लखीसराय से मेडिकल छात्र समेत 9 गिरफ्तार:NEET री-एग्जाम में फर्जीवाड़ा; पावापुरी मेडिकल कॉलेज तक पहुंची जांच, हॉस्टल से 3 स्टूडेंट्स गायब

नीट यूजी-2026 री-एग्जाम के दौरान बिहार में एक बार फिर बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। लखीसराय जिले के हसनपुर स्थित उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक टीम की मिलीभगत से मूल परीक्षार्थी की जगह परीक्षा दे रहे एक 'स्कॉलर' को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मेडिकल छात्र, मूल परीक्षार्थी, उसके भाई और बायोमेट्रिक सत्यापन टीम के 6 कर्मियों समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। असली परीक्षार्थी की जगह बैठने के लिए 30 से 40 लाख रुपए में डील तय हुई थी। गुप्त सूचना पर केन्द्राधीक्षक और मजिस्ट्रेट ने दबोचा यह पूरी कार्रवाई रविवार, 21 जून को दोपहर की पाली (2:00 बजे से शाम 5:15 बजे) की परीक्षा के दौरान हुई। उच्च विद्यालय, हसनपुर के केन्द्राधीक्षक मृत्युंजय कुमार को परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी के शामिल होने की गुप्त सूचना मिली थी। उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी वहां तैनात मजिस्ट्रेट प्राची कुमारी और पुलिस निरीक्षक विजय कुमार को दी। इसके बाद गेट पर एडमिट कार्ड और आधार कार्ड का कड़ाई से भौतिक सत्यापन शुरू किया गया। जांच के दौरान नालंदा के परीक्षार्थी संजीत कुमार (रोल नंबर- 1524102087) के स्थान पर परीक्षा देने जा रहे एक संदिग्ध युवक को पकड़ा गया। फोर्थ ईयर का मेडिकल छात्र निकला स्कॉलर पुलिस की कड़ाई से पूछताछ में पकड़े गए युवक ने अपना नाम मंतोष कुमार (निवासी मधेपुरा) बताया। उसने कबूल किया कि वह न्यू जलपाईगुड़ी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र है और मोटी रकम के लालच में संजीत के बदले परीक्षा देने आया था। मंतोष की निशानदेही पर पुलिस ने परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे मूल परीक्षार्थी संजीत कुमार और उसके भाई रंजीत कुमार (निवासी नगरनौसा, नालंदा) को भी दबोच लिया। फिंगरप्रिंट मैच न होने पर भी अंदर भेजा इस जालसाजी में बायोमेट्रिक डेटा सत्यापन करने वाली टीम के शामिल होने से हड़कंप मच गया है। आरोपी मंतोष ने बताया कि पावापुरी मेडिकल कॉलेज के वर्ष 2022 बैच के छात्र रविशंकर उर्फ सम्राट और रंजीत कुमार ने उसे इस काम के लिए तैयार किया था। बायोमेट्रिक का टेंडर लेने वाले प्रमोद कुमार यादव के माध्यम से केंद्र पर तैनात कर्मियों को पहले ही घूस देकर मिला लिया गया था। बायोमेट्रिक सुपरवाइजर बादल कुमार ने स्वीकार किया कि फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने के बावजूद उन्होंने फर्जी तरीके से स्कॉलर को केंद्र के भीतर प्रवेश कराया था। गिरफ्तार कर्मियों में सुपरवाइजर बादल कुमार, कृष्णा कुमार, अंकित कुमार, मुकुन्द कुमार, उदय कुमार और अखिलेश कुमार शामिल है। FSL की टीम ने मौके पर पहुंचकर एडिटेड आधार कार्ड, एडमिट कार्ड, 4 अटेंडेंस टैब और कुल 9 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। पावापुरी मेडिकल कॉलेज से तीन छात्र गायब, मोबाइल स्विच ऑफ लखीसराय में हुई इस गिरफ्तारी के बाद जांच की आंच भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (BMIMS), पावापुरी तक पहुंच गई है। नीट री-एग्जाम को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने अधिसूचना जारी कर सभी छात्र-छात्राओं को कैंपस में मौजूद रहने का निर्देश दिया था। रविवार को राजगीर डीएसपी और पावापुरी पुलिस की मौजूदगी में जब एमबीबीएस छात्रों की अटेंडेंस ली गई, तो तीन छात्र गायब मिले। इनमें संदिग्ध आरोपी रविशंकर भी शामिल है, जो पिछले दो दिनों से लापता है। तीनों के मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ आ रहे हैं, जिससे 'सेटिंग गैंग' में उनकी संलिप्तता की आशंका और गहरा गई है। बड़े सॉल्वर गैंग का नेटवर्क: अब तक 24 गिरफ्तार सूत्रों के मुताबिक, इस मामले के तार बिहार के अन्य बड़े मेडिकल कॉलेजों से भी जुड़े हैं। पुलिस ने अब तक इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े 24 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पीएमसीएच, गया जी मेडिकल कॉलेज, एम्स रायबरेली और बीएचयू के मेडिकल छात्र और बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मी शामिल है। कवैया थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 2024 के तहत मामला दर्ज कर ट्रैफिक डीएसपी अजय कुमार को जांच सौंपी गई है। मुख्य सरगना रविशंकर और टेंडर प्राप्तकर्ता प्रमोद यादव की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। 