आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे शर्मिला टैगोर के वकील:कहा- दिल्ली AIIMS में मौजूद डॉग ने किसी को नहीं काटा; जज बोले- यह कुत्ते की महानता नहीं
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं में से एक एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर इस समस्या से निपटने के लिए हाल ही में उठाए गए कदमों का विरोध किया। उनके वकील ने कहा कि सभी कुत्ते आक्रामक नहीं होते। दिल्ली एम्स में गोल्डी नाम का एक कुत्ता है, जो सालों से वहां है लेकिन कभी किसी को नहीं काटा। इस बात पर कोर्ट ने टैगोर के वकील को फटकार लगाते हुए कहा, 'क्या उस कुत्ते को हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर भी ले जाया गया है? सड़कों पर रहने वाले कुत्तों में अक्सर कीड़े-मकोड़े होते हैं और हॉस्पिटल में ऐसे संक्रमित कुत्तों की मौजूदगी से भयावह स्थिति हो सकती है।' क्या आपको इसकी समझ है? हम आपको इस बहस की वास्तविकता से अवगत कराएंगे। आप सच्चाई से बिल्कुल परे हैं और हॉस्पिटल में ऐसे कुत्तों को अच्छा दिखाने या महान साबित करने की कोशिश न करें। वहीं ऑल क्रिएचर्स ग्रेट एंड स्मॉल (ACGS) संस्था की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले में कानून पहले से मौजूद हैं, इसलिए कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। जब संसद ने दखल नहीं दिया है, तो अदालत भी इसमें न आए। सिंघवी बोले- एमीकस क्यूरी की जगह एक्सपर्ट को लाया जाए सिंघवी ने आगे कहा कि एमीकस क्यूरी (अदालत के सलाहकार) अच्छे तो होते हैं लेकिन वे कानून के सलाहकार होते हैं। किसी सब्जेक्ट के एक्सपर्ट नहीं। ऐसे मामलों में डोमेन एक्सपर्ट्स (जैसे पशु, पर्यावरण या स्वास्थ्य विशेषज्ञ) को भी शामिल किया जाना चाहिए। सिंघवी ने अरावली केस का उदाहरण दिया, जहां पहले बनी समिति में ज्यादातर अफसर थे एक्सपर्ट नहीं। इसी वजह से उस फैसले पर दोबारा विचार करना पड़ा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली पहाड़ियों को लेकर फैसला सुनाया था। उसके अनुसार 100 मीटर से ऊपर की ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही ‘अरावली हिल्स’ माना जाना था। 29 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि पहले एक्सपर्ट राय जरूरी है। सुनवाई की 3 बड़ी बातें...
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं में से एक एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर इस समस्या से निपटने के लिए हाल ही में उठाए गए कदमों का विरोध किया। उनके वकील ने कहा कि सभी कुत्ते आक्रामक नहीं होते। दिल्ली एम्स में गोल्डी नाम का एक कुत्ता है, जो सालों से वहां है लेकिन कभी किसी को नहीं काटा। इस बात पर कोर्ट ने टैगोर के वकील को फटकार लगाते हुए कहा, 'क्या उस कुत्ते को हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर भी ले जाया गया है? सड़कों पर रहने वाले कुत्तों में अक्सर कीड़े-मकोड़े होते हैं और हॉस्पिटल में ऐसे संक्रमित कुत्तों की मौजूदगी से भयावह स्थिति हो सकती है।' क्या आपको इसकी समझ है? हम आपको इस बहस की वास्तविकता से अवगत कराएंगे। आप सच्चाई से बिल्कुल परे हैं और हॉस्पिटल में ऐसे कुत्तों को अच्छा दिखाने या महान साबित करने की कोशिश न करें। वहीं ऑल क्रिएचर्स ग्रेट एंड स्मॉल (ACGS) संस्था की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले में कानून पहले से मौजूद हैं, इसलिए कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। जब संसद ने दखल नहीं दिया है, तो अदालत भी इसमें न आए। सिंघवी बोले- एमीकस क्यूरी की जगह एक्सपर्ट को लाया जाए सिंघवी ने आगे कहा कि एमीकस क्यूरी (अदालत के सलाहकार) अच्छे तो होते हैं लेकिन वे कानून के सलाहकार होते हैं। किसी सब्जेक्ट के एक्सपर्ट नहीं। ऐसे मामलों में डोमेन एक्सपर्ट्स (जैसे पशु, पर्यावरण या स्वास्थ्य विशेषज्ञ) को भी शामिल किया जाना चाहिए। सिंघवी ने अरावली केस का उदाहरण दिया, जहां पहले बनी समिति में ज्यादातर अफसर थे एक्सपर्ट नहीं। इसी वजह से उस फैसले पर दोबारा विचार करना पड़ा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली पहाड़ियों को लेकर फैसला सुनाया था। उसके अनुसार 100 मीटर से ऊपर की ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही ‘अरावली हिल्स’ माना जाना था। 29 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि पहले एक्सपर्ट राय जरूरी है। सुनवाई की 3 बड़ी बातें...