मुजफ्फरपुर में कोल्ड डे की मार झेल रहे किसान:महंगे खाद-पानी और सरकारी उपेक्षा से जूझ रहे, खेत में खड़ी फसल पर खतरा
मुजफ्फरपुर जिले में लगातार जारी कोल्ड डे और कड़ाके की ठंड ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी गेहूं, आलू और सरसों की फसल मौसम की मार झेल रही है। जिले के मीनापुर, कांटी, सकरा और कुढ़नी जैसे बड़े कृषि क्षेत्रों में किसान ठंड, बढ़ती लागत और सरकारी उपेक्षा के बीच फंसे नजर आ रहे हैं। किसान धर्मेंद्र चौबे बताते हैं कि ठंड का सीधा असर खेती-बारी पर पड़ रहा है। फसल को बचाने के लिए खेतों में बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खर्च बढ़ गया है। उनका कहना है कि खाद और बीज पहले से ही काफी महंगे हो चुके हैं, ऊपर से ठंड के कारण लागत और बढ़ रही है। किसान सलाहकारों की ओर से किसी तरह की मदद या तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है। कुछ फसलों को फायदा, ज्यादातर को नुकसान किसान मोहम्मद अली अंसारी का कहना है कि जिले में कोल्ड डे की स्थिति बनी हुई है। ठंड से लीची और आलू की कुछ किस्मों को फायदा जरूर होता है, लेकिन सरसों समेत अन्य रबी फसलों को नुकसान झेलना पड़ता है।उन्होंने बताया कि ठंड के कारण आलू और सरसों की फसलों में कीड़े लगने का खतरा बढ़ गया है, जिससे पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि वे करें तो क्या करें। कृषि सलाहकार सिर्फ योजनाओं तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर किसानों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। कई किसानों ने कहा कि अब भगवान ही किसान का मालिक है। इन इलाकों में सबसे ज्यादा खेती मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर, कांटी, सकरा और कुढ़नी प्रखंड कृषि के बड़े केंद्र माने जाते हैं। यहां बड़े पैमाने पर गेहूं, आलू और सरसों की खेती होती है, लेकिन इस बार मौसम की मार ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरने का डर पैदा कर दिया है। क्या कहता है कृषि विभाग इस मामले पर जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिले में लगातार पड़ रही ठंड से खेती-बारी प्रभावित होती है। इसे देखते हुए कृषि विभाग समय-समय पर किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाता है और फसलों को सुरक्षित रखने को लेकर आवश्यक सलाह दी जाती है।
मुजफ्फरपुर जिले में लगातार जारी कोल्ड डे और कड़ाके की ठंड ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी गेहूं, आलू और सरसों की फसल मौसम की मार झेल रही है। जिले के मीनापुर, कांटी, सकरा और कुढ़नी जैसे बड़े कृषि क्षेत्रों में किसान ठंड, बढ़ती लागत और सरकारी उपेक्षा के बीच फंसे नजर आ रहे हैं। किसान धर्मेंद्र चौबे बताते हैं कि ठंड का सीधा असर खेती-बारी पर पड़ रहा है। फसल को बचाने के लिए खेतों में बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खर्च बढ़ गया है। उनका कहना है कि खाद और बीज पहले से ही काफी महंगे हो चुके हैं, ऊपर से ठंड के कारण लागत और बढ़ रही है। किसान सलाहकारों की ओर से किसी तरह की मदद या तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है। कुछ फसलों को फायदा, ज्यादातर को नुकसान किसान मोहम्मद अली अंसारी का कहना है कि जिले में कोल्ड डे की स्थिति बनी हुई है। ठंड से लीची और आलू की कुछ किस्मों को फायदा जरूर होता है, लेकिन सरसों समेत अन्य रबी फसलों को नुकसान झेलना पड़ता है।उन्होंने बताया कि ठंड के कारण आलू और सरसों की फसलों में कीड़े लगने का खतरा बढ़ गया है, जिससे पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि वे करें तो क्या करें। कृषि सलाहकार सिर्फ योजनाओं तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर किसानों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। कई किसानों ने कहा कि अब भगवान ही किसान का मालिक है। इन इलाकों में सबसे ज्यादा खेती मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर, कांटी, सकरा और कुढ़नी प्रखंड कृषि के बड़े केंद्र माने जाते हैं। यहां बड़े पैमाने पर गेहूं, आलू और सरसों की खेती होती है, लेकिन इस बार मौसम की मार ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरने का डर पैदा कर दिया है। क्या कहता है कृषि विभाग इस मामले पर जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिले में लगातार पड़ रही ठंड से खेती-बारी प्रभावित होती है। इसे देखते हुए कृषि विभाग समय-समय पर किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाता है और फसलों को सुरक्षित रखने को लेकर आवश्यक सलाह दी जाती है।