'नोटिस के बाद भी छात्र गायब मिले' पावापुरी मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सर्विल कुमारी ने बताया कि नोटिस के बावजूद जो छात्र अनुपस्थित रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उनके माता-पिता को सूचित किया जाएगा। संदिग्धता के आधार पर 2022 बैच के एमबीबीएस छात्र रविशंकर की खोजबीन की गई, लेकिन वह 2 दिन से गायब है। उसके कमरे की तलाशी भी ली गई, पर वह वहां नहीं मिला। NEET फर्जीवाड़ा: आरोपी भाइयों के रसूखदार परिवार का खुलासा नीट यूजी (NEET UG) 2026 की परीक्षा में लखीसराय के हसनपुर केंद्र पर हुए बड़े फर्जीवाड़े के तार नालंदा जिले के नगरनौसा थाना क्षेत्र से जुड़ गए हैं। गिरफ्तार मूल परीक्षार्थी संजीत कुमार और उसके भाई रंजीत कुमार के नगरनौसा अंतर्गत खपुरा गांव स्थित घर पर सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस कार्रवाई के बाद गांव में इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। जांच और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार दोनों भाई संजीत और रंजीत गांव के रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता विनोद कुमार हरनौत ब्लॉक के हाई स्कूल सिरसी में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता गांव में ही आंगनवाड़ी सेविका हैं। केवल यही नहीं, आरोपियों के दादा भी सरकारी शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त (रिटायर) हैं। शिक्षकों और सरकारी सेवकों के इस परिवार का गांव में काफी प्रभाव है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, आरोपी लड़कों के दादा इलाके के दबंग व्यक्तियों में गिने जाते हैं। यही वजह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी गांव के लोग इस मामले पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। बाहर रहकर ही पढ़ाई करते थे दोनों भाई ग्रामीणों ने दबी जुबान से सिर्फ इतना बताय

Jun 23, 2026 - 08:39
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लखीसराय से मेडिकल छात्र समेत 9 गिरफ्तार:NEET री-एग्जाम में फर्जीवाड़ा; पावापुरी मेडिकल कॉलेज तक पहुंची जांच, हॉस्टल से 3 स्टूडेंट्स गायब
नीट यूजी-2026 री-एग्जाम के दौरान बिहार में एक बार फिर बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। लखीसराय जिले के हसनपुर स्थित उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक टीम की मिलीभगत से मूल परीक्षार्थी की जगह परीक्षा दे रहे एक 'स्कॉलर' को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मेडिकल छात्र, मूल परीक्षार्थी, उसके भाई और बायोमेट्रिक सत्यापन टीम के 6 कर्मियों समेत कुल 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। असली परीक्षार्थी की जगह बैठने के लिए 30 से 40 लाख रुपए में डील तय हुई थी। गुप्त सूचना पर केन्द्राधीक्षक और मजिस्ट्रेट ने दबोचा यह पूरी कार्रवाई रविवार, 21 जून को दोपहर की पाली (2:00 बजे से शाम 5:15 बजे) की परीक्षा के दौरान हुई। उच्च विद्यालय, हसनपुर के केन्द्राधीक्षक मृत्युंजय कुमार को परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी के शामिल होने की गुप्त सूचना मिली थी। उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी वहां तैनात मजिस्ट्रेट प्राची कुमारी और पुलिस निरीक्षक विजय कुमार को दी। इसके बाद गेट पर एडमिट कार्ड और आधार कार्ड का कड़ाई से भौतिक सत्यापन शुरू किया गया। जांच के दौरान नालंदा के परीक्षार्थी संजीत कुमार (रोल नंबर- 1524102087) के स्थान पर परीक्षा देने जा रहे एक संदिग्ध युवक को पकड़ा गया। फोर्थ ईयर का मेडिकल छात्र निकला स्कॉलर पुलिस की कड़ाई से पूछताछ में पकड़े गए युवक ने अपना नाम मंतोष कुमार (निवासी मधेपुरा) बताया। उसने कबूल किया कि वह न्यू जलपाईगुड़ी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र है और मोटी रकम के लालच में संजीत के बदले परीक्षा देने आया था। मंतोष की निशानदेही पर पुलिस ने परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे मूल परीक्षार्थी संजीत कुमार और उसके भाई रंजीत कुमार (निवासी नगरनौसा, नालंदा) को भी दबोच लिया। फिंगरप्रिंट मैच न होने पर भी अंदर भेजा इस जालसाजी में बायोमेट्रिक डेटा सत्यापन करने वाली टीम के शामिल होने से हड़कंप मच गया है। आरोपी मंतोष ने बताया कि पावापुरी मेडिकल कॉलेज के वर्ष 2022 बैच के छात्र रविशंकर उर्फ सम्राट और रंजीत कुमार ने उसे इस काम के लिए तैयार किया था। बायोमेट्रिक का टेंडर लेने वाले