साल 2025 भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए निवेश बैंकरों के लिहाज से बेहद फायदे का सौदा साबित हुआ है। आईपीओ बाजार की जबरदस्त रफ्तार के बीच इन्वेस्टमेंट बैंकों ने रिकॉर्ड कमाई की है। मौजूद जानकारी के अनुसार, साल 2025 में आईपीओ से जुड़े सौदों में बैंकरों ने करीब 4,113 करोड़ रुपये की फीस कमाई है, जो पिछले साल 2024 के 3,463 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है।
बता दें कि इस दौरान देश में 100 से ज्यादा कंपनियों ने शेयर बाजार में दस्तक दी और कुल मिलाकर 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी जुटाई गई। यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले करीब 9.4 फीसदी अधिक है। बाजार जानकारों का कहना है कि बड़े साइज के आईपीओ और बदले हुए फीस स्ट्रक्चर ने इस उछाल को और मजबूती दी है।
गौरतलब है कि बीते एक दशक में मेनबोर्ड आईपीओ का औसत आकार तेजी से बढ़ा है। जहां पहले औसतन 1,100 करोड़ रुपये के आसपास इश्यू आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा करीब 1,580 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसी वजह से इन्वेस्टमेंट बैंकों की कमाई भी कई गुना बढ़ी है।
इस साल जिन बड़े आईपीओ ने बैंकरों की झोली भरी, उनमें एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का नाम सबसे ऊपर रहा। करीब 11,600 करोड़ रुपये के इस इश्यू से बैंकों को लगभग 226 करोड़ रुपये की फीस मिली। इसके अलावा हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी, टाटा कैपिटल और ग्रो के पैरेंट ग्रुप बिलियनब्रेंस गैराज जैसे बड़े इश्यू भी चर्चा में रहे।
मौजूद आंकड़ों के अनुसार, अब मिड-साइज आईपीओ पर बैंकों को औसतन 2 से 2.5 प्रतिशत फीस मिल रही है, जबकि बड़े इश्यू में यह 1 से 1.75 प्रतिशत के बीच रहती है। वहीं छोटे 200–300 करोड़ रुपये के इश्यू में फीस 3 से 3.5 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। टेक स्टार्टअप्स के मामले में यह आंकड़ा और ऊंचा देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में यह रफ्तार और तेज हो सकती है। अनुमान है कि अगले साल 3.5 से 4 लाख करोड़ रुपये तक की फंडरेजिंग हो सकती है, जिससे निवेश बैंकों की कमाई नए रिकॉर्ड बना सकती है। कुल मिलाकर, भारत का प्राइमरी मार्केट अब वैश्विक निवेशकों के लिए भी ज्यादा आकर्षक बनता जा रहा है और यह रुझान आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।