दतवासा में शिव महापुराण कथा 01 जनवरी से

वर्ष 2025 अस्ताचलगामी है और नूतन वर्ष द्वार पर अपने आगमन की दस्तक दे रहा है। एक ओर जहां नववर्ष के स्वागत हेतु रिसोर्ट, होटल, पर्यटन स्थल आदि सज रहे हैं वहीं नर्मदापुरम् अपनी सनातनी परम्पराओं को संवर्धित करते हुए नववर्ष का स्वागत धार्मिक आयोजनों के ...

Dec 31, 2025 - 15:19
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दतवासा में शिव महापुराण कथा 01 जनवरी से

फोटो: राम मन्दिर, ग्राम दतवासा
 

वर्ष 2025 अस्ताचलगामी है और नूतन वर्ष द्वार पर अपने आगमन की दस्तक दे रहा है। एक ओर जहां नववर्ष के स्वागत हेतु रिसोर्ट, होटल, पर्यटन स्थल आदि सज रहे हैं वहीं नर्मदापुरम् अपनी सनातनी परम्पराओं को संवर्धित करते हुए नववर्ष का स्वागत धार्मिक आयोजनों के माध्यम से करने जा रहा है। 

 

इसी श्रृंखला में नर्मदापुरम् जिले के ग्राम दतवासा में शिव महापुराण का आयोजन दिनांक 01 जनवरी 2026 से किया जा रहा है। कथा का आयोजन स्थानीय रिछारिया परिवार द्वारा किया जा रहा है। कथा का आयोजन स्थल राम मन्दिर प्रांगण, ग्राम दतवासा, जिला नर्मदापुरम् है।

 

ज्योतिषाचार्य पं. हेमन्त रिछारिया ने बताया कि शिव महापुराण का वाचन मृदुभाषी विद्वान वक्ता आचार्य पुष्कर परसाई के द्वारा किया जाएगा। कथा का प्रारंभ दिनांक 01 जनवरी 2026 को कलश यात्रा के साथ होगा।

कथा का वाचन प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक किया जाएगा। कथा का विश्राम एवं पूर्णाहुति दिनांक 07 जनवरी 2026 को विशाल भण्डारे के साथ होगी। आयोजनकर्ता रिछारिया परिवार द्वारा समस्त ग्रामवासियों एवं क्षेत्रवासियों को कथा श्रवण कर धर्मलाभ लेने लिए निमन्त्रित किया गया है।
 

शिवपुराण की महिमा-

शिव पुराण एक शैव पुराण है। इसमें 06 खण्ड और लगभग 24000 श्लोक हैं जिनमें भूतभावन भगवान शिव की महिमा एवं उनके अवतार और ज्योतिर्लिंगों का वर्णन किया गया है। शास्त्रानुसार सृष्टि के आरंभ में भगवान शिव ने स्वयं 100 करोड़ श्लोकों वाले इस पुराण की रचना की थी। 

 

युगांतर से इसे महर्षियों द्वारा इसे संक्षिप्त किया जाता रहा। वर्तमान में व्यास जी द्वारा शिवपुराण को 06 संहिताओं में विभाजित कर दिया गया है, जिसमें विद्येश्वर संहिता, रुद्र संहिता, कोटि रुद्र संहिता, कैलास संहिता, वायु संहिता, उमा संहिता प्रमुख हैं।

वर्तमान में रुद्र संहिता एवं विद्येश्वर के वाचन का प्रचलन अधिक है। व्यास जी के अनुसार कलियुग में शिवपुराण के श्रवण से जीव के समस्त पापों का नाश होकर जीव को उत्तम गति प्राप्त होती है।

Photo courtesy: Pandit Hemet Richariya