राजगीर की 'द वाइल्ड कॉल' को दादासाहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल:राजगीर जू सफारी ने किया निर्माण, 23 प्रमुख वन्यजीव प्रजातियों से रूबरू होते दर्शन
बिहार की रचनात्मकता और तकनीकी नवाचार ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेरी है। राजगीर जू सफारी की ओर से निर्मित 12 मिनट की अत्याधुनिक 180° इमर्सिव एनिमेटेड वन्यजीव फिल्म "द वाइल्ड कॉल" ने 16वें दादासाहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2026 में 'सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म' का प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता है। 30 अप्रैल 2026 को आयोजित इस समारोह में भारतीय सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के की विरासत को नमन करते हुए इस स्वतंत्र फिल्म को सम्मानित किया गया, जो बिहार के लिए गौरव का विषय है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार के अंतर्गत राजगीर जू सफारी की ओर से निर्मित इस फिल्म का निर्देशन नवीनध एस. फरीद और अजहरूद्दीन सुलैमान ने किया है। फिल्म की सफलता के पीछे पटना के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक गोपाल सिंह (आईएफएस) और राजगीर जू सफारी के निदेशक रामसुंदर एम (आईएफएस) का सशक्त मार्गदर्शन रहा है। उच्च गुणवत्ता वाले एनिमेशन के साथ-साथ घिब्रान वैबोधा की ओर से तैयार भावनात्मक संगीत ने इस फिल्म को दर्शकों के लिए एक प्रभावशाली अनुभव बना दिया है। "द वाइल्ड कॉल" महज एक फिल्म न होकर एक भावनात्मक यात्रा है, जो शेर और बाघ के शावकों की कहानी के माध्यम से भारत की समृद्ध जैव-विविधता को प्रदर्शित करती है। फिल्म में भारतीय महासागर, पश्चिमी घाट, हिमालय और थार मरुस्थल जैसे विविध क्षेत्रों को अत्यंत जीवंत ढंग से दिखाया गया है। 23 प्रमुख वन्यजीव प्रजातियों से रूबरू होते दर्शन दर्शक इसके जरिए भारतीय हाथी और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसी 23 प्रमुख वन्यजीव प्रजातियों से रूबरू होते हैं। फिल्म न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व जैसे गंभीर विषयों पर एक सशक्त संदेश भी देती है। इस बड़ी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राजगीर जू सफारी के निदेशक रामसुंदर एम ने कहा कि यह क्षण पूरी टीम के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि फिल्म को वैश्विक स्तर की तकनीकी उत्कृष्टता के साथ तैयार किया गया है, ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके। पुरस्कार बिहार को नवाचार और पर्यावरणीय नेतृत्व के क्षेत्र में एक नई अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाता है और यह साबित करता है कि रचनात्मक माध्यमों से जन-जागरूकता को प्रभावी ढंग से बढ़ाया जा सकता है।
बिहार की रचनात्मकता और तकनीकी नवाचार ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी चमक बिखेरी है। राजगीर जू सफारी की ओर से निर्मित 12 मिनट की अत्याधुनिक 180° इमर्सिव एनिमेटेड वन्यजीव फिल्म "द वाइल्ड कॉल" ने 16वें दादासाहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2026 में 'सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म' का प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता है। 30 अप्रैल 2026 को आयोजित इस समारोह में भारतीय सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के की विरासत को नमन करते हुए इस स्वतंत्र फिल्म को सम्मानित किया गया, जो बिहार के लिए गौरव का विषय है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार के अंतर्गत राजगीर जू सफारी की ओर से निर्मित इस फिल्म का निर्देशन नवीनध एस. फरीद और अजहरूद्दीन सुलैमान ने किया है। फिल्म की सफलता के पीछे पटना के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक गोपाल सिंह (आईएफएस) और राजगीर जू सफारी के निदेशक रामसुंदर एम (आईएफएस) का सशक्त मार्गदर्शन रहा है। उच्च गुणवत्ता वाले एनिमेशन के साथ-साथ घिब्रान वैबोधा की ओर से तैयार भावनात्मक संगीत ने इस फिल्म को दर्शकों के लिए एक प्रभावशाली अनुभव बना दिया है। "द वाइल्ड कॉल" महज एक फिल्म न होकर एक भावनात्मक यात्रा है, जो शेर और बाघ के शावकों की कहानी के माध्यम से भारत की समृद्ध जैव-विविधता को प्रदर्शित करती है। फिल्म में भारतीय महासागर, पश्चिमी घाट, हिमालय और थार मरुस्थल जैसे विविध क्षेत्रों को अत्यंत जीवंत ढंग से दिखाया गया है। 23 प्रमुख वन्यजीव प्रजातियों से रूबरू होते दर्शन दर्शक इसके जरिए भारतीय हाथी और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसी 23 प्रमुख वन्यजीव प्रजातियों से रूबरू होते हैं। फिल्म न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व जैसे गंभीर विषयों पर एक सशक्त संदेश भी देती है। इस बड़ी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राजगीर जू सफारी के निदेशक रामसुंदर एम ने कहा कि यह क्षण पूरी टीम के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि फिल्म को वैश्विक स्तर की तकनीकी उत्कृष्टता के साथ तैयार किया गया है, ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके। पुरस्कार बिहार को नवाचार और पर्यावरणीय नेतृत्व के क्षेत्र में एक नई अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाता है और यह साबित करता है कि रचनात्मक माध्यमों से जन-जागरूकता को प्रभावी ढंग से बढ़ाया जा सकता है।