पायलट की टोंक-दौसा मे चली, मगर अजमेर में निराशा:कांग्रेस के 45 में से 18 जिलाध्यक्ष डोटासरा की पसंद के, जयपुर शहर में भारी खींचतान
राजस्थान में कांग्रेस ने लंबे इंतजार के बाद 50 में से 45 जिलाध्यक्षों की घोषणा की। कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की पसंद का खास ख्याल रखा है। सबसे ज्यादा 18 जिलों में उनकी पसंद के नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी लगभग बराबर तवज्जो दी गई है। नेता प्रतिपक्ष सहित पार्टी में बड़ा कद रखने वाले कुछ नेताओं की पसंद पर भी मुहर लगाई है। प्रदेश कांग्रेस ने संगठन के हिसाब से राजस्थान को 50 जिलों में बांटा है। जयपुर सहित 3 जिलों में बड़े नेताओं के बीच अपने-अपने समर्थकों के नामों को लेकर खींचतान के चलते मामला फिलहाल अटक गया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… टोंक, दौसा और अजमेर की राजनीतिक घटना से पायलट को जोड़ा जाता है
प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने राजस्थान में तीन जगह से चुनाव लड़ा है - टोंक, दौसा और अजमेर। टोंक से वे विधायक हैं और दौसा व अजमेर से सांसद का चुनाव लड़े हैं। इन तीनों ही जिलों में उनके अपने समर्थक मौजूद हैं और कांग्रेस में इन तीनों जिलों की कोई भी राजनीतिक घटना को पायलट से जोड़कर देखा जाता है। सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट के साथ रहे रामजीलाल ओड को दौसा से जिला अध्यक्ष बनाया गया है। राजेश पायलट दुर्घटना के समय जिस जीप में सवार थे, उसमें रामजीलाल भी मौजूद थे और घायल हुए थे। सचिन पायलट के साथ शुरू से ही इनके अच्छे संबंध रहे हैं। रामजीलाल को फिर से दौसा जिले से रिपीट किया गया है। टोंक के अध्यक्ष के भी पायलट से पारिवारिक रिश्ते
टोंक जिले में अध्यक्ष बनाए गए सैयद सऊद सईदी के भी सचिन पायलट से पारिवारिक संबंध हैं। पायलट के ससुर रहे जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला के साथ सईदी के पिता ने पढ़ाई की थी। अब्दुल्ला और सईदी के पिता ने एक साथ जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल से MBBS किया था। दोनों रूम पार्टनर भी रहे थे। पायलट की 2004 में शादी हुई थी, तभी से सईदी परिवार से उनकी नजदीकी बनी हुई है। पायलट का टोंक विधानसभा चुनाव मैनेजमेंट भी सईदी परिवार ने देखा था। पायलट ने अजमेर से सांसद का चुनाव लड़ा था और तभी से पायलट के इस जिले में काफी समर्थक हैं। पायलट अजमेर शहर से हेमंत भाटी और ग्रामीण से राकेश पारीक को अध्यक्ष बनवाना चाह रहे थे। पिछले शहर अध्यक्ष विजय जैन और ग्रामीण अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह भी पायलट समर्थकों में ही गिने जाते हैं। इस लिस्ट में अजमेर शहर से जिलाध्यक्ष राजकुमार जयपाल बने हैं, जो गहलोत समर्थक माने जाते हैं। ग्रामीण से किशनगढ़ विधायक विकास चौधरी जिलाध्यक्ष बने हैं, जो डोटासरा समर्थक माने जाते हैं। सचिन पायलट समर्थकों को जगह आलाकमान ने डोटासरा का रखा मान, गहलोत को भी साधा
जिला अध्यक्ष की सूची में कांग्रेस ने 12 मौजूदा और 5 पूर्व विधायकों को शामिल किया है। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के गृह जिले (सीकर) समेत 8 पुराने जिलाध्यक्ष रिपीट किए गए हैं। जिला अध्यक्षों के कुल 45 नामों में करीब डेढ़ दर्जन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के समर्थक शामिल हैं। हालांकि गहलोत और डोटासरा के समर्थक समान ही हैं। गोविंद सिंह डोटासरा के समर्थक अशोक गहलोत के समर्थक माने जाने वाले जिलाध्यक्ष जयपुर शहर में भारी खींचतान
