IMA में बिना कदमताल किए लेफ्टिनेंट बनीं सई जाधव:पिपिंग सेरेमनी में मिली कमीशनिंग, बोलीं- जन्म के साथ ही शुरू हुआ मेरा सफर

देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के 93 सालों के गौरवशाली इतिहास में शनिवार को पहली बार IMA से प्रशिक्षण लेकर एक महिला ऑफिसर कैडेट ने कमीशन प्राप्त किया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि महाराष्ट्र के कोल्हापुर की रहने वाली सई जाधव (23) के नाम दर्ज हुई, जो प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशंड हुईं। अब तक महिला अधिकारी टेरिटोरियल आर्मी में रही हैं, लेकिन IMA से ट्रेनिंग लेकर पास आउट होने का गौरव पहली बार किसी महिला को मिला। हालांकि सई जाधव संयुक्त परेड का हिस्सा नहीं रहीं, लेकिन उनकी उपलब्धि पूरे समारोह की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक पहचान बन गई। स्पेशल कोर्स में हुआ था सई जाधव का चयन दरअसल इस बार IMA में पहली बार प्रादेशिक सेना के लिए एक स्पेशल कोर्स शुरू किया गया था। इसी कोर्स के तहत 23 वर्षीय सई जाधव का चयन हुआ। उन्होंने छह महीने की कठिन सैन्य ट्रेनिंग पूरी की। शनिवार को आयोजित पिपिंग सेरेमनी में सई जाधव के माता-पिता ने उनके कंधों पर लेफ्टिनेंट के सितारे लगाए। यह पल उनके और उनके परिवार के लिए भावुक कर देने वाला था क्योंकि IMA के पूरे इतिहास में यह पहली बार हुआ, जब किसी महिला ने यहां से प्रशिक्षण लेकर कमीशन प्राप्त किया। अब पढ़िए सई जाधव की पूरी कहानी... ऑल इंडिया एग्जाम से IMA तक का सफर तय किया सई जाधव का चयन आसान नहीं था। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में जन्मीं और 12वीं बेलगांव से पूरी कर उन्होंने पहले टेरिटोरियल आर्मी का ऑल इंडिया एग्जाम पास किया, इसके बाद एसएसबी इंटरव्यू में सफलता हासिल की। इसके बाद उन्हें IMA में ट्रेनिंग के लिए चुना गया। खास बात यह रही कि इस कोर्स के लिए IMA में सिर्फ एक ही सीट थी और उसी एक सीट पर सई जाधव का चयन हुआ। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी है। चार पीढ़ियों से सेना से जुड़ा परिवार जाधव का परिवार चार पीढ़ियों से सेना से जुड़ा रहा है। पिता मेजर संदीप जाधव खुद सेना में अधिकारी हैं। परदादा ब्रिटिश आर्मी में रहे। मामा भारतीय वायुसेना में सेवाएं दे चुके हैं। इस तरह सई जाधव अपने परिवार की चौथी पीढ़ी हैं, जिन्होंने वर्दी पहनी है। सई जाधव बोलीं- यह यात्रा मेरे जन्म के साथ ही शुरू हो गई थी लेफ्टिनेंट सई जाधव ने दैनिक भास्कर एप से कहा- यह पहली बार है जब IMA में महिला कैडेट्स को ट्रेनिंग दी जा रही है। पहले ‘जेंटलमैन कैडेट्स’ कहा जाता था, जो अब ‘ऑफिसर कैडेट्स’ हो गया है। यह बदलाव अपने आप में बहुत बड़ा है। पिता बोले- मेरी बेटी ने इतिहास रचा मेजर संदीप जाधव ने भावुक होते हुए कहा, हम महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के जयसिंह गांव से हैं। मेरे दादा ब्रिटिश आर्मी में थे, मामा एयरफोर्स में रहे और मैं खुद टेरिटोरियल आर्मी में अफसर हूं। आज मेरी बेटी ने IMA से प्री-कमीशन ट्रेनिंग लेकर पास आउट होकर इतिहास रचा है। वह IMA से प्रशिक्षण लेने वाली पहली महिला ऑफिसर बनी है। 