इंदिरा गांधी नहर में इस बार दो वरीयता से पानी:21 जनवरी तक किसानों को चार में दो बारी, फिर तीन में एक बारी पानी मिलेगा
इंदिरा गांधी नहर परियोजना में आगामी महीनों के लिए पानी की उपलब्धता और वितरण को लेकर वरीयता तय कर दी गई है। शनिवार को हुई वरीयता निर्धारण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 4 जनवरी से 21 जनवरी 2026 तक नहर को चार भागों में बांटकर किसानों को दो बारी पानी दिया जाएगा। इसके बाद 21 जनवरी 2026 से 13 मार्च 2026 तक तीन में से केवल एक बारी पानी उपलब्ध कराया जाएगा। चार भागों में नहर, सीमित अवधि तक राहत बैठक में किसानों की मांगों और उपलब्ध जल की स्थिति पर चर्चा के बाद यह स्पष्ट किया गया कि पानी की मात्रा सीमित है। जनप्रतिनिधियों ने किसानों को चार भागों में नहर को विभाजित कर नियमित रूप से दो बारी पानी देने की मांग रखी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में इतना पानी उपलब्ध नहीं है। किसानों द्वारा फसल बर्बाद होने की आशंका जताने पर 21 जनवरी तक चार में दो बारी पानी देने का निर्णय लिया गया। पाकिस्तान छोड़े गए पानी पर उठा मुद्दा वरीयता निर्धारण बैठक में जनप्रतिनिधियों ने यह मुद्दा भी उठाया कि 21 सितंबर के बाद करीब 3 लाख 73 हजार क्यूसेक पानी पाकिस्तान की ओर छोड़ा गया। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि यदि यह पानी पाकिस्तान नहीं छोड़ा जाता तो पश्चिमी राजस्थान के किसानों को मौजूदा जल संकट का सामना नहीं करना पड़ता। बांधों की सुरक्षा का दिया गया हवाला इस पर विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बांधों की सुरक्षा, बाढ़ के पानी की सुरक्षित निकासी और डाउन स्ट्रीम क्षेत्रों में बाढ़ के खतरे को देखते हुए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) और केंद्रीय जल आयोग द्वारा तय नियमों के तहत ही पाकिस्तान की ओर पानी छोड़ना पड़ा। इंदिरा गांधी नहर विभाग ने आश्वासन दिया कि पाकिस्तान को छोड़े जाने वाले पानी का मुद्दा बीबीएमबी के समक्ष पहले भी उठाया जाता रहा है और आगे भी उठाया जाता रहेगा। पेयजल में कटौती के सुझाव को किया खारिज रायसिंहनगर विधायक सोहनलाल नायक ने जलदाय विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर पेयजल में कटौती कर किसानों को अधिक पानी देने का सुझाव रखा। हालांकि विभाग ने साफ किया कि राजस्थान जल नीति 2010 के तहत पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पेयजल की आवश्यकता आमजन और पशुओं दोनों के लिए होती है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की कटौती संभव नहीं है। किसानों के लिए आगे भी चुनौतीपूर्ण रहेगा समय बैठक में यह भी साफ संकेत दिए गए कि 21 जनवरी के बाद जल संकट और गहराने की संभावना है। ऐसे में किसान सीमित पानी में ही फसल बचाने के उपाय करें। विभाग ने जल प्रबंधन को लेकर लगातार समीक्षा और आवश्यकतानुसार निर्णय लेने की बात कही है। आगे नहर बंदी की स्थिति भी आ सकती है।