जयपुर शहर में जिला अध्यक्ष को लेकर कांग्रेस नेताओं के बीच भारी खींचतान चल रही है। इस कारण जयपुर शहर के अध्यक्ष के नाम की घोषणा फिलहाल नहीं की गई है। जिला अध्यक्ष के पैनल में दो नाम सबसे आगे चल रहे थे, लेकिन अब इनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सामने सांगानेर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले पुष्पेंद्र भारद्वाज का नाम सबसे आगे चल रहा था। गोविंद सिंह डोटासरा की पंसद के कारण भी पुष्पेंद्र का नाम लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन कांग्रेस की शर्त थी कि जिला अध्यक्ष का दावेदार वही रहेगा, जिसके ऊपर कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं हो। कहा जा रहा है कि आवेदन में पुष्पेंद्र ने खुद पर लगे अपराध को छिपाया, जो अब भारी पड़ रहा है। उन पर विधायकपुरी थाने में गंभीर प्रवृत्ति का मामला दर्ज है। पुष्पेंद्र के इस तथ्य को छिपाने और प्रदेश नेतृत्व को केस की जानकारी होते हुए भी उनके नाम की सिफारिश करने की बात आलाकमान को नागवार गुजरी है। इस दौड़ में दूसरा नाम सुनील शर्मा का था। पिछले लोकसभा चुनाव में जयपुर से टिकट तक फाइनल हो गया था। लेकिन उस दौरान कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उनके कुछ वीडियो सामने आए थे। माना जाता है कि इसी कारण उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं दिया गया। सूत्रों के अनुसार, एक बार फिर जयपुर शहर जिला अध्यक्ष को लेकर उनका नाम चलने लगा, तो पुराने वीडियो फिर आलाकमान तक पहुंचा दिए गए। इन दो नाम के अलावा मालवीय नगर (जयपुर) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ीं अर्चना शर्मा व पूर्व विधायक अमीन कागजी, ओबीसी वर्ग से ओम राजोरिया और एससी वर्ग से गोपाल नावरिया का नाम भी चल रहा है। 5 जिलाध्यक्षों के नाम अटके
फिलहाल 5 जिलों के जिलाध्यक्ष अब भी अटके हुए हैं। जयपुर शहर, राजसमंद, प्रतापगढ़, बारां और झालावाड़ के जिलाध्यक्ष अभी नहीं बने हैं। अंता सीट पर उपचुनाव के कारण बारां और झालावाड़ जिलों में जिलाध्यक्ष की रायशुमारी नहीं हुई थी। सूत्रों के अनुसार, जयपुर शहर के जैसे ही राजसमंद और प्रतापगढ़ में भी नामों पर सहमति नहीं बन पाई। चयन प्रक्रिया के अनुसार कांग्रेस ने इस बार जिलाध्यक्षों पर रायशुमारी करवाई थी। इसके लिए बाहरी राज्यों के नेताओं को पर्यवेक्षक बनाया था। पर्यवेक्षकों ने रायशुमारी के बाद हर जिले से 6-6 नेताओं का पैनल तैयार कर रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट पर संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की थी। इसके बाद राहुल गांधी को सिंगल नामों का पैनल दिया था।
राजस्थान में कांग्रेस ने लंबे इंतजार के बाद 50 में से 45 जिलाध्यक्षों की घोषणा की। कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की पसंद का खास ख्याल रखा है। सबसे ज्यादा 18 जिलों में उनकी पसंद के नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी लगभग बराबर तवज्जो दी गई है। नेता प्रतिपक्ष सहित पार्टी में बड़ा कद रखने वाले कुछ नेताओं की पसंद पर भी मुहर लगाई है। प्रदेश कांग्रेस ने संगठन के हिसाब से राजस्थान को 50 जिलों में बांटा है। जयपुर सहित 3 जिलों में बड़े नेताओं के बीच अपने-अपने समर्थकों के नामों को लेकर खींचतान के चलते मामला फिलहाल अटक गया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… टोंक, दौसा और अजमेर की राजनीतिक घटना से पायलट को जोड़ा जाता है
