औरंगाबाद में फार्मर रजिस्ट्री अभियान तेज:हरी झंडी दिखाकर रथ किया रवाना, डीएओ बोले- किसान डिजिटल पहचान से जुड़ेंगे
किसानों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में औरंगाबाद में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। “फार्मर रजिस्ट्री किसान की डिजिटल पहचान” अभियान को व्यापक रूप देने के उद्देश्य से कृषि विभाग की ओर से संचालित फार्मर रजिस्ट्री प्रचार रथ को संयुक्त कृषि भवन परिसर से जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर जिला उद्यान पदाधिकारी श्रीकांत, सहायक निदेशक (रसायन), सहायक निदेशक (भूमि संरक्षण) समेत कृषि विभाग के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज ने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों में फार्मर रजिस्ट्री प्रचार रथ भेजे जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इस योजना की जानकारी दी जा सके और प्रथम चरण में आयोजित शिविरों के दौरान किसानों की फार्मर रजिस्ट्री आईडी तैयार कर उन्हें डिजिटल पहचान उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान पूरी तरह कैंप मोड में चलाया जा रहा है, जिससे पात्र किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। 18 से 21 जनवरी तक चलाया जाएगा दूसरा चरण उन्होंने जानकारी दी कि फार्मर रजिस्ट्री के प्रथम चरण के शिविर 6 जनवरी से 9 जनवरी तक आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि द्वितीय चरण के शिविर 18 जनवरी से 21 जनवरी तक निर्धारित हैं। जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद के निर्देश पर कृषि विभाग व राजस्व और भूमि सुधार विभाग के सभी पदाधिकारियों और कर्मियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिविरों में पूरी तत्परता के साथ काम करते हुए सभी पात्र लाभुकों का ई-केवाईसी सत्यापन पूरा कराया जाए और उनकी फार्मर रजिस्ट्री आईडी बनाना सुनिश्चित किया जाए। यह अभियान पंचायतवार आयोजित किया जा रहा है। पंचायत सरकार भवनों और अन्य सरकारी भवनों में शिविर लगाए जाएंगे, जहां कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार और राजस्व कर्मचारी की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। जिला प्रशासन ने सभी किसान भाई-बहनों से अपील की है कि वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ स्वयं शिविरों में पहुंचकर अपनी फार्मर रजिस्ट्री अवश्य बनवाएं। किसानों को मिलेगा योजनाओं का फायदा फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों को कई महत्वपूर्ण फायदा मिलेंगे। इससे किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा फायदा हासिल करने में आसानी होगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादों की बिक्री, फसल क्षति की स्थिति में वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का निर्बाध फायदा मिलने में यह रजिस्ट्री सहायक साबित होगी। बता दें कि फार्मर रजिस्ट्री, एग्री स्टैक परियोजना का एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कृषि सेवाओं को आधुनिक, सरल और प्रभावी बनाना है। इसके तहत प्रत्येक किसान की एक विशिष्ट फार्मर आईडी तैयार की जाती है, जिसमें भूमि संबंधी विवरण और आधार संख्या को डिजिटल रूप से जोड़ा जाता है। बिहार भूमि डेटाबेस के समेकन के माध्यम से समान नाम और पिता के नाम वाले किसानों की जमाबंदी का ऑनलाइन बकेट तैयार किया गया है, जिसके आधार पर राज्य स्तर पर फार्मर रजिस्ट्री बनाई जा रही है। अनिवार्य होगा फार्मर रजिस्ट्री पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के लाभुकों के लिए आगामी किस्त का फायदा पाने के लिए फार्मर रजिस्ट्री वेब पोर्टल या मोबाइल एप के माध्यम से बायोमेट्रिक अथवा फेस ऑथेंटिकेशन की ओर से ई-केवाईसी सत्यापन और भूमि संबंधी दावा करना अनिवार्य होगा। फार्मर रजिस्ट्री बनवाने के लिए किसानों को आधार कार्ड, स्वयं के नाम की जमाबंदी से संबंधित भूमि दस्तावेज और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से लाना होगा। प्रक्रिया के तहत पहले कृषि समन्वयक या किसान सलाहकार की ओर से ई-केवाईसी की जाएगी, इसके बाद हल्का कर्मचारी भूमि दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। सत्यापन पूरा होने के बाद ई-केवाईसी और साइनिंग की प्रक्रिया पूरी कर किसान की फार्मर आईडी तैयार की जाएगी।
