उद्धव बोले- मैं पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार:शिंदे का आरोप- उद्धव ने सत्ता के लिए बाल ठाकरे की विचारधारा छोड़ी

शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर शुक्रवार को उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना ने मुंबई में अलग-अलग रैलियां और कार्यक्रम किए। उद्धव गुट का कार्यक्रम सायन के षणमुखानंद हॉल में हुआ। शिंदे गुट का गोरेगांव के नेस्को सेंटर में आयोजित हुआ। शिवसेना (UBT) चीफ उद्धव ने कहा- कांग्रेस के साथ हमारे पॉलिटिकल मतभेद रहे हैं, लेकिन उसने कभी शिवसेना को खत्म करने की कोशिश नहीं की, जैसा BJP कर रही है। देश एक पार्टी, कोई चुनाव नहीं की तरफ बढ़ रहा है। यह डेमोक्रेसी के लिए खतरा है। उद्धव ने कहा, ‘अगर आपको मुझ पर भरोसा और विश्वास नहीं है तो मैं पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हूं। पार्टी के 6 सांसदों की बगावत से शिवसैनिक निराश नहीं हैं, बल्कि जोश में हैं।’ वहीं, गोरेगांव के कार्यक्रम में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने सत्ता के लिए बाल ठाकरे की विचारधारा को छोड़ दिया। जिन दलों का बालासाहेब विरोध करते थे, उद्धव उन्हीं के साथ चले गए। शिंदे बोले- 2022 में हुई टूट का जनता का समर्थन मिला गोरेगांव के नेस्को सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने 2022 में शिवसेना में हुई टूट का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनकी बगावत को जनता का समर्थन मिला है। आज उनकी अगुवाई वाली शिवसेना के पास विधायक, सांसद और स्थानीय निकायों में मजबूत प्रतिनिधित्व है। शिंदे ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे चाहते थे कि शिवसेना गांव-गांव तक पहुंचे और कार्यकर्ताओं ने मेहनत करके पार्टी को देश की बड़ी राजनीतिक ताकत बनाया। बालासाहेब की विरासत नाम या संपत्ति से नहीं, बल्कि काम से आगे बढ़ती है। दावा किया कि शिंदे बोले- महायुति में मतभेद नहीं महायुति गठबंधन में मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए शिंदे ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उनके मजबूत रिश्ते हैं। दोनों एक टीम की तरह काम कर रहे हैं और सरकार का मुख्य एजेंडा विकास है। शिंदे ने भरोसा दिलाया कि महाराष्ट्र सरकार की लाड़की बहिन योजना जारी रहेगी और इसे बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने वंशवाद पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी में पद योग्यता के आधार पर मिलते हैं और एक सामान्य कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री बन सकता है। ठाकरे गुट में टूट पर भास्कर के 2 कार्टून… उद्धव ठाकरे की बैठक में 3 सांसद नहीं पहुंचे थे बागी सांसद बोले- ठाकरे गुट कांग्रेस में विलय चाहता था बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को सौंपे पत्र में दावा किया है कि ठाकरे गुट के कुछ वरिष्ठ नेता शिवसेना का कांग्रेस में विलय चाहते थे। उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे पार्टी की मूल विचारधारा से दूर चले गए हैं, इसलिए पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए अलग होना जरूरी है। शिवसेना नेता चंद्रकांत खैरे ने दावा किया है कि ये सांसद शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं। इसे उन्होंने महाराष्ट्र में चल रहे "ऑपरेशन टाइगर" का हिस्सा बताया। पार्टी में 4 साल में दूसरी बार टूट जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना नाम और धनुष-बाण चुनाव चिह्न दिया था। अब 6 सांसदों की बगावत को पिछले चार साल में पार्टी के लिए दूसरी बड़ी टूट माना जा रहा है। 6 सांसदों के गुट को दल-बदल कानून से मिल सकती है राहत लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी दल में टूट के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। यानी अगर 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो वे खुद को वैध गुट बताने का दावा कर सकते हैं। इसी वजह से 6 सांसदों के बगावत करने की खबर राजनीतिक और कानूनी, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, सिर्फ अलग गुट बनाना ही काफी नहीं होगा। आगे चलकर इन सांसदों को किसी दूसरे दल में विलय की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है, ताकि उनकी स्थिति कानूनी रूप से और मजबूत हो सके। पिछले चार दिन में क्या-क्या हुआ… 18 जून: उद्धव ठाकरे की बुलाई संसदीय दल की बैठक से 6 सांसद दूर रहे। सांसदों ने स्पीकर को पत्र सौंपकर अलग होने की वजह बताई। 17 जून: शिंदे गुट के नेताओं ने दावा किया कि 6 सांसद अलग गुट बनाने के लिए सहमत हो चुके हैं। इसके बाद संजय राउत, अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। 16 जून: अलग-अलग शहरों से सांसदों को दिल्ली लाया गया। संजय राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को तोड़ने के लिए 50 करोड़ रुपए तक का ऑफर दिया गया। 15 जून: 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा शुरू हुई। दावा किया गया कि उद्धव गुट के 6 सांसद शिंदे गुट में जा सकते हैं। संजय राउत ने इन दावों को खारिज किया था। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… बागी सांसद बोले- ठाकरे गुट कांग्रेस में विलय चाहता है:इसलिए अलग हुए; स्पीकर को चिट्ठी सौंपी, शिवसेना शिंदे गुट में शामिल होंगे शिवसेना में उसके स्थापना दिवस यानी 19 जून से ठीक एक दिन पहले बड़ी टूट हो गई। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने बगावत कर दी है। एक दिन पहले इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी सौंपी थी। पूरी खबर पढ़ें…

Jun 23, 2026 - 08:38
