Iran War का China की Economy पर असर, Export धीमा, Import ने तोड़ा नवंबर 2021 का रिकॉर्ड

ईरान युद्ध के झटकों की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। मार्च के महीने में चीन के निर्यात (एक्सपोर्ट) की रफ्तार सुस्त पड़ गई है, जबकि आयात (इंपोर्ट) में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। असल में हॉर्मुज जलडमरूमध्य में चल रही उथल-पुथल की वजह से सामान लाने-ले जाने का खर्च, कच्चा माल और एनर्जी की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि चीन अपने बड़े घरेलू बाजार और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम की बदौलत इस संकट को अन्य देशों के मुकाबले बेहतर तरीके से झेल लेगा। चीन के सीमा शुल्क विभाग (कस्टम विभाग) द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में चीन का निर्यात पिछले साल के मुकाबले 2.5 प्रतिशत बढ़कर 321.03 अरब डॉलर रहा, जो अर्थशास्त्रियों के 4 प्रतिशत के अनुमान से कम है। वहीं, दूसरी तरफ आयात में 27.8 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है, जो नवंबर 2021 के बाद सबसे ज्यादा है। यह आयात 269.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि जानकारों ने सिर्फ 5.62 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अंदाजा लगाया था। इस बढ़त के साथ चीन का मासिक व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) 51.1 अरब डॉलर रहा।इसे भी पढ़ें: PoK के नजदीक China ने बना दी नई County Cenling, भारत को घेरने के लिए चली रणनीतिक चालआयात में आए इस बड़े उछाल की मुख्य वजह कच्चे माल (कमोडिटी) की कीमतों का बढ़ना है। उदाहरण के तौर पर, तांबे (कॉपर) के आयात की कीमत पिछले साल के मुकाबले करीब 67 प्रतिशत बढ़ गई है, जबकि इसकी मात्रा (वॉल्यूम) में केवल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसी तरह, अनगढ़े तांबे और उससे बने उत्पादों के आयात की वैल्यू भी 21 प्रतिशत बढ़ गई, जबकि हकीकत में इनकी मंगाने वाली मात्रा में 11 प्रतिशत की गिरावट आई थी। सीधी बात यह है कि चीन को अब कम सामान के लिए भी बहुत ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। आयात पिछले महीने 27.8 प्रतिशत बढ़ा जो इस वर्ष के पहले दो महीनों में सालाना आधार पर 19.8 प्रतिशत की वृद्धि से अधिक है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ईरान के साथ जारी युद्ध के प्रभाव से इस वर्ष चीनी निर्यात की समग्र वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है। इसे भी पढ़ें: ईरान तो बहाना, असल निशाना China? US के Hormuz Blockade से महायुद्ध का खतरा बढ़ाफ्रांसीसी बैंक नैटिक्सिस के एशिया प्रशांत क्षेत्र के वरिष्ठ अर्थशास्त्री गैरी एनजी ने कहा कि ईरान युद्ध के वैश्विक मांग और आपूर्ति शृंखलाओं पर असर पड़ने के कारण चीन के निर्यात में गिरावट आई है। बैंक ऑफ अमेरिका की प्रबंध निदेशक हेलेन कियाओ के नेतृत्व में अर्थशास्त्रियों ने एक हालिया शोध पत्र में लिखा कि जनवरी और फरवरी में चीन के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद युद्ध के मद्देनजर ऊर्जा संकट के कारण मांग में कमी आने के आसार हैं। विश्लेषक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मई में प्रस्तावित बीजिंग यात्रा पर भी करीबी नजर रख रहे हैं जहां वह चीन के नेता शी चिनफिंग से मुलाकात करेंगे। चीनी नेताओं ने 2026 के लिए वार्षिक आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य 4.5 से पांच प्रतिशत निर्धारित किया है जो 1991 के बाद से सबसे कम है। चीन ने मजबूत निर्यात के दम पर 2025 के लिए अपने करीब पांच प्रतिशत आर्थिक वृद्धि लक्ष्य को हासिल कर लिया है। इसमें रिकॉर्ड उच्च स्तर का 1200 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष शामिल है। विश्लेषकों का कहना है कि निर्यात इस वर्ष आर्थिक विस्तार को बनाए रखने के लिए एक प्रमुख चालक बना रहेगा क्योंकि चीन में संपत्ति क्षेत्र में लंबे समय से जारी मंदी ने घरेलू मांग एवं निवेश पर दबाव डाला है।