किसानों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में औरंगाबाद में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। “फार्मर रजिस्ट्री किसान की डिजिटल पहचान” अभियान को व्यापक रूप देने के उद्देश्य से कृषि विभाग की ओर से संचालित फार्मर रजिस्ट्री प्रचार रथ को संयुक्त कृषि भवन परिसर से जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर जिला उद्यान पदाधिकारी श्रीकांत, सहायक निदेशक (रसायन), सहायक निदेशक (भूमि संरक्षण) समेत कृषि विभाग के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज ने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों में फार्मर रजिस्ट्री प्रचार रथ भेजे जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इस योजना की जानकारी दी जा सके और प्रथम चरण में आयोजित शिविरों के दौरान किसानों की फार्मर रजिस्ट्री आईडी तैयार कर उन्हें डिजिटल पहचान उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान पूरी तरह कैंप मोड में चलाया जा रहा है, जिससे पात्र किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। 18 से 21 जनवरी तक चलाया जाएगा दूसरा चरण उन्होंने जानकारी दी कि फार्मर रजिस्ट्री के प्रथम चरण के शिविर 6 जनवरी से 9 जनवरी तक आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि द्वितीय चरण के शिविर 18 जनवरी से 21 जनवरी तक निर्धारित हैं। जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद के निर्देश पर कृषि विभाग व राजस्व और भूमि सुधार विभाग के सभी पदाधिकारियों और कर्मियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिविरों में पूरी तत्परता के साथ काम करते हुए सभी पात्र लाभुकों का ई-केवाईसी सत्यापन पूरा कराया जाए और उनकी फार्मर रजिस्ट्री आईडी बनाना सुनिश्चित किया जाए। यह अभियान पंचायतवार आयोजित किया जा रहा है। पंचायत सरकार भवनों और अन्य सरकारी भवनों में शिविर लगाए जाएंगे, जहां कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार और राजस्व कर्मचारी की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। जिला प्रशासन ने सभी किसान भाई-बहनों से अपील की है कि वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ स्वयं शिविरों में पहुंचकर अपनी फार्मर रजिस्ट्री अवश्य बनवाएं। किसानों को मिलेगा योजनाओं का फायदा फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों को कई महत्वपूर्ण फायदा मिलेंगे। इससे किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा फायदा हासिल करने में आसानी होगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादों की बिक्री, फसल क्षति की स्थिति में वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का निर्बाध फायदा मिलने में यह रजिस्ट्री सहायक साबित होगी। बता दें कि फार्मर रजिस्ट्री, एग्री स्टैक परियोजना का एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कृषि सेवाओं को आधुनिक, सरल और प्रभावी बनाना है। इसके तहत प्रत्येक किसान की एक विशिष्ट फार्मर आईडी तैयार की जाती है, जिसमें भूमि संबंधी विवरण और आधार संख्या को डिजिटल रूप से जोड़ा जाता है। बिहार भूमि डेटाबेस के समेकन के माध्यम से समान नाम और पिता के नाम वाले किसानों की जमाबंदी का ऑनलाइन बकेट तैयार किया गया है, जिसके आधार पर राज्य स्तर पर फार्मर रजिस्ट्री बनाई जा रही है। अनिवार्य होगा फार्मर रजिस्ट्री पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के लाभुकों के लिए आगामी किस्त का फायदा पाने के लिए फार्मर रजिस्ट्री वेब पोर्टल या मोबाइल एप के माध्यम से बायोमेट्रिक अथवा फेस ऑथेंटिकेशन की ओर से ई-केवाईसी सत्यापन और भूमि संबंधी दावा करना अनिवार्य होगा। फार्मर रजिस्ट्री बनवाने के लिए किसानों को आधार कार्ड, स्वयं के नाम की जमाबंदी से संबंधित भूमि दस्तावेज और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से लाना होगा। प्रक्रिया के तहत पहले कृषि समन्वयक या किसान सलाहकार की ओर से ई-केवाईसी की जाएगी, इसके बाद हल्का कर्मचारी भूमि दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। सत्यापन पूरा होने के बाद ई-केवाईसी और साइनिंग की प्रक्रिया पूरी कर किसान की फार्मर आईडी तैयार की जाएगी।