उच्चैठ भगवती स्थान को पर्यटन स्थल बनाने का अनुरोध:मधुबनी DM ने पर्यटन विभाग को भेजा पत्र, जिले के विकास को मिलेगी गति

मधुबनी के उच्चैठ भगवती स्थान, बेनीपट्टी को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने इस संबंध में बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के सचिव को औपचारिक पत्र लिखकर स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया है। इस कदम से जिले में पर्यटन, रोजगार और समग्र विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। जिलाधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र के साथ संयुक्त इन्का कंसल्टेंट आर्किटेक्ट्स से प्राप्त एक विस्तृत प्रस्तुति भी संलग्न की गई है। इस प्रस्तुति में मंदिर परिसर के समग्र विकास, आधारभूत संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और सौंदर्यीकरण की स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत की गई है। जिला मुख्यालय मधुबनी से लगभग 26 किलोमीटर दूर उच्चैठ भगवती स्थान बेनीपट्टी अनुमंडल अंतर्गत नगर पंचायत, बेनीपट्टी में स्थित है, जो जिला मुख्यालय मधुबनी से लगभग 26 किलोमीटर दूर है। यह स्थल लगभग 11 एकड़ 61 डिसमिल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे एक प्राचीन सिद्धपीठ (शक्तिपीठ) और छिन्नमस्तिका मंदिर के रूप में देश-विदेश में ख्याति प्राप्त है। लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का समागम प्रत्येक माह बिहार के विभिन्न जिलों और पड़ोसी देश नेपाल से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन, विवाह, मुंडन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आते हैं। विशेष रूप से शारदीय नवरात्र (दुर्गापूजा) के अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का समागम होता है, जिससे यह स्थल राज्य के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में से एक बन जाता है। वरीय प्रशासनिक पदाधिकारीगण भी यहां दर्शनार्थ आते रहे इस स्थल की महत्ता को दर्शाते हुए समय-समय पर बिहार सरकार के माननीय मंत्रीगण, सांसद, विधायक, पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायाधीशगण, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा वरीय प्रशासनिक पदाधिकारीगण भी यहां दर्शनार्थ आते रहे हैं। 2019 से यहां उच्चैठ कालिदास महोत्सव का आयोजन पर्यटन विभाग, बिहार सरकार के सहयोग से वर्ष 2019 से यहां उच्चैठ कालिदास महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिष्ठित विद्वान, साहित्यकार और कलाकार भाग लेते हैं, जो मधुबनी की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

Dec 31, 2025 - 15:19
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उच्चैठ भगवती स्थान को पर्यटन स्थल बनाने का अनुरोध:मधुबनी DM ने पर्यटन विभाग को भेजा पत्र, जिले के विकास को मिलेगी गति
मधुबनी के उच्चैठ भगवती स्थान, बेनीपट्टी को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने इस संबंध में बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के सचिव को औपचारिक पत्र लिखकर स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया है। इस कदम से जिले में पर्यटन, रोजगार और समग्र विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। जिलाधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र के साथ संयुक्त इन्का कंसल्टेंट आर्किटेक्ट्स से प्राप्त एक विस्तृत प्रस्तुति भी संलग्न की गई है। इस प्रस्तुति में मंदिर परिसर के समग्र विकास, आधारभूत संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और सौंदर्यीकरण की स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत की गई है। जिला मुख्यालय मधुबनी से लगभग 26 किलोमीटर दूर उच्चैठ भगवती स्थान बेनीपट्टी अनुमंडल अंतर्गत नगर पंचायत, बेनीपट्टी में स्थित है, जो जिला मुख्यालय मधुबनी से लगभग 26 किलोमीटर दूर है। यह स्थल लगभग 11 एकड़ 61 डिसमिल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे एक प्राचीन सिद्धपीठ (शक्तिपीठ) और छिन्नमस्तिका मंदिर के रूप में देश-विदेश में ख्याति प्राप्त है। लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का समागम प्रत्येक माह बिहार के विभिन्न जिलों और पड़ोसी देश नेपाल से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन, विवाह, मुंडन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आते हैं। विशेष रूप से शारदीय नवरात्र (दुर्गापूजा) के अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का समागम होता है, जिससे यह स्थल राज्य के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में से एक बन जाता है। वरीय प्रशासनिक पदाधिकारीगण भी यहां दर्शनार्थ आते रहे इस स्थल की महत्ता को दर्शाते हुए समय-समय पर बिहार सरकार के माननीय मंत्रीगण, सांसद, विधायक, पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायाधीशगण, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा वरीय प्रशासनिक पदाधिकारीगण भी यहां दर्शनार्थ आते रहे हैं। 2019 से यहां उच्चैठ कालिदास महोत्सव का आयोजन पर्यटन विभाग, बिहार सरकार के सहयोग से वर्ष 2019 से यहां उच्चैठ कालिदास महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिष्ठित विद्वान, साहित्यकार और कलाकार भाग लेते हैं, जो मधुबनी की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।