तारिक रहमान की 17 साल बाद बांग्लादेश की राजनीति में एंट्री, भारत के लिए कैसी रहेगी वापसी?
बांग्लादेश इन दिनों राजनीतिक उठापटक और हिंसा की चपेट में है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की लापरवाही से पूरा देश जल रहा है। हिंसा हो रही है, लोग मर रहे हैं। हिंसा, आगजनी और लूट की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। लीडर शरीफ उस्मान हादी ...
बांग्लादेश इन दिनों राजनीतिक उठापटक और हिंसा की चपेट में है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की लापरवाही से पूरा देश जल रहा है। हिंसा हो रही है, लोग मर रहे हैं। हिंसा, आगजनी और लूट की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। लीडर शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश की हालत और भी खराब हो चुकी है। यह सब तब हो रहा है, जब फरवरी 2026 में यहां चुनाव कराने की घोषणा की जा चुकी है। इन सबके बीच पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और BNP के एक्टिंग चेयरमैन तारिक रहमान 17 साल का वनवास काटकर बांग्लादेश लौट गए हैं।
मां से की मुलाकात : आगमन के बाद तारिक रहमान अपनी बीमार मां खालिदा जीता से मिलने एवरकेयर (EverCare) अस्पताल पहुंचे. इसके अलावा वह 27 दिसंबर को बांग्लादेश का वोटर बनने के लिए नेशनल NID कार्ड प्राप्त करेंगे। तारिक रहमान BNP के कार्यकारी अध्यक्ष और पार्टी के प्रमुख चेहरा हैं, जो आगामी चुनावों में पार्टी की रणनीति और प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बीएनपी को मिल सकती है बांग्लादेश की सत्ता : आवामी लीग पर बैन के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि बीएनपी बांग्लादेश की नई सत्ताधारी पार्टी बन सकती है। बीएनपी की अध्यक्ष खालिदा जिया लंबे समय से बीमार हैं और उनकी हालत लगातार नाजुक बनी है। ऐसे में उनके बेटे तारिक रहमान को पार्टी का कार्यवाहक चेयरमैन बना दिया गया है। इस बार के चुनाव में बीएनपी को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध लगने के बाद बीएनपी का कद और बढ़ गया है। ऐसे में तारिक रहमान को अगला प्रधानमंत्री बनने का प्रबल दावेदार बताया जा रहा है।
बीएनपी समर्थकों ने किया जोरदार स्वागत : बीएनपी पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों समेत बीएनपी के सीनियर नेताओं ने ढाका एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। तारिक के साथ उनकी पत्नी जुबैदा रहमान, बेटी बैरिस्टर जाइमा रहमान और दूसरे निजी सहयोगी भी बांग्लादेश आए हैं। ढाका पहुंचने के बाद तारिक अब एक जनसभा को संबोधित करने निकल चुके हैं। वह पार्टी नेताओं, समर्थकों और देश को थोड़ी देर के लिए संबोधित करेंगे। वह लोगों को धन्यवाद देंगे और अपनी सुरक्षित वापसी के लिए आभार जताने के लिए एक छोटी प्रार्थना करेंगे।
भारत के लिए कैसी रहेगी तारिक की वापसी : बांग्लादेश-भारत संबंध हमेशा संवेदनशील रहे हैं। अभी तक बांग्लादेश की सत्ता में रही अवामी लीग पार्टी और शेख हसीना को भारत समर्थक माना जाता था, जबकि बीएनपी के साथ संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। शेख हसीना के भारत में शरण लेने के बाद दोनों देशों के संबंध और खराब हो गए। तारिक रहमान ने हाल के साक्षात्कारों में स्पष्ट कहा है कि उनकी विदेश नीति "बांग्लादेश फर्स्ट" पर आधारित होगी। उन्होंने नारा दिया है "न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश सबसे पहले।" इसका मतलब है कि वे न भारत और न पाकिस्तान के साथ अंधाधुंध गठबंधन चाहते हैं, बल्कि बांग्लादेश के हित सर्वोपरि होंगे। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, "अगर भारत एक तानाशाह को शरण देकर बांग्लादेशी लोगों की नाराजगी मोल लेता है, तो हम कुछ नहीं कर सकते।" वे तीस्ता जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर बांग्लादेश के अधिकारों की बात करते हैं। हालांकि, हाल के संकेत सकारात्मक हैं।
बांग्लादेश पर भारत भी पैनी नजर : अभी तक बीएनपी की सोच भारत के प्रति कट्टर रही है। ऐसे में सवाल यह है कि अगर वह सत्ता में आई तो क्या भारत के प्रति बीएनपी की सोच बदल सकती है? बता दें कि बांग्लादेश में तेजी से बदल रही परिस्थितियों पर भारत भी पैनी नजर रख रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खालिदा जिया के स्वास्थ्य पर चिंता जताने के साथ मदद की पेशकश भी कर चुके हैं। इस पर बीएनपी भी आभार व्यक्त कर चुकी है। कई भारतीय विश्लेषक मानते हैं कि अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद बीएनपी एक उदार और लोकतांत्रिक विकल्प हो सकती है।
ऐसे भारत को उम्मीद है कि तारिक की सरकार क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग बनाए रखेगी। तारेक की वापसी बांग्लादेश की राजनीति में नया अध्याय खोलेगी। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस से उनकी लंदन में मुलाकात हो चुकी है। चुनाव सुधार और लोकतंत्र की बहाली उनके एजेंडे में हैं। लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। क्योंकि जमात-ए-इस्लामी जैसे इस्लामी दल प्रतिद्वंद्वी हैं और देश में अस्थिरता कायम है।
कौन हैं तारिक रहमान : तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति रहे जियाउर रहमान और तीन बार प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं। तारिक रहमान को बांग्लादेश की राजनीति का 'क्राउन प्रिंस' कहा जा रहा है। वैसे तो उनकी वापसी फरवरी 2026 में संसदीय चुनावों के दौरान होने वाली थी, लेकिन बदली परिस्थितियों के बीच वह 25 दिसंबर को ही ब्रिटेन से वापस आ गए। बांग्लादेश वापसी करने से पहले तारिक रहमान 17 साल का निर्वसन झेल चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर बैन लगाए जाने और चुनावों में उनकी गैर-मौजूदगी की संभावनाओं के साथ खालिदा जिया की गंभीर हालत के चलते अब तारिक रहमान को ही देश का अगला किंग माना जा रहा है। ऐसे में बांग्लादेश की राजनीति में उनका कद बढ़ गया है।
Edited By: Navin Rangiyal