2026 से IMA में महिला कैडेट्स की परेड IMA में यह बदलाव यहीं नहीं रुकेगा। जून 2026 से महिला ऑफिसर कैडेट्स, पुरुष कैडेट्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चेटवुड बिल्डिंग के सामने परेड करती नजर आएंगी। यह बदलाव भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। अब जानिए सई पासिंग आउट परेड में क्यों शामिल नहीं हुईं? सई जाधव प्रादेशिक सेना के उस विशेष और सीमित कोर्स से जुड़ी थीं, जो पहली बार भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में शुरू किया गया। यह कोर्स रेगुलर IMA कोर्स से अलग होता है। IMA की पासिंग आउट परेड में आमतौर पर वही ऑफिसर कैडेट्स कदमताल करते हैं, जिन्होंने पूरा रेगुलर प्री-कमिशन ट्रेनिंग कोर्स एक साथ पूरा किया होता है। सई जाधव का कोर्स अवधि और संरचना में अलग था, इसलिए वे संयुक्त परेड का हिस्सा नहीं बनीं। क्या है टेरिटोरियल आर्मी (प्रादेशिक सेना)? टेरिटोरियल आर्मी या प्रादेशिक सेना एक पार्ट‑टाइम, स्वयंसेवी सैन्य बल है, जो भारतीय थल सेना की 'दूसरी पंक्ति की रक्षा' के रूप में काम करता है। इसमें आम नागरिक होते हैं, जो सामान्य नौकरियों या व्यवसाय के साथ‑साथ समय निकालकर सैन्य प्रशिक्षण लेते हैं और ज़रूरत पड़ने पर वर्दी पहनकर देश की सेवा करते हैं। टेरिटोरियल आर्मी भारतीय सेना का सहायक रिज़र्व बल है, जो युद्ध या आपात स्थिति में नियमित सेना को मज़बूती देने के लिए बनाया गया है। टेरिटोरियल आर्मी कानूनी तौर पर टेरिटोरियल आर्मी अधिनियम 1948 के तहत 1949 में स्थापित की गई और अब यह नियमित सेना की संगठनात्मक संरचना का हिस्सा है। इसमें इन्फैंट्री (पैदल) बटालियन सहित अलग‑अलग यूनिटें हैं। युद्ध, प्राकृतिक आपदा, आंतरिक सुरक्षा या बड़े संकट के समय टेरिटोरियल आर्मी को बुलाकर राहत, सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने जैसे काम दिए जाते हैं।

Dec 17, 2025 - 13:50
 0
IMA में बिना कदमताल किए लेफ्टिनेंट बनीं सई जाधव:पिपिंग सेरेमनी में मिली कमीशनिंग, बोलीं- जन्म के साथ ही शुरू हुआ मेरा सफर
देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के 93 सालों के गौरवशाली इतिहास में शनिवार को पहली बार IMA से प्रशिक्षण लेकर एक महिला ऑफिसर कैडेट ने कमीशन प्राप्त किया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि महाराष्ट्र के कोल्हापुर की रहने वाली सई जाधव (23) के नाम दर्ज हुई, जो प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशंड हुईं। अब तक महिला अधिकारी टेरिटोरियल आर्मी में रही हैं, लेकिन IMA से ट्रेनिंग लेकर पास आउट होने का गौरव पहली बार किसी महिला को मिला। हालांकि सई जाधव संयुक्त परेड का हिस्सा नहीं रहीं, लेकिन उनकी उपलब्धि पूरे समारोह की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक पहचान बन गई। स्पेशल कोर्स में हुआ था सई जाधव का चयन दरअसल इस बार IMA में पहली बार प्रादेशिक सेना के लिए एक स्पेशल कोर्स शुरू किया गया था। इसी कोर्स के तहत 23 वर्षीय सई जाधव का चयन हुआ। उन्होंने छह महीने की कठिन सैन्य ट्रेनिंग पूरी की। शनिवार को आयोजित पिपिंग सेरेमनी में सई जाधव के माता-पिता ने उनके कंधों पर लेफ्टिनेंट के सितारे लगाए। यह पल उनके और उनके परिवार के लिए भावुक कर देने वाला था क्योंकि IMA के पूरे इतिहास में यह पहली बार हुआ, जब किसी महिला ने यहां से प्रशिक्षण लेकर कमीशन प्राप्त किया। अब पढ़िए सई जाधव की पूरी कहानी... ऑल इंडिया एग्जाम से IMA तक का सफर तय किया सई जाधव का चयन आसान नहीं था। