जी राम जी विधेयक- 6 राज्यों ने दर्ज कराया विरोध:दावा- सारे फैसले केंद्र के हाथ, भेदभाव की आशंका; राज्यों पर भी 4 गुना तक बोझ
मनरेगा में बदलाव के विरोध में कांग्रेस शनिवार से 45 दिन चलने वाला आंदोलन शुरू कार रही है। कर्नाटक, तेलंगाना और पंजाब ने तो जी राम जी कानून के खिलाफ बाकायदा प्रस्ताव पारित किया है। तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल भी खुलकर इसका विरोध जता रहे हैं। इन राज्यों की आपत्तियां हैं कि मनरेगा से ‘महात्मा गांधी’ का नाम क्यों हटा, योजना को मांग आधारित से आपूर्ति आधारित ढांचे में क्यों नहीं बदला, राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ाने के साथ-साथ केंद्र का पूर्ण नियंत्रण क्यों थोपा। विपक्षी दलों का कहना है कि यह कदम राज्य सरकारों की स्वायत्तता और ग्रामीण रोजगार अधिकारों पर हमला है। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा, कर्नाटक में नई ग्रामीण रोजगार योजना लागू करने के लिए अगले 5 साल में राज्य सरकार को करीब 20,000 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। कर्नाटक ने तो इसे कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान भी किया है। रिसर्च में दावा: राज्यों को 17 हजार करोड़ का लाभ एसबीआई रिसर्च के एक पेपर के अनुसार, वीबी‑जी राम जी एक्ट लागू होने पर राज्यों को 17,000 करोड़ रु. का लाभ होने का अनुमान है। यह राशि पिछले 7 साल के मनरेगा आवंटन से तुलना करके निकाली गई है। नए ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच निधि का वितरण मानक आधार (नॉर्मेटिव असेसमेंट) पर होगा, जिसमें समानता और दक्षता को ध्यान में रखा गया है। यह नया मॉडल राज्यों को वित्तीय मदद के साथ रोजगार की गारंटी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। केंद्र सरकार ने योजना के ये फायदे बताए पढ़ें चेन्नई से आर रामकुमार/तिरुवनंतपुरम से टीके हरीश और कोलकाता से प्रभाकर मणि तिवारी की ग्राउंड रिपोर्ट... प. बंगाल: बांग्ला अस्मिता पर बड़ा हमला, सामाजिक बोझ: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (तृणमूल, सरकार) ने कहा, ‘योजना का नाम बदलना बंगाल और बंगालियों की अस्मिता का अपमान है।’ तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी ने जोड़ा, ‘केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी और टैगोर दोनों का अपमान किया है।’ पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, ‘राज्य हिस्सेदारी बढ़ाने और योजना को केंद्र के पूर्ण नियंत्रण में देने से खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा और राज्य की स्वायत्तता प्रभावित होगी।’ विपक्षी कांग्रेस और कुछ लेफ्ट पार्टी नेताओं (विपक्ष) ने भी बिल को राज्य सरकार और गरीबों के हितों के खिलाफ करार दिया। केरल: राज्यों के अधिकार खत्म होंगे, वित्तीय संतुलन पर खतरा: सीएम पिनराई विजयन (सीपीआई-एम, एलडीएफ सरकार) ने कहा, ‘केंद्र अब राज्यों पर खर्च का बोझ डाल रहा है और योजना का नियंत्रण पूरी तरह अपने हाथ में ले रहा है।’ राज्य के पंचायत मंत्री एमबी राजेश ने जोड़ा, ‘यदि 40% खर्च राज्य को देना पड़ा, तो सालाना 1,600 करोड़ रु. अतिरिक्त बोझ आएगा।’ विपक्षी कांग्रेस (यूडीएफ, विपक्ष) ने भी विधेयक का विरोध किया और राज्य के हितों की रक्षा की मांग की। एलडीएफ के अन्य नेताओं ने भी चेतावनी दी कि योजना के लागू होने वाले क्षेत्र और मजदूरी के पैमाने पर केंद्र का हस्तक्षेप गंभीर परिणाम ला सकता है। तमिलनाडु: देश के संघीय ढांचे पर हमला, मजदूरों के हक खत्म: सीएम स्टालिन (द्रमुक) ने वीबी‑जी राम जी बिल को लेकर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि योजना का नाम बदलना और ‘महात्मा गांधी’ हटाना अपमानजनक है, साथ ही वित्तीय बोझ बढ़ाना राज्यों के लिए नुकसानदेह कदम है। सयह संघीय ढांचे और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है। वरिष्ठ नेता डी. रवीकुमार (वीसीके, सरकार में सहयोगी) ने जोड़ा, ‘योजना का नाम बदलना और वित्तीय भार बढ़ाना सीधे जनता के हित के खिलाफ है।’ एमडीएमके के नेता दुरई वैको (विपक्ष) ने चेतावनी दी, ‘अब राज्य को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा, जबकि केंद्र का नियंत्रण पूर्ण रहेगा।’