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उद्धव बोले- मैं पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार:शिंदे का आरोप- उद्धव ने सत्ता के लिए बाल ठाकरे की विचारधारा छोड़ी
शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर शुक्रवार को उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना ने मुंबई में अलग-अलग रैलियां और कार्यक्रम किए। उद्धव गुट का कार्यक्रम सायन के षणमुखानंद हॉल में हुआ। शिंदे गुट का गोरेगांव के नेस्को सेंटर में आयोजित हुआ। शिवसेना (UBT) चीफ उद्धव ने कहा- कांग्रेस के साथ हमारे पॉलिटिकल मतभेद रहे हैं, लेकिन उसने कभी शिवसेना को खत्म करने की कोशिश नहीं की, जैसा BJP कर रही है। देश एक पार्टी, कोई चुनाव नहीं की तरफ बढ़ रहा है। यह डेमोक्रेसी के लिए खतरा है। उद्धव ने कहा, ‘अगर आपको मुझ पर भरोसा और विश्वास नहीं है तो मैं पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हूं। पार्टी के 6 सांसदों की बगावत से शिवसैनिक निराश नहीं हैं, बल्कि जोश में हैं।’ वहीं, गोरेगांव के कार्यक्रम में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने सत्ता के लिए बाल ठाकरे की विचारधारा को छोड़ दिया। जिन दलों का बालासाहेब विरोध करते थे, उद्धव उन्हीं के साथ चले गए। शिंदे बोले- 2022 में हुई टूट का जनता का समर्थन मिला गोरेगांव के नेस्को सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने 2022 में शिवसेना में हुई टूट का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनकी बगावत को जनता का समर्थन मिला है। आज उनकी अगुवाई वाली शिवसेना के पास विधायक, सांसद और स्थानीय निकायों में मजबूत प्रतिनिधित्व है। शिंदे ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे चाहते थे कि शिवसेना गांव-गांव तक पहुंचे और कार्यकर्ताओं ने मेहनत करके पार्टी को देश की बड़ी राजनीतिक ताकत बनाया। बालासाहेब की विरासत नाम या संपत्ति से नहीं, बल्कि काम से आगे बढ़ती है। दावा किया कि शिंदे बोले- महायुति में मतभेद नहीं महायुति गठबंधन में मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए शिंदे ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उनके मजबूत रिश्ते हैं। दोनों एक टीम की तरह काम कर रहे हैं और सरकार का मुख्य एजेंडा विकास है। शिंदे ने भरोसा दिलाया कि महाराष्ट्र सरकार की लाड़की बहिन योजना जारी रहेगी और इसे बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने वंशवाद पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी में पद योग्यता के आधार पर मिलते हैं और एक सामान्य कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री बन सकता है। ठाकरे गुट में टूट पर भास्कर के 2 कार्टून… उद्धव ठाकरे की बैठक में 3 सांसद नहीं पहुंचे थे बागी सांसद बोले- ठाकरे गुट कांग्रेस में विलय चाहता था बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को सौंपे पत्र में दावा किया है कि ठाकरे गुट के कुछ वरिष्ठ नेता शिवसेना का कांग्रेस में विलय चाहते थे। उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे पार्टी की मूल विचारधारा से दूर चले गए हैं, इसलिए पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए अलग होना जरूरी है। शिवसेना नेता चंद्रकांत खैरे ने दावा किया है कि ये सांसद शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं। इसे उन्होंने महाराष्ट्र में चल रहे "ऑपरेशन टाइगर" का हिस्सा बताया। पार्टी में 4 साल में दूसरी बार टूट जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना नाम और धनुष-बाण चुनाव चिह्न दिया था। अब 6 सांसदों की बगावत को पिछले चार साल में पार्टी के लिए दूसरी बड़ी टूट माना जा रहा है। 6 सांसदों के गुट को दल-बदल कानून से मिल सकती है राहत लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी दल में टूट के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। यानी अगर 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो वे खुद को वैध गुट बताने का दावा कर सकते हैं। इसी वजह से 6 सांसदों के बगावत करने की खबर राजनीतिक और कानूनी, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, सिर्फ अलग गुट बनाना ही काफी नहीं होगा। आगे चलकर इन सांसदों को किसी दूसरे दल में विलय की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है, ताकि उनकी स्थिति कानूनी रूप से और मजबूत हो सके। पिछले चार दिन में क्या-क्या हुआ… 18 जून: उद्धव ठाकरे की बुलाई संसदीय दल की बैठक से 6 सांसद दूर रहे। सांसदों ने स्पीकर को पत्र सौंपकर अलग होने की वजह बताई। 17 जून: शिंदे गुट के नेताओं ने दावा किया कि 6 सांसद अलग गुट बनाने के लिए सहमत हो चुके हैं। इसके बाद संजय राउत, अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। 16 जून: अलग-अलग शहरों से सांसदों को दिल्ली लाया गया। संजय राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को तोड़ने के लिए 50 करोड़ रुपए तक का ऑफर दिया गया। 15 जून: 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा शुरू हुई। दावा किया गया कि उद्धव गुट के 6 सांसद शिंदे गुट में जा सकते हैं। संजय राउत ने इन दावों को खारिज किया था। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… बागी सांसद बोले- ठाकरे गुट कांग्रेस में विलय चाहता है:इसलिए अलग हुए; स्पीकर को चिट्ठी सौंपी, शिवसेना शिंदे गुट में शामिल होंगे शिवसेना में उसके स्थापना दिवस यानी 19 जून से ठीक एक दिन पहले बड़ी टूट हो गई। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने बगावत कर दी है। एक दिन पहले इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी सौंपी थी। पूरी खबर पढ़ें…