फल जल्दी पक गए और उनकी तुड़ाई का समय भी पहले आ गया। चूंकि सीताफल को लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता, इसलिए किसानों और केंद्र को उन्हें जल्दी से जल्दी मार्केट में बेचने की जरूरत पड़ गई। जल्दी पकने से एक साथ बिक्री, स्टोरेज की नहीं रहती सुविधा अक्टूबर की बेमौसम बरसात ने सीताफलों के पकने की गति बढ़ा दी। आमतौर पर सीताफल धीरे पकते हैं, लेकिन इस साल मौसम बदलने से फल तेजी से तैयार हो गए। सीताफल जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए उन्हें लंबे समय के लिए स्टोर करना मुश्किल होता है। इस वजह से एक्सीलेंस सेंटर को एक साथ बड़ी मात्रा में सीताफल को मार्केट में उतारना पड़ा। समय से पहले पकने और गिरने के कारण कुछ फलों को नुकसान भी हुआ। उपनिदेशक जाट बोले—गिरे फलों से नुकसान, फिर भी अच्छी कमाई एक्सीलेंस सेंटर के उपनिदेशक शंकरलाल जाट ने बताया कि बदलते मौसम की वजह से कई सीताफल समय से पहले ही पककर जमीन पर गिर गए और खराब हो गए। इसके बावजूद कुल उत्पादन बेहतर रहा। इस साल मार्केट में लगभग 1100 किलो सीताफल बेचने में सफलता मिली। इसके साथ ही लगभग 200 किलो पल्प सेंटर पर ही सुरक्षित रखा गया है, जिसे जरूरत और मांग के हिसाब से बेचा जा रहा है। मार्केट में सीताफलों की कीमत ऊपर नीचे रही है लेकिन एवरेज कीमत 40 रुपए प्रति किलो माना जा रहा है। सरस्वती-7 किस्म रही सबसे लोकप्रिय, साइज और पल्प शानदार रहा इस साल सबसे अधिक उत्पादन और लोकप्रियता सरस्वती-7, सुपर गोल्ड और फिंगर प्रिंट किस्मों की रही। सरस्वती-7 का अधिकतम वजन इस बार 1250 ग्राम तक पहुंचा, जो पिछले कई सालों की तुलना में बड़ा आकार माना जाता है। इस किस्म की खासियत यह है कि इसमें 70 प्रतिशत तक पल्प रहता है और बीज कम होते हैं, इसलिए यह ग्राहक के लिए अधिक उपयोगी फल माना जाता है। किसानों के लिए भी यह किस्म फायदा देती है क्योंकि वजन और गुणवत्ता दोनों अच्छी रहती हैं। सुपर गोल्ड किस्म एक्सपोर्ट क्वालिटी की, वजन डेढ़ किलो तक पहुंचा सुपर गोल्ड किस्म ने भी इस साल बेहतर उत्पादन दिया। इसका वजन इस बार 700 ग्राम से लेकर डेढ़ किलो तक रहा। इस किस्म को एक्सपोर्ट क्वालिटी माना जाता है क्योंकि यह लंबे समय तक खराब नहीं होती। इसकी शेल्फ लाइफ ज्यादा होने के कारण व्यापारी और ग्राहक दोनों इसे पसंद करते हैं। इसके अलावा फिंगरप्रिंट क्वालिटी वाली किस्म भी लोगों को काफी रास आई है। इस किस्म का अधिकतम वजन 830 ग्राम दर्ज किया गया। कुछ फलों में फंगस की समस्या, जल्दी खराब होने की दिक्कत आई उपनिदेशक जाट ने बताया कि लंबे समय तक नमी रहने से कुछ सीताफलों में फंगस की समस्या भी देखने को मिली। ऐसे फल जल्दी खराब हो गए और उन्हें बेच पाना संभव नहीं था। मौसम में लगातार बदलाव होने के कारण यह समस्या अक्सर आती है, लेकिन इस बार इसका असर सीमित रहा। कुल उत्पादन पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। 100 किलो मशीन से निकला पल्प, 100 किलो हाथ से तैयार किया गया इस सीजन में कुल 200 किलो पल्प निकाला गया। इसमें से 100 किलो पल्प मशीन से और 100 किलो हाथ से निकाला गया। हाथ से निकाले गए पल्प में मेहनत ज्यादा लगती है, लेकिन उसका स्वाद और गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है। सेंटर पर पल्प की मांग लगातार बनी हुई है, जिसकी वजह से उत्पादन के साथ-साथ पल्प प्रोसेसिंग पर भी ध्यान दिया गया। शादी-ब्याह में भी आई पल्प की मांग, रिटेल शॉप पर खूब बिक्री सीताफल एक्सीलेंस सेंटर के बाहर लगी रिटेल शॉप पर पल्प की बिक्री लगातार होती रहती है। स्थानीय लोग घर के उपयोग के लिए इसे खरीदते हैं। इस बार शादी समारोह से भी 25 किलो पल्प की विशेष मांग आई है। क्योंकि सीताफल पल्प से मिठाइयां, शेक और कई प्रकार की डिशेज बनाई जा सकती हैं, इसलिए शादी-ब्याह के समय इसकी डिमांड बढ़ जाती है। पल्प की कीमत 200 रुपए किलो, खरीदारों में उत्साह बना हुआ है उपनिदेशक शंकरलाल जाट ने बताया कि पल्प की कीमत 200 रुपए प्रति किलो तय की गई है, जो ग्राहकों को स्वीकार्य लग रही है। अच्छी क्वालिटी और ताजगी के कारण खरीदार बिना झिझक इसे खरीद रहे हैं। स्थानीय बाजार में सीताफल और पल्प दोनों की अच्छी मांग बनी हुई है, जिससे एक्सीलेंस सेंटर को अच्छा फायदा हुआ है। पौधों की देखरेख में कृषि अनुसंधान अधिकारी सुनील कुमार खोईवाल और सहायक कृषि अधिकारी दिनेश चंद्र झवर ने अच्छा काम किया। मौसम खराब रहा, फिर भी साल को माना जाएगा सफल सीजन कुल मिलाकर, अक्टूबर की बरसात और मौसम की चुनौतियों के बावजूद चित्तौड़गढ़ के सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में इस साल का उत्पादन पिछले दो सालों की तुलना में काफी बेहतर रहा। फलों की गुणवत्ता, साइज और स्वाद ने किसानों और केंद्र दोनों को राहत दी है। एक्सीलेंस सेंटर का कहना है कि यदि अगले साल मौसम साथ देता है तो उत्पादन और भी बढ़ सकता है।
चित्तौड़गढ़ के सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में इस साल मौसम साथ न देने के बावजूद भी अच्छी पैदावार देखने को मिली है। पिछले दो सालों की तुलना में इस बार सीताफल की क्वालिटी और मात्रा, दोनों ही बेहतर रहीं। अक्टूबर में समय से हटकर हुई बरसात के कारण फल जल्दी पक गए और उनकी तुड़ाई का समय भी पहले आ गया। चूंकि सीताफल को लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता, इसलिए किसानों और केंद्र को उन्हें जल्दी से जल्दी मार्केट में बेचने की जरूरत पड़ गई। जल्दी पकने से एक साथ बिक्री, स्टोरेज की नहीं रहती सुविधा अक्टूबर की बेमौसम बरसात ने सीताफलों के पकने की गति बढ़ा दी। आमतौर पर सीताफल धीरे पकते हैं, लेकिन इस साल मौसम बदलने से फल तेजी से तैयार हो गए। सीताफल जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए उन्हें लंबे समय के लिए स्टोर करना मुश्किल होता है। इस वजह से एक्सीलेंस सेंटर को एक साथ बड़ी मात्रा में सीताफल को मार्केट में उतारना पड़ा। समय से पहले पकने और गिरने के कारण कुछ फलों को नुकसान भी हुआ। उपनिदेशक जाट बोले—गिरे फलों से नुकसान, फिर भी अच्छी कमाई एक्सीलेंस सेंटर के उपनिदेशक शंकरलाल जाट ने बताया कि बदलते मौसम की वजह से कई सीताफल समय से पहले ही पककर जमीन पर गिर गए और खराब हो गए। इसके बावजूद कुल उत्पादन बेहतर रहा। इस साल मार्केट में लगभग 1100 किलो सीताफल बेचने में सफलता मिली। इसके साथ ही लगभग 200 किलो पल्प सेंटर पर ही सुरक्षित रखा गया है, जिसे जरूरत और मांग के हिसाब से बेचा जा रहा है। मार्केट में सीताफलों की कीमत ऊपर नीचे रही है लेकिन एवरेज कीमत 40 रुपए प्रति किलो माना जा रहा है। सरस्वती-7 किस्म रही सबसे लोकप्रिय, साइज और पल्प शानदार रहा इस साल सबसे अधिक उत्पादन और लोकप्रियता सरस्वती-7, सुपर गोल्ड और फिंगर प्रिंट किस्मों की रही। सरस्वती-7 का अधिकतम वजन इस बार 1250 ग्राम तक पहुंचा, जो पिछले कई सालों की तुलना में बड़ा आकार माना जाता है। इस किस्म की खासियत यह है कि इसमें 70 प्रतिशत तक पल्प रहता है और बीज कम होते हैं, इसलिए यह ग्राहक के लिए अधिक उपयोगी फल माना जाता है। किसानों के लिए भी यह किस्म फायदा देती है क्योंकि वजन और गुणवत्ता दोनों अच्छी रहती हैं। सुपर गोल्ड किस्म एक्सपोर्ट क्वालिटी की, वजन डेढ़ किलो तक पहुंचा सुपर गोल्ड किस्म ने भी इस साल बेहतर उत्पादन दिया। इसका वजन इस बार 700 ग्राम से लेकर डेढ़ किलो तक रहा। इस किस्म को एक्सपोर्ट क्वालिटी माना जाता है क्योंकि यह लंबे समय तक खराब नहीं होती। इसकी शेल्फ लाइफ ज्यादा होने के कारण व्यापारी और ग्राहक दोनों इसे पसंद करते हैं। इसके अलावा फिंगरप्रिंट क्वालिटी वाली किस्म भी लोगों को काफी रास आई है। इस किस्म का अधिकतम वजन 830 ग्राम दर्ज किया गया। कुछ फलों में फंगस की समस्या, जल्दी खराब होने की दिक्कत आई उपनिदेशक जाट ने बताया कि लंबे समय तक नमी रहने से कुछ सीताफलों में फंगस की समस्या भी देखने को मिली। ऐसे फल जल्दी खराब हो गए और उन्हें बेच पाना संभव नहीं था। मौसम में लगातार बदलाव होने के कारण यह समस्या अक्सर आती है, लेकिन इस बार इसका असर सीमित रहा। कुल उत्पादन पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। 100 किलो मशीन से निकला पल्प, 100 किलो हाथ से तैयार किया गया इस सीजन में कुल 200 किलो पल्प निकाला गया। इसमें से 100 किलो पल्प मशीन से और 100 किलो हाथ से निकाला गया। हाथ से निकाले गए पल्प में मेहनत ज्यादा लगती है, लेकिन उसका स्वाद और गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है। सेंटर पर पल्प की मांग लगातार बनी हुई है, जिसकी वजह से उत्पादन के साथ-साथ पल्प प्रोसेसिंग पर भी ध्यान दिया गया। शादी-ब्याह में भी आई पल्प की मांग, रिटेल शॉप पर खूब बिक्री सीताफल एक्सीलेंस सेंटर के बाहर लगी रिटेल शॉप पर पल्प की बिक्री लगातार होती रहती है। स्थानीय लोग घर के उपयोग के लिए इसे खरीदते हैं। इस बार शादी समारोह से भी 25 किलो पल्प की विशेष मांग आई है। क्योंकि सीताफल पल्प से मिठाइयां, शेक और कई प्रकार की डिशेज बनाई जा सकती हैं, इसलिए शादी-ब्याह के समय इसकी डिमांड बढ़ जाती है। पल्प की कीमत 200 रुपए किलो, खरीदारों में उत्साह बना हुआ है उपनिदेशक शंकरलाल जाट ने बताया कि पल्प की कीमत 200 रुपए प्रति किलो तय की गई है, जो ग्राहकों को स्वीकार्य लग रही है। अच्छी क्वालिटी और ताजगी के कारण खरीदार बिना झिझक इसे खरीद रहे हैं। स्थानीय बाजार में सीताफल और पल्प दोनों की अच्छी मांग बनी हुई है, जिससे एक्सीलेंस सेंटर को अच्छा फायदा हुआ है। पौधों की देखरेख में कृषि अनुसंधान अधिकारी सुनील कुमार खोईवाल और सहायक कृषि अधिकारी दिनेश चंद्र झवर ने अच्छा काम किया। मौसम खराब रहा, फिर भी साल को माना जाएगा सफल सीजन कुल मिलाकर, अक्टूबर की बरसात और मौसम की चुनौतियों के बावजूद चित्तौड़गढ़ के सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में इस साल का उत्पादन पिछले दो सालों की तुलना में काफी बेहतर रहा। फलों की गुणवत्ता, साइज और स्वाद ने किसानों और केंद्र दोनों को राहत दी है। एक्सीलेंस सेंटर का कहना है कि यदि अगले साल मौसम साथ देता है तो उत्पादन और भी बढ़ सकता है।