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में जन्मीं और 12वीं बेलगांव से पूरी कर उन्होंने पहले टेरिटोरियल आर्मी का ऑल इंडिया एग्जाम पास किया, इसके बाद एसएसबी इंटरव्यू में सफलता हासिल की। इसके बाद उन्हें IMA में ट्रेनिंग के लिए चुना गया। खास बात यह रही कि इस कोर्स के लिए IMA में सिर्फ एक ही सीट थी और उसी एक सीट पर सई जाधव का चयन हुआ। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी है। चार पीढ़ियों से सेना से जुड़ा परिवार जाधव का परिवार चार पीढ़ियों से सेना से जुड़ा रहा है। पिता मेजर संदीप जाधव खुद सेना में अधिकारी हैं। परदादा ब्रिटिश आर्मी में रहे। मामा भारतीय वायुसेना में सेवाएं दे चुके हैं। इस तरह सई जाधव अपने परिवार की चौथी पीढ़ी हैं, जिन्होंने वर्दी पहनी है। सई जाधव बोलीं- यह यात्रा मेरे जन्म के साथ ही शुरू हो गई थी लेफ्टिनेंट सई जाधव ने दैनिक भास्कर एप से कहा- यह पहली बार है जब IMA में महिला कैडेट्स को ट्रेनिंग दी जा रही है। पहले ‘जेंटलमैन कैडेट्स’ कहा जाता था, जो अब ‘ऑफिसर कैडेट्स’ हो गया है। यह बदलाव अपने आप में बहुत बड़ा है। पिता बोले- मेरी बेटी ने इतिहास रचा मेजर संदीप जाधव ने भावुक होते हुए कहा, हम महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के जयसिंह गांव से हैं। मेरे दादा ब्रिटिश आर्मी में थे, मामा एयरफोर्स में रहे और मैं खुद टेरिटोरियल आर्मी में अफसर हूं। आज मेरी बेटी ने IMA से प्री-कमीशन ट्रेनिंग लेकर पास आउट होकर इतिहास रचा है। वह IMA से प्रशिक्षण लेने वाली पहली महिला ऑफिसर बनी है। 2026 से IMA में महिला कैडेट्स की परेड IMA में यह बदलाव यहीं नहीं रुकेगा। जून 2026 से महिला ऑफिसर कैडेट्स, पुरुष कैडेट्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चेटवुड बिल्डिंग के सामने परेड करती नजर आएंगी। यह बदलाव भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। अब जानिए सई पासिंग आउट परेड में क्यों शामिल नहीं हुईं? सई जाधव प्रादेशिक सेना के उस विशेष और सीमित कोर्स से जुड़ी थीं, जो पहली बार भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में शुरू किया गया। यह कोर्स रेगुलर IMA कोर्स से अलग होता है। IMA की पासिंग आउट परेड में आमतौर पर वही ऑफिसर कैडेट्स कदमताल करते हैं, जिन्होंने पूरा रेगुलर प्री-कमिशन ट्रेनिंग कोर्स एक साथ पूरा किया होता है। सई जाधव का कोर्स अवधि और संरचना में अलग था, इसलिए वे संयुक्त परेड का हिस्सा नहीं बनीं। क्या है टेरिटोरियल आर्मी (प्रादेशिक सेना)? टेरिटोरियल आर्मी या प्रादेशिक सेना एक पार्ट‑टाइम, स्वयंसेवी सैन्य बल है, जो भारतीय थल सेना की 'दूसरी पंक्ति की रक्षा' के रूप में काम करता है। इसमें आम नागरिक होते हैं, जो सामान्य नौकरियों या व्यवसाय के साथ‑साथ समय निकालकर सैन्य प्रशिक्षण लेते हैं और ज़रूरत पड़ने पर वर्दी पहनकर देश की सेवा करते हैं। टेरिटोरियल आर्मी भारतीय सेना का सहायक रिज़र्व बल है, जो युद्ध या आपात स्थिति में नियमित सेना को मज़बूती देने के लिए बनाया गया है। टेरिटोरियल आर्मी कानूनी तौर पर टेरिटोरियल आर्मी अधिनियम 1948 के तहत 1949 में स्थापित की गई और अब यह नियमित सेना की संगठनात्मक संरचना का हिस्सा है। इसमें इन्फैंट्री (पैदल) बटालियन सहित अलग‑अलग यूनिटें हैं। युद्ध, प्राकृतिक आपदा, आंतरिक सुरक्षा या बड़े संकट के समय टेरिटोरियल आर्मी को बुलाकर राहत, सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने जैसे काम दिए जाते हैं।