Apr 14, 2026 - 20:28
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Iran War का China की Economy पर असर, Export धीमा, Import ने तोड़ा नवंबर 2021 का रिकॉर्ड
ईरान युद्ध के झटकों की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। मार्च के महीने में चीन के निर्यात (एक्सपोर्ट) की रफ्तार सुस्त पड़ गई है, जबकि आयात (इंपोर्ट) में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। असल में हॉर्मुज जलडमरूमध्य में चल रही उथल-पुथल की वजह से सामान लाने-ले जाने का खर्च, कच्चा माल और एनर्जी की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि चीन अपने बड़े घरेलू बाजार और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम की बदौलत इस संकट को अन्य देशों के मुकाबले बेहतर तरीके से झेल लेगा। चीन के सीमा शुल्क विभाग (कस्टम विभाग) द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में चीन का निर्यात पिछले साल के मुकाबले 2.5 प्रतिशत बढ़कर 321.03 अरब डॉलर रहा, जो अर्थशास्त्रियों के 4 प्रतिशत के अनुमान से कम है। वहीं, दूसरी तरफ आयात में 27.8 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है, जो नवंबर 2021 के बाद सबसे ज्यादा है। यह आयात 269.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि जानकारों ने सिर्फ 5.62 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अंदाजा लगाया था। इस बढ़त के साथ चीन का मासिक व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) 51.1 अरब डॉलर रहा।

इसे भी पढ़ें: PoK के नजदीक China ने बना दी नई County Cenling, भारत को घेरने के लिए चली रणनीतिक चाल

आयात में आए इस बड़े उछाल की मुख्य वजह कच्चे माल (कमोडिटी) की कीमतों का बढ़ना है। उदाहरण के तौर पर, तांबे (कॉपर) के आयात की कीमत पिछले साल के मुकाबले करीब 67 प्रतिशत बढ़ गई है, जबकि इसकी मात्रा (वॉल्यूम) में केवल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसी तरह, अनगढ़े तांबे और उससे बने उत्पादों के आयात की वैल्यू भी 21 प्रतिशत बढ़ गई, जबकि हकीकत में इनकी मंगाने वाली मात्रा में 11 प्रतिशत की गिरावट आई थी। सीधी बात यह है कि चीन को अब कम सामान के लिए भी बहुत ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। आयात पिछले महीने 27.8 प्रतिशत बढ़ा जो इस वर्ष के पहले दो महीनों में सालाना आधार पर 19.8 प्रतिशत की वृद्धि से अधिक है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ईरान के साथ जारी युद्ध के प्रभाव से इस वर्ष चीनी निर्यात की समग्र वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है। 

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फ्रांसीसी बैंक नैटिक्सिस के एशिया प्रशांत क्षेत्र के वरिष्ठ अर्थशास्त्री गैरी एनजी ने कहा कि ईरान युद्ध के वैश्विक मांग और आपूर्ति शृंखलाओं पर असर पड़ने के कारण चीन के निर्यात में गिरावट आई है। बैंक ऑफ अमेरिका की प्रबंध निदेशक हेलेन कियाओ के नेतृत्व में अर्थशास्त्रियों ने एक हालिया शोध पत्र में लिखा कि जनवरी और फरवरी में चीन के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद युद्ध के मद्देनजर ऊर्जा संकट के कारण मांग में कमी आने के आसार हैं। विश्लेषक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मई में प्रस्तावित बीजिंग यात्रा पर भी करीबी नजर रख रहे हैं जहां वह चीन के नेता शी चिनफिंग से मुलाकात करेंगे। चीनी नेताओं ने 2026 के लिए वार्षिक आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य 4.5 से पांच प्रतिशत निर्धारित किया है जो 1991 के बाद से सबसे कम है। चीन ने मजबूत निर्यात के दम पर 2025 के लिए अपने करीब पांच प्रतिशत आर्थिक वृद्धि लक्ष्य को हासिल कर लिया है। इसमें रिकॉर्ड उच्च स्तर का 1200 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष शामिल है। विश्लेषकों का कहना है कि निर्यात इस वर्ष आर्थिक विस्तार को बनाए रखने के लिए एक प्रमुख चालक बना रहेगा क्योंकि चीन में संपत्ति क्षेत्र में लंबे समय से जारी मंदी ने घरेलू मांग एवं निवेश पर दबाव डाला है।