प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने राजस्थान में तीन जगह से चुनाव लड़ा है - टोंक, दौसा और अजमेर। टोंक से वे विधायक हैं और दौसा व अजमेर से सांसद का चुनाव लड़े हैं। इन तीनों ही जिलों में उनके अपने समर्थक मौजूद हैं और कांग्रेस में इन तीनों जिलों की कोई भी राजनीतिक घटना को पायलट से जोड़कर देखा जाता है। सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट के साथ रहे रामजीलाल ओड को दौसा से जिला अध्यक्ष बनाया गया है। राजेश पायलट दुर्घटना के समय जिस जीप में सवार थे, उसमें रामजीलाल भी मौजूद थे और घायल हुए थे। सचिन पायलट के साथ शुरू से ही इनके अच्छे संबंध रहे हैं। रामजीलाल को फिर से दौसा जिले से रिपीट किया गया है। टोंक के अध्यक्ष के भी पायलट से पारिवारिक रिश्ते
टोंक जिले में अध्यक्ष बनाए गए सैयद सऊद सईदी के भी सचिन पायलट से पारिवारिक संबंध हैं। पायलट के ससुर रहे जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला के साथ सईदी के पिता ने पढ़ाई की थी। अब्दुल्ला और सईदी के पिता ने एक साथ जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल से MBBS किया था। दोनों रूम पार्टनर भी रहे थे। पायलट की 2004 में शादी हुई थी, तभी से सईदी परिवार से उनकी नजदीकी बनी हुई है। पायलट का टोंक विधानसभा चुनाव मैनेजमेंट भी सईदी परिवार ने देखा था। पायलट ने अजमेर से सांसद का चुनाव लड़ा था और तभी से पायलट के इस जिले में काफी समर्थक हैं। पायलट अजमेर शहर से हेमंत भाटी और ग्रामीण से राकेश पारीक को अध्यक्ष बनवाना चाह रहे थे। पिछले शहर अध्यक्ष विजय जैन और ग्रामीण अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह भी पायलट समर्थकों में ही गिने जाते हैं। इस लिस्ट में अजमेर शहर से जिलाध्यक्ष राजकुमार जयपाल बने हैं, जो गहलोत समर्थक माने जाते हैं। ग्रामीण से किशनगढ़ विधायक विकास चौधरी जिलाध्यक्ष बने हैं, जो डोटासरा समर्थक माने जाते हैं। सचिन पायलट समर्थकों को जगह आलाकमान ने डोटासरा का रखा मान, गहलोत को भी साधा
जिला अध्यक्ष की सूची में कांग्रेस ने 12 मौजूदा और 5 पूर्व विधायकों को शामिल किया है। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के गृह जिले (सीकर) समेत 8 पुराने जिलाध्यक्ष रिपीट किए गए हैं। जिला अध्यक्षों के कुल 45 नामों में करीब डेढ़ दर्जन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के समर्थक शामिल हैं। हालांकि गहलोत और डोटासरा के समर्थक समान ही हैं। गोविंद सिंह डोटासरा के समर्थक अशोक गहलोत के समर्थक माने जाने वाले जिलाध्यक्ष जयपुर शहर में भारी खींचतान
