यमुनानगर के 2000 मेडिकल स्टोर बंद:हड़ताल कर ई-फार्मेसी के विरोध में प्रदर्शन, बोले- मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा
यमुनानगर में बुधवार को हरियाणा स्टेट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर जिलेभर के मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद हैं। जिले के करीब दो हजार मेडिकल स्टोर संचालक एक दिवसीय हड़ताल कर सरकार के खिलाफ रोष जता रहे हैं। बुधवार की सुबह दवा विक्रेताओं ने जगाधरी सिविल अस्पताल में एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद रोष मार्च निकालते हुए विधायक घनश्याम अरोड़ा के माध्यम से सरकार के नाम ज्ञापन सौंपने पहुंचे। प्रदर्शन की अगुवाई हरियाणा स्टेट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला प्रधान मनीष शर्मा ने की। बगैर डॉक्टर की पर्ची के लोगों तक पहुंच रही दवा मनीष शर्मा ने कहा कि देशभर के केमिस्ट लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर सरकार के समक्ष आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर यह राष्ट्रव्यापी बंद किया गया है। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी चिंता अवैध ई-फार्मेसी संचालन को लेकर है। ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री से बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाएं आसानी से लोगों तक पहुंच रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। एंटीबायोटिक और नशे की लत पैदा करने वाली दवाओं का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है। अप्रमाणित पर्चियों के आधार पर दवाइयों की सप्लाई एसोसिएशन ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई बार फर्जी या अप्रमाणित पर्चियों के आधार पर दवाइयों की सप्लाई की जा रही है। इससे दवा वितरण व्यवस्था प्रभावित हो रही है और फार्मासिस्ट व मरीज के बीच जरूरी संवाद खत्म होता जा रहा है। इसके अलावा नकली दवाओं और गलत तरीके से स्टोर की गई दवाओं के बाजार में आने का खतरा भी बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों ने बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारी डिस्काउंट और प्रीडेटरी प्राइसिंग के जरिए बड़ी कंपनियां छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों के व्यापार को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं। इससे छोटे और मध्यम वर्ग के केमिस्ट आर्थिक संकट में आ गए हैं। मांगें न मानने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी एसोसिएशन के जिला प्रधान मनीष शर्मा का कहना है कि कोविड काल में लागू किए गए कुछ प्रावधान अब गलत तरीके से इस्तेमाल हो रहे हैं और इससे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियमों की मूल भावना प्रभावित हो रही है। केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं है, बल्कि यह सीधे मरीज की जिंदगी और सुरक्षा से जुड़ा मामला है। मौजूदा व्यवस्था में योग्य डॉक्टर और रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के माध्यम से ही सही दवा मरीज तक पहुंचती है। यदि इस व्यवस्था को कमजोर किया गया तो इसका गंभीर असर जनस्वास्थ्य पर पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