मनरेगा में बदलाव के विरोध में कांग्रेस शनिवार से 45 दिन चलने वाला आंदोलन शुरू कार रही है। कर्नाटक, तेलंगाना और पंजाब ने तो जी राम जी कानून के खिलाफ बाकायदा प्रस्ताव पारित किया है। तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल भी खुलकर इसका विरोध जता रहे हैं। इन राज्यों की आपत्तियां हैं कि मनरेगा से ‘महात्मा गांधी’ का नाम क्यों हटा, योजना को मांग आधारित से आपूर्ति आधारित ढांचे में क्यों नहीं बदला, राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ाने के साथ-साथ केंद्र का पूर्ण नियंत्रण क्यों थोपा। विपक्षी दलों का कहना है कि यह कदम राज्य सरकारों की स्वायत्तता और ग्रामीण रोजगार अधिकारों पर हमला है। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा, कर्नाटक में नई ग्रामीण रोजगार योजना लागू करने के लिए अगले 5 साल में राज्य सरकार को करीब 20,000 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। कर्नाटक ने तो इसे कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान भी किया है। रिसर्च में दावा: राज्यों को 17 हजार करोड़ का लाभ एसबीआई रिसर्च के एक पेपर के अनुसार, वीबी‑जी राम जी एक्ट लागू होने पर राज्यों को 17,000 करोड़ रु. का लाभ होने का अनुमान है। यह राशि पिछले 7 साल के मनरेगा आवंटन से तुलना करके निकाली गई है। नए ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच निधि का वितरण मानक आधार (नॉर्मेटिव असेसमेंट) पर होगा, जिसमें समानता और दक्षता को ध्यान में रखा गया है। यह नया मॉडल राज्यों को वित्तीय मदद के साथ रोजगार की गारंटी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। केंद्र सरकार ने योजना के ये फायदे बताए पढ़ें चेन्नई से आर रामकुमार/तिरुवनंतपुरम से टीके हरीश और कोलकाता से प्रभाकर मणि तिवारी की ग्राउंड रिपोर्ट... प. बंगाल: बांग्ला अस्मिता पर बड़ा हमला, सामाजिक बोझ: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (तृणमूल, सरकार) ने कहा, ‘योजना का नाम बदलना बंगाल और बंगालियों की अस्मिता का अपमान है।’ तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी ने जोड़ा, ‘केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी और टैगोर दोनों का अपमान किया है।’ पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, ‘राज्य हिस्सेदारी बढ़ाने और योजना को केंद्र के पूर्ण नियंत्रण में देने से खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा और राज्य की स्वायत्तता प्रभावित होगी।’ विपक्षी कांग्रेस और कुछ लेफ्ट पार्टी नेताओं (विपक्ष) ने भी बिल को राज्य सरकार और गरीबों के हितों के खिलाफ करार दिया। केरल: राज्यों के अधिकार खत्म होंगे, वित्तीय संतुलन पर खतरा: सीएम पिनराई विजयन (सीपीआई-एम, एलडीएफ सरकार) ने कहा, ‘केंद्र अब राज्यों पर खर्च का बोझ डाल रहा है और योजना का नियंत्रण पूरी तरह अपने हाथ में ले रहा है।’ राज्य के पंचायत मंत्री एमबी राजेश ने जोड़ा, ‘यदि 40% खर्च राज्य को देना पड़ा, तो सालाना 1,600 करोड़ रु. अतिरिक्त बोझ आएगा।’ विपक्षी कांग्रेस (यूडीएफ, विपक्ष) ने भी विधेयक का विरोध किया और राज्य के हितों की रक्षा की मांग की। एलडीएफ के अन्य नेताओं ने भी चेतावनी दी कि योजना के लागू होने वाले क्षेत्र और मजदूरी के पैमाने पर केंद्र का हस्तक्षेप गंभीर परिणाम ला सकता है। तमिलनाडु: देश के संघीय ढांचे पर हमला, मजदूरों के हक खत्म: सीएम स्टालिन (द्रमुक) ने वीबी‑जी राम जी बिल को लेकर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि योजना का नाम बदलना और ‘महात्मा गांधी’ हटाना अपमानजनक है, साथ ही वित्तीय बोझ बढ़ाना राज्यों के लिए नुकसानदेह कदम है। सयह संघीय ढांचे और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है। वरिष्ठ नेता डी. रवीकुमार (वीसीके, सरकार में सहयोगी) ने जोड़ा, ‘योजना का नाम बदलना और वित्तीय भार बढ़ाना सीधे जनता के हित के खिलाफ है।’ एमडीएमके के नेता दुरई वैको (विपक्ष) ने चेतावनी दी, ‘अब राज्य को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा, जबकि केंद्र का नियंत्रण पूर्ण रहेगा।’