जयपुर शहर में जिला अध्यक्ष को लेकर कांग्रेस नेताओं के बीच भारी खींचतान चल रही है। इस कारण जयपुर शहर के अध्यक्ष के नाम की घोषणा फिलहाल नहीं की गई है। जिला अध्यक्ष के पैनल में दो नाम सबसे आगे चल रहे थे, लेकिन अब इनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सामने सांगानेर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले पुष्पेंद्र भारद्वाज का नाम सबसे आगे चल रहा था। गोविंद सिंह डोटासरा की पंसद के कारण भी पुष्पेंद्र का नाम लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन कांग्रेस की शर्त थी कि जिला अध्यक्ष का दावेदार वही रहेगा, जिसके ऊपर कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं हो। कहा जा रहा है कि आवेदन में पुष्पेंद्र ने खुद पर लगे अपराध को छिपाया, जो अब भारी पड़ रहा है। उन पर विधायकपुरी थाने में गंभीर प्रवृत्ति का मामला दर्ज है। पुष्पेंद्र के इस तथ्य को छिपाने और प्रदेश नेतृत्व को केस की जानकारी होते हुए भी उनके नाम की सिफारिश करने की बात आलाकमान को नागवार गुजरी है। इस दौड़ में दूसरा नाम सुनील शर्मा का था। पिछले लोकसभा चुनाव में जयपुर से टिकट तक फाइनल हो गया था। लेकिन उस दौरान कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उनके कुछ वीडियो सामने आए थे। माना जाता है कि इसी कारण उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं दिया गया। सूत्रों के अनुसार, एक बार फिर जयपुर शहर जिला अध्यक्ष को लेकर उनका नाम चलने लगा, तो पुराने वीडियो फिर आलाकमान तक पहुंचा दिए गए। इन दो नाम के अलावा मालवीय नगर (जयपुर) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ीं अर्चना शर्मा व पूर्व विधायक अमीन कागजी, ओबीसी वर्ग से ओम राजोरिया और एससी वर्ग से गोपाल नावरिया का नाम भी चल रहा है। 5 जिलाध्यक्षों के नाम अटके
फिलहाल 5 जिलों के जिलाध्यक्ष अब भी अटके हुए हैं। जयपुर शहर, राजसमंद, प्रतापगढ़, बारां और झालावाड़ के जिलाध्यक्ष अभी नहीं बने हैं। अंता सीट पर उपचुनाव के कारण बारां और झालावाड़ जिलों में जिलाध्यक्ष की रायशुमारी नहीं हुई थी। सूत्रों के अनुसार, जयपुर शहर के जैसे ही राजसमंद और प्रतापगढ़ में भी नामों पर सहमति नहीं बन पाई। चयन प्रक्रिया के अनुसार कांग्रेस ने इस बार जिलाध्यक्षों पर रायशुमारी करवाई थी। इसके लिए बाहरी राज्यों के नेताओं को पर्यवेक्षक बनाया था। पर्यवेक्षकों ने रायशुमारी के बाद हर जिले से 6-6 नेताओं का पैनल तैयार कर रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट पर संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की थी। इसके बाद राहुल गांधी को सिंगल नामों का पैनल दिया था। टीकाराम जूली और भंवर जितेंद्र सिंह के समर्थक
आलाकमान ने अलवर से प्रकाश गंगावत और खैरथल-तिजारा से बलराम यादव को जिलाध्यक्ष बनाया है। ये दोनों नाम टीकाराम जूली और जितेंद्र सिंह की पसंद के बताए जाते हैं। बाड़मेर से लक्ष्मण सिंह गोदारा और बालोतरा से प्रियंका मेघवाल जैसे नाम पूर्व मंत्री हरीश चौधरी की पसंद के बताए जाते हैं। सिरोही से लीलाराम गरासिया नीरज डांगी के समर्थक माने जाते हैं। इनको सभी बड़े नेताओं का समर्थन ---- कांग्रेस जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा की यह खबर भी पढ़िए... राजस्थान में कांग्रेस ने 45 जिलाध्यक्ष किए घोषित:12 मौजूदा और 5 पूर्व विधायकों को जिम्मा; प्रदेशाध्यक्ष के गृह जिले समेत 8 पुराने रिपीट कांग्रेस ने 45 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है, कांग्रेस संगठन के हिसाब से 50 जिले हैं। 5 जिलाध्यक्षों की घोषणा अभी बाकी है। जिलाध्यक्षों में 12 मौजूदा विधायकों को मौका दिया है...(CLICK कर पढ़ें)