प्रमोद कुमार यादव के माध्यम से केंद्र पर तैनात कर्मियों को पहले ही घूस देकर मिला लिया गया था। बायोमेट्रिक सुपरवाइजर बादल कुमार ने स्वीकार किया कि फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने के बावजूद उन्होंने फर्जी तरीके से स्कॉलर को केंद्र के भीतर प्रवेश कराया था। गिरफ्तार कर्मियों में सुपरवाइजर बादल कुमार, कृष्णा कुमार, अंकित कुमार, मुकुन्द कुमार, उदय कुमार और अखिलेश कुमार शामिल है। FSL की टीम ने मौके पर पहुंचकर एडिटेड आधार कार्ड, एडमिट कार्ड, 4 अटेंडेंस टैब और कुल 9 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। पावापुरी मेडिकल कॉलेज से तीन छात्र गायब, मोबाइल स्विच ऑफ लखीसराय में हुई इस गिरफ्तारी के बाद जांच की आंच भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (BMIMS), पावापुरी तक पहुंच गई है। नीट री-एग्जाम को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने अधिसूचना जारी कर सभी छात्र-छात्राओं को कैंपस में मौजूद रहने का निर्देश दिया था। रविवार को राजगीर डीएसपी और पावापुरी पुलिस की मौजूदगी में जब एमबीबीएस छात्रों की अटेंडेंस ली गई, तो तीन छात्र गायब मिले। इनमें संदिग्ध आरोपी रविशंकर भी शामिल है, जो पिछले दो दिनों से लापता है। तीनों के मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ आ रहे हैं, जिससे 'सेटिंग गैंग' में उनकी संलिप्तता की आशंका और गहरा गई है। बड़े सॉल्वर गैंग का नेटवर्क: अब तक 24 गिरफ्तार सूत्रों के मुताबिक, इस मामले के तार बिहार के अन्य बड़े मेडिकल कॉलेजों से भी जुड़े हैं। पुलिस ने अब तक इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े 24 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पीएमसीएच, गया जी मेडिकल कॉलेज, एम्स रायबरेली और बीएचयू के मेडिकल छात्र और बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मी शामिल है। कवैया थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 2024 के तहत मामला दर्ज कर ट्रैफिक डीएसपी अजय कुमार को जांच सौंपी गई है। मुख्य सरगना रविशंकर और टेंडर प्राप्तकर्ता प्रमोद यादव की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। 'नोटिस के बाद भी छात्र गायब मिले' पावापुरी मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सर्विल कुमारी ने बताया कि नोटिस के बावजूद जो छात्र अनुपस्थित रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उनके माता-पिता को सूचित किया जाएगा। संदिग्धता के आधार पर 2022 बैच के एमबीबीएस छात्र रविशंकर की खोजबीन की गई, लेकिन वह 2 दिन से गायब है। उसके कमरे की तलाशी भी ली गई, पर वह वहां नहीं मिला। NEET फर्जीवाड़ा: आरोपी भाइयों के रसूखदार परिवार का खुलासा नीट यूजी (NEET UG) 2026 की परीक्षा में लखीसराय के हसनपुर केंद्र पर हुए बड़े फर्जीवाड़े के तार नालंदा जिले के नगरनौसा थाना क्षेत्र से जुड़ गए हैं। गिरफ्तार मूल परीक्षार्थी संजीत कुमार और उसके भाई रंजीत कुमार के नगरनौसा अंतर्गत खपुरा गांव स्थित घर पर सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस कार्रवाई के बाद गांव में इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। जांच और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार दोनों भाई संजीत और रंजीत गांव के रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता विनोद कुमार हरनौत ब्लॉक के हाई स्कूल सिरसी में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता गांव में ही आंगनवाड़ी सेविका हैं। केवल यही नहीं, आरोपियों के दादा भी सरकारी शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त (रिटायर) हैं। शिक्षकों और सरकारी सेवकों के इस परिवार का गांव में काफी प्रभाव है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, आरोपी लड़कों के दादा इलाके के दबंग व्यक्तियों में गिने जाते हैं। यही वजह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी गांव के लोग इस मामले पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। बाहर रहकर ही पढ़ाई करते थे दोनों भाई ग्रामीणों ने दबी जुबान से सिर्फ इतना बताया कि विनोद कुमार के दोनों बेटे (संजीत और रंजीत) बचपन से ही घर से बाहर रहकर पढ़ाई करते थे। वे गांव में कम ही आते-जाते थे, जिसके कारण उनकी गतिविधियों के बारे में स्थानीय लोगों को विशेष जानकारी नहीं थी। इसके अलावा, पिता विनोद कुमार का भी गांव के आम लोगों से बहुत ज्यादा मिलना-जुलना या सामाजिक संबंध नहीं था, जिसके चलते परिवार की बाहरी सेटिंग और नेटवर्क की भनक किसी को नहीं लग सकी।