बीकानेर में रेलवे क्रासिंग पर गेट अचानक गिरा, हादसा टला:सांखला फाटक पर नया स्लाइडिंग बूम गेट कुछ ही सैकंड में नीचे आया, बड़ा हादसा टला
बीकानेर रेलवे स्टेशन के ठीक पास स्थित सांखला फाटक रेलवे क्रॉसिंग पर सोमवार सुबह बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहां हाल ही में लगाया गया नया स्लाइडिंग बूम फाटक अचानक तेजी से नीचे आकर गिर गया। उस समय क्रॉसिंग से गुजर रहे लोग किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे। कुछ ही सेकंड के अंतर से एक बाइक सवार फाटक की चपेट में आने से बच गया। कुछ सेकंड का अंतर, टल गया बड़ा हादसा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिस समय फाटक गिरा, ठीक उसी समय एक बाइक क्रॉसिंग की ओर बढ़ रही थी। फाटक और बाइक के पहुंचने में महज कुछ सेकंड का अंतर रहा। यदि बाइक जरा-सी भी आगे होती तो फाटक सीधे बाइक सवार पर गिर सकता था। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। राहगीर ने बताया अचानक धड़ाम से गिरा फाटक घटना के समय मौजूद राहगीर अनंत श्रीमाली ने बताया कि आमतौर पर सांखला फाटक धीरे-धीरे नीचे आता है, जिससे लोग सतर्क हो जाते हैं। लेकिन सोमवार सुबह फाटक बिना किसी चेतावनी के तेजी से नीचे आया और धड़ाम से गिर पड़ा। उन्होंने कहा कि सौभाग्य से उस वक्त कोई व्यक्ति या वाहन सीधे इसकी चपेट में नहीं आया। नई तकनीक का फाटक है लगाया गया दरअसल रेलवे द्वारा हाल के दिनों में कई स्थानों पर पुराने फाटकों को बदलकर नई तकनीक से चलने वाले फाटक लगाए गए हैं। सांखला फाटक पर भी स्लाइडिंग बूम तकनीक वाला नया गेट लगाया गया है। यह गेट एक स्विच के जरिए अपने-आप नीचे-ऊपर होता है और इसमें मैन्युअल संचालन की जरूरत कम होती है। स्लाइडिंग बूम तकनीक कैसे काम करती है स्लाइडिंग बूम फाटक में मोटराइज्ड सिस्टम लगाया जाता है। ट्रेन के आने की सूचना मिलने पर कंट्रोल पैनल से स्विच दबाते ही फाटक ऊपर से नीचे की ओर तेजी से स्लाइड करता है। इसमें सेंसर और ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम लगे होते हैं, जिससे फाटक को जल्दी बंद और खोला जा सके। इसका उद्देश्य ट्रेन के आते समय क्रॉसिंग को जल्द सुरक्षित करना है। सुरक्षा पर उठे सवाल हालांकि फाटक के अचानक गिरने से इसकी तकनीकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस तरह फाटक बिना चेतावनी के तेजी से गिरेगा तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने रेलवे से इस गेट की तकनीकी जांच और संचालन प्रक्रिया में सुधार की मांग की है। रेलवे की निगरानी जरूरी इस घटना के बाद अब जरूरत है कि रेलवे नए लगाए गए फाटकों की नियमित तकनीकी जांच करे और ऐसा सिस्टम विकसित करे जिससे फाटक धीरे-धीरे नीचे आए तथा राहगीरों को पर्याप्त चेतावनी मिल सके। गनीमत रही कि इस बार बड़ा हादसा टल गया, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में जोखिम बढ़ सकता है।
बीकानेर रेलवे स्टेशन के ठीक पास स्थित सांखला फाटक रेलवे क्रॉसिंग पर सोमवार सुबह बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहां हाल ही में लगाया गया नया स्लाइडिंग बूम फाटक अचानक तेजी से नीचे आकर गिर गया। उस समय क्रॉसिंग से गुजर रहे लोग किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे। कुछ ही सेकंड के अंतर से एक बाइक सवार फाटक की चपेट में आने से बच गया। कुछ सेकंड का अंतर, टल गया बड़ा हादसा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिस समय फाटक गिरा, ठीक उसी समय एक बाइक क्रॉसिंग की ओर बढ़ रही थी। फाटक और बाइक के पहुंचने में महज कुछ सेकंड का अंतर रहा। यदि बाइक जरा-सी भी आगे होती तो फाटक सीधे बाइक सवार पर गिर सकता था। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। राहगीर ने बताया अचानक धड़ाम से गिरा फाटक घटना के समय मौजूद राहगीर अनंत श्रीमाली ने बताया कि आमतौर पर सांखला फाटक धीरे-धीरे नीचे आता है, जिससे लोग सतर्क हो जाते हैं। लेकिन सोमवार सुबह फाटक बिना किसी चेतावनी के तेजी से नीचे आया और धड़ाम से गिर पड़ा। उन्होंने कहा कि सौभाग्य से उस वक्त कोई व्यक्ति या वाहन सीधे इसकी चपेट में नहीं आया। नई तकनीक का फाटक है लगाया गया दरअसल रेलवे द्वारा हाल के दिनों में कई स्थानों पर पुराने फाटकों को बदलकर नई तकनीक से चलने वाले फाटक लगाए गए हैं। सांखला फाटक पर भी स्लाइडिंग बूम तकनीक वाला नया गेट लगाया गया है। यह गेट एक स्विच के जरिए अपने-आप नीचे-ऊपर होता है और इसमें मैन्युअल संचालन की जरूरत कम होती है। स्लाइडिंग बूम तकनीक कैसे काम करती है स्लाइडिंग बूम फाटक में मोटराइज्ड सिस्टम लगाया जाता है। ट्रेन के आने की सूचना मिलने पर कंट्रोल पैनल से स्विच दबाते ही फाटक ऊपर से नीचे की ओर तेजी से स्लाइड करता है। इसमें सेंसर और ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम लगे होते हैं, जिससे फाटक को जल्दी बंद और खोला जा सके। इसका उद्देश्य ट्रेन के आते समय क्रॉसिंग को जल्द सुरक्षित करना है। सुरक्षा पर उठे सवाल हालांकि फाटक के अचानक गिरने से इसकी तकनीकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस तरह फाटक बिना चेतावनी के तेजी से गिरेगा तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने रेलवे से इस गेट की तकनीकी जांच और संचालन प्रक्रिया में सुधार की मांग की है। रेलवे की निगरानी जरूरी इस घटना के बाद अब जरूरत है कि रेलवे नए लगाए गए फाटकों की नियमित तकनीकी जांच करे और ऐसा सिस्टम विकसित करे जिससे फाटक धीरे-धीरे नीचे आए तथा राहगीरों को पर्याप्त चेतावनी मिल सके। गनीमत रही कि इस बार बड़ा हादसा टल गया, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में जोखिम बढ़